पटना में सफाईकर्मियों की हड़ताल आठवें दिन खत्म, सीधे अकाउंट में वेतन व बोनस का मिलेगा लाभ

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पटना नगर निगम सफाई कर्मियों की हड़ताल समाप्त हो गई है. समझौते के बाद प्रतिनिधियों और मंत्री नीतीश मिश्रा ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई.

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Patna Nagar Nigam : राजधानी पटना में सात दिनों से जारी नगर निकाय सफाई कर्मियों की हड़ताल समाप्त हो गई है. समझौते के बाद सफाईकर्मी संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा से मुलाकात की. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर समझौते पर खुशी जताई. बैठक में पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा भी मौजूद रहे.

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इस मौके पर पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि दैनिक कर्मियों को अब अवकाश, ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह अन्य सेवा लाभ भी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी.

पटना नगर निगम की  बैठक में शामिल मेयर, नगर आयुक्त, डिप्टी मेयर व अन्य.
पटना नगर निगम की बैठक में शामिल मेयर, नगर आयुक्त, डिप्टी मेयर व अन्य.

सीधे बैंक खाते में जाएगा वेतन, पहली बार मिलेगा बोनस

बैठक में तय हुआ कि आउटसोर्सिंग व ठेका एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मियों का वेतन सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जाएगा. साथ ही उन्हें पहली बार बोनस का भी लाभ मिलेगा. एजेंसियों को उनका निर्धारित कमीशन दिया जाएगा. इसके अलावा, काम के दौरान वाहन खराब होने की अवधि में चालकों का वेतन काटे जाने की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है.

3816 दैनिक कर्मियों के स्थायीकरण से 13.66 करोड़ का बढ़ेगा सालाना भार

सशक्त स्थायी समिति की विशेष बैठक में सफाई कर्मियों की मांगों को मंजूरी देकर विभाग को भेजने की अनुशंसा की गई है. पटना नगर निगम में कार्यरत 3816 दैनिक कर्मियों के स्थायीकरण का प्रस्ताव लागू होने पर हर माह करीब 13.66 करोड़ रुपये वेतन में खर्च होंगे. एक कर्मी का प्रस्तावित मासिक वेतन 35 हजार 800 रुपये निर्धारित किया गया है. वर्तमान में दैनिक पारिश्रमिक पर इन कर्मियों पर 6.04 करोड़ रुपये प्रति माह खर्च हो रहे हैं. ऐसे में स्थायीकरण लागू होने पर नगर निगम पर 7.61 करोड़ रुपये प्रति माह का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा. इसका वार्षिक खर्च करीब 163.94 करोड़ रुपये बैठेगा.

विभिन्न अंचलों में कार्यरत कर्मियों का विवरण

निगम के आठ कार्यालयों व अंचलों में कुल 3816 दैनिक कर्मी कार्यरत हैं. इनमें सबसे अधिक 941 कर्मी नूतन राजधानी अंचल में हैं. इसके अलावा पाटलिपुत्र अंचल में 700, अजीमाबाद में 585, बांकीपुर में 513, कंकड़बाग में 426, पटना सिटी में 405, जलापूर्ति अंचल में 199 तथा मुख्यालय में 47 दैनिक कर्मी कार्यरत हैं.

अन्य मांगों पर पत्राचार और समिति का गठन

नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि कई मांगों पर सहमति बन गई है, जबकि कुछ अन्य मांगों पर विचार के लिए समिति गठित की जाएगी. तीसरी मांग के संबंध में एसीपी/एमएससीपी योजना के लाभ पर विभाग द्वारा लगाई गई रोक को हटाने के लिए पत्राचार करने और रोक हटते ही शेष बचे कर्मचारियों को इसका लाभ देने पर सहमति बनी है. नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि शहर को गंदगी से बचाने के लिए सफाई कर्मियों का काम पर लौटना बेहद जरूरी था.

Patna News : गंदगी से जूझ रहा था शहर

हड़ताल का असर साफ तौर पर शहर की सड़कों और गलियों में दिख रहा था. कई इलाकों में कूड़े के ढेर जमा हो गए थे, जिससे लोगों को बदबू और बीमारी के खतरे का सामना करना पड़ रहा था. आम नागरिकों की परेशानी बढ़ती जा रही थी और नगर निगम पर व्यवस्था दुरुस्त करने का दबाव भी बढ़ गया था.

स्थिति को देखते हुए निगम प्रशासन ने तुरंत पहल की और बैठक बुलाकर कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुना. अधिकारियों ने माना कि सफाई व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान जरूरी है.

किन मांगों पर बनी सहमति

बैठक में कर्मचारियों की तीन अहम मांगों पर सहमति बनी. इनमें वेतन से जुड़े मुद्दे, सेवा शर्तों में सुधार और काम के दौरान मिलने वाली सुविधाएं शामिल हैं. सफाईकर्मियों का कहना था कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा और सुरक्षा उपकरणों की भी कमी है.

पहली मांग में दैनिक और संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को वेतनमान में समायोजित करने और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

दूसरी मांग में आउटसोर्सिंग और ठेका एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मियों का वेतन अब किसी बिचौलिए के बजाय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा.

तीसरी मांग में एसीपी और एमएससीपी योजना के लाभ पर विभाग की ओर से लगी रोक हटाने का निर्णय लिया गया है. रोक हटते ही पात्र कर्मचारियों को योजना का लाभ देने पर भी सहमति बनेगी.

सशक्त स्थायी समिति ने इन मांगों को उचित मानते हुए सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी. अब इन सभी बिंदुओं को प्रस्ताव के रूप में विभाग के पास भेजा जाएगा, जहां से अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

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