भारत-नेपाल बॉर्डर पर बप्पा की धूम: मोदक वितरण और अबीर-गुलाल के बीच हुआ गणपति विसर्जन

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विसर्जन के दौरान भक्तजन. | Prabhat Khabar Network

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भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के रानी में गणेश पूजनोत्सव अभूतपूर्व उत्साह से मनाया गया. इस बार पूरे आयोजन की बागडोर महिलाओं ने संभाली, जो इसकी सबसे प्रेरक बात रही. नम आँखों से गणपति विसर्जन के साथ उत्सव का समापन हुआ.

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भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे विराटनगर के सीमावर्ती क्षेत्र रानी (नेपाल) में इस बार गणेश पूजनोत्सव का अभूतपूर्व उत्साह और भक्ति भाव देखने को मिला.

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सीमांचल के भारतीय इलाकों की तरह ही सीमा पार नेपाल के रानी में भी स्थानीय श्रद्धालुओं ने बड़े ही विधि-विधान, पारंपरिक आस्था और उल्लास के साथ सिद्धि विनायक भगवान गणेश की आराधना की. पूजा पंडालों में वैदिक मंत्रोच्चार और संकीर्तन से कई दिनों तक पूरा सीमावर्ती इलाका आध्यात्मिक छटा में डूबा रहा.

'गणपति बप्पा मोरया' के नारों से गूंजी सीमा, रविवार शाम नम आंखों से विसर्जन

उत्सव के समापन पर रविवार की देर शाम नेपाल के रानी में गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य गणपति विसर्जन यात्रा निकाली गई.

शोभायात्रा मार्ग पर हजारों श्रद्धालु सड़क के दोनों ओर बप्पा के अंतिम दर्शन के लिए खड़े नजर आए. पूरे रास्ते 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के नारों से माहौल भक्तिरस से सराबोर रहा. श्रद्धालुओं ने आरती और पुष्प वर्षा कर विघ्नहर्ता को नम आंखों से अंतिम विदाई दी और पवित्र जलाशय में प्रतिमा विसर्जित की.

महिलाओं ने संभाला मोर्चा, आरती से लेकर विसर्जन तक निभाई मुख्य भूमिका

इस बार के पूरे गणेश पूजनोत्सव की सबसे विशिष्ट और प्रेरक बात यह रही कि पूरे आयोजन की बागडोर महिलाओं ने अपने हाथों में ले रखी थी.

पुरुषों की तुलना में महिला शक्ति ने पूजा, दैनिक महाआरती, प्रसाद निर्माण से लेकर विसर्जन यात्रा तक के हर चरण का कुशलतापूर्वक संचालन किया. विसर्जन शोभायात्रा में महिलाएं और बच्चे पारंपरिक परिधानों में अबीर-गुलाल उड़ाते, ताली बजाते और गणेश भजनों पर झूमते हुए आगे-आगे चल रहे थे.

बप्पा के प्रिय मोदक का हुआ वितरण, विसर्जन में ये श्रद्धालु रहीं प्रमुख

विसर्जन के पावन अवसर पर उपस्थित हजारों भक्तों और सीमावर्ती इलाके के श्रद्धालुओं के बीच भगवान गणेश के अतिप्रिय भोग मोदक और लड्डू का महाप्रसाद वितरित किया गया.

इस ऐतिहासिक आयोजन और विसर्जन शोभायात्रा को सफल बनाने में प्रमुख रूप से राधिका गुरुंग, एलिसा गुरुंग, किरण साह, खुशबू कामत, अमन गुरुंग, अंकिता श्रेष्ठ, कोमल गिरी, सबीना भुजैल, अभय गुरुंग, मेनुका भुजैल, अंकिता सिंह, संजीता कामत और तृष्णा कामत सहित दर्जनों महिला श्रद्धालु सक्रिय रूप से शामिल रहीं.

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