अररिया DM विनोद दूहन ने बैंकों को दिए लंबित लोन पास करने के निर्देश, जूट हब बनेगा जिला

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अधिकारियों के साथ बैठक करते जिलाधिकारी | Prabhat Khabar Network

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अररिया जिले में स्वरोजगार और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए जिलाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में 'उद्योग टास्क फोर्स' की बैठक हुई. इस दौरान बैंकों में लंबित पड़े ऋण आवेदनों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए. फारबिसगंज और नरपतगंज में नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होंगे.

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अररिया जिले में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने, स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी (DM) विनोद दूहन की अध्यक्षता में 'उद्योग टास्क फोर्स' की एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक के दौरान विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत बैंकों में महीनों से लंबित पड़े ऋण (लोन) आवेदनों पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने सभी बैंक प्रबंधकों को सख्त हिदायत दी कि वे बिना किसी ठोस कारण के आवेदनों को लंबित न रखें और पात्र लाभार्थियों के लोन जल्द से जल्द स्वीकृत करें.

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इन प्रमुख स्वरोजगार योजनाओं की हुई गहन समीक्षा

बैठक में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित उन सभी बड़ी योजनाओं की बिंदुवार प्रगति जांची गई, जो सीधे तौर पर ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं:

  • मुख्य योजनाएं: मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, बिहार लघु उद्यमी योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना.
  • अनावश्यक देरी पर रोक: डीएम विनोद दूहन ने कहा कि जो आवेदक सरकार द्वारा तय की गई सभी योग्यताओं और मानकों को पूरा करते हैं, उन्हें ऋण राशि जारी करने में बैंकों द्वारा अनावश्यक रूप से परेशान या विलंब नहीं किया जाना चाहिए. सभी संबंधित विभाग और बैंक आपसी समन्वय बनाकर काम करें.

फारबिसगंज और नरपतगंज में स्थापित होंगे नए औद्योगिक क्षेत्र

जिले में बुनियादी औद्योगिक ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए जिलाधिकारी ने भूमि उपलब्धता को लेकर बड़े निर्देश दिए हैं:

  1. जमीन का चिह्निकरण: फारबिसगंज और नरपतगंज प्रखंडों में नए उद्योगों की स्थापना के लिए उपयुक्त और सरकारी भूमि को चिह्नित करने का कार्य तत्काल शुरू करने को कहा गया है.
  2. आधारभूत सुविधाएं: इन चिह्नित क्षेत्रों में बिजली, सड़क और पानी जैसी आवश्यक विभागीय सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि नए उद्यमी अपनी इकाइयां बिना किसी बाधा के स्थापित कर सकें.

अररिया में जूट आधारित उद्योगों की बढ़ेगी धमक, जीविका को मिली कमान

बिहार का यह सीमावर्ती क्षेत्र जूट (पटसन) उत्पादन के लिए जाना जाता है. इसी क्षमता का व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए बैठक में जूट आधारित लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई:

"अररिया में उत्पादित होने वाले उच्च गुणवत्ता के जूट से स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं. इसके लिए जीविका (Jeevika) के जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे जूट से तैयार होने वाले आधुनिक और व्यावसायिक उत्पादों का गहन अध्ययन करें और एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) प्रशासन को सौंपें." — विनोद दूहन, जिलाधिकारी, अररिया

इसके साथ ही, अग्रणी बैंक प्रबंधक (LDM) को निर्देशित किया गया है कि वे जूट आधारित स्टार्टअप और उद्यम शुरू करने वाले स्थानीय युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों को आसान शर्तों पर वर्किंग कैपिटल और बिजनेस लोन उपलब्ध कराने के लिए विशेष कैंपों का आयोजन सुनिश्चित करें.


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