बच्चा खाड़ी गांव के लोग आज भी बांस की चचरी के सहारे पार करते हैं नदी

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अररिया से अशोक झा बबलू रिपोर्ट पलासी अररिया में आज भी बांस की चचरी के सहारे नदी पार करते हैं ग्रामीण: बरसात में कट जाता है गांव का संपर्क  बोले पछत्तर वर्ष बाद भी नहीं बना पुल-सड़क

अररिया के पलासी में आजादी के 75 साल बाद भी पुल नहीं बना। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर बांस की चचरी से नदी पार करने को मजबूर हैं। प्रशासन से पुल की मांग की।

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पलासी (अररिया). जिले के पलासी प्रखंड के पिपरा बिजवाड पंचायत अंतर्गत बच्चा खाड़ी वार्ड संख्या तीन के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को विवश हैं. गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए न तो पक्की व पुल है. ऐसे में ग्रामीण वर्षों से नदी पार करने के लिए बांस से बनी चचरी का सहारा लें कर नदी आर-पार कर रहे हैं.बरसात आते ही यही चचरी ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी मजबूरी बन जाती है. तेज बहाव के बीच जान जोखिम में डालकर लोगों को रोजाना नदी पार करनी पड़ती है.ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही चचरी पर चलना बेहद खतरनाक हो जाता है.

स्कूली बच्चे, मरीज, महिलाएं, किसान व बुजुर्ग इसी रास्ते से आने-जाने को मजबूर

गांव के स्कूली बच्चे, मरीज, महिलाएं, किसान व बुजुर्ग इसी रास्ते से आने-जाने को मजबूर रहते हैं. कई बार बारिश के कारण कई दिनों तक गांव का संपर्क पूर्णरूपेण बंद हो जाता है.प्रखंड व जिला मुख्यालय से कट जाता है. गांव टापू में तब्दील हो जाता है.ऐसे में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने व किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि थोड़ी सी बारिश भी पूरे गांव की मुश्किलें बढ़ा देती है.वही किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है. बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो जाती है.

पानी के तेज बहाव के समय बच्चों को स्कूल भेजने से बचते हैं

तेज बहाव के दौरान अभिभावक बच्चों को चचरी पार कर स्कूल भेजने से डरते हैं. ग्रामीण अशफाक आलम, मंगलू राम, बोकाई राम, सुरेश राम, बहुजन राम, सहदेव राम, महादेव राम, गुलई राम, शंभू राम, कस्तूर अली, वार्ड सदस्य खलीफुर रहमान, मैनुल हक ,कलीमुद्दीन ने बताया कि आजादी के पछत्तर वर्ष से अधिक का सफर तय कर चुका है बच्चा खाड़ी के ग्रामीणों.लेकिन उनके गांव की मूलभूत समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है. उनका कहना है कि वर्षों से नदी पर पक्की पुल व संपर्क सड़क निर्माण की मांग की जा रही है.लेकिन अब तक किसी स्तर पर ठोस पहल नहीं उठाई हुई हैं .ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि पुल व सड़क निर्माण का आश्वासन देते हैं. लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद वादे भूल जाते हैं.

पुल नहीं होने से होती है परेशानी

गांव के लोगों को हर साल बरसात में भुगतना पड़ता है. उनका कहना है कि सड़क व पुल नहीं होने का सबसे अधिक असर शिक्षा, स्वास्थ्य व खेती पर पड़ रहा है.ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से मांग की है कि बच्चा खाड़ी वार्ड संख्या-03 में बकरा नदी पर जल्द से जल्द पक्की पुल व संपर्क सड़क का निर्माण कराया जाए. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते हमलोगों की समस्या का समाधान नहीं कराया गया तो बरसात के दौरान किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी मांग पर गंभीरता से विचार करेगा. ताकि उन्हें हर बरसात में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से राहत मिल सके. फोटो. बच्चा खाड़ी गांव के ग्रामीणों को आज भी बांस चचरी के सहारे गांव-जाना पड़ता है.


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