अररिया में उर्वरक निगरानी समिति के आदेश बेअसर, किसानों को अब भी तय कीमत से महंगा मिल रहा खाद
20 जून को उर्वरक निगरानी समिति की बैठक में निर्देशित करते डीएम बिनोद दूहन | Prabhat Khabar Network
अररिया जिले में खरीफ सीजन के बीच किसानों को यूरिया और डीएपी खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. निर्धारित दर से महंगा खाद मिलने के साथ-साथ किसानों को दुकानों पर अन्य कृषि उत्पाद भी जबरन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है. प्रशासनिक बैठकों के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदली है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं.
Araria News: अररिया जिले में खरीफ सीजन के बीच उर्वरक संकट और महंगे खाद की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. प्रशासनिक बैठकों में सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद किसानों का कहना है कि उन्हें अभी भी निर्धारित दर पर यूरिया और डीएपी नहीं मिल रहा है. कई किसानों का आरोप है कि खाद खरीदने के लिए दुकानों पर जाने पर उन्हें अतिरिक्त दवा, बीज या अन्य कृषि उत्पाद भी साथ में खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है.
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि जिला प्रशासन ने हाल ही में उर्वरक की उपलब्धता, कालाबाजारी और ओवररेटिंग रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने की बात कही थी.
20 जुलाई की बैठक में क्या हुआ था
20 जुलाई 2026 को समाहरणालय के परमान सभागार में जिला पदाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में जिला उर्वरक निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, मांग और आपूर्ति की समीक्षा की गई थी.
डीएम ने विशेष रूप से यूरिया की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखने, कालाबाजारी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित उर्वरक दुकानों की नियमित जांच के निर्देश दिए थे. उन्होंने यह भी कहा था कि 10 बैग से अधिक यूरिया खरीदने वाले किसानों की सूची बनाकर उसकी जांच कराई जाए.
बैठक में बताया गया था कि अररिया जिले में 1,572 अनुज्ञप्तिधारी उर्वरक विक्रेता कार्यरत हैं.
किसानों की शिकायत- आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित
बैठक के बाद किसानों को उम्मीद थी कि अब उन्हें निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध होगा. लेकिन किसानों का कहना है कि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.
कई किसानों का आरोप है कि यूरिया और डीएपी तय कीमत से अधिक दर पर बेचे जा रहे हैं. इसके अलावा खाद के साथ दवा, बीज और अन्य कृषि सामग्री जबरन जोड़ दी जाती है, जिससे किसानों को अधिक भुगतान करना पड़ता है.
किसानों का कहना है कि यदि वे केवल खाद खरीदना चाहते हैं, तब भी कई जगह अतिरिक्त उत्पाद लेने का दबाव बनाया जाता है.
सीमावर्ती इलाकों में कालाबाजारी की चर्चा
स्थानीय लोगों और किसानों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में रात के समय खाद की ढुलाई और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित जांच अभियान चलता, तो इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती थी. किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने के कारण स्थिति पहले जैसी बनी हुई है.
Araria News: खेती की लागत लगातार बढ़ रही
खाद की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे खेती की लागत पर पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई पहले ही महंगी हो चुकी है. ऐसे में यदि उर्वरक भी निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मिलेगा, तो उत्पादन लागत और बढ़ जाएगी.
छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक कठिन बताई जा रही है, क्योंकि उन्हें सीमित संसाधनों में खेती करनी पड़ती है.
Also Read: पटना में सफाईकर्मियों की हड़ताल आठवें दिन खत्म, सीधे अकाउंट में वेतन व बोनस का मिलेगा लाभ
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
जिला प्रशासन ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कालाबाजारी और ओवररेटिंग की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई होगी. लेकिन किसानों का कहना है कि यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन उर्वरक निगरानी समिति के निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू कराने के लिए क्या कदम उठाता है और किसानों को समय पर तथा सही दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए कितनी सख्ती दिखाता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में
By मृगेंद्रमणि सिंह
मृगेंद्रमणि सिंह प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के अररिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए





