अररिया में जहां सदियों से जल रही है शिवभक्ति की अलख, नेपाल से भी आते हैं श्रद्धालु
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 17 May 2026 8:41 AM
Madaneshwar Dham Araria
Aaj ka Darsan: अररिया का एक ऐसा शिवधाम, जहां सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब, जहां इतिहास, पुरातत्व और श्रद्धा एक साथ दिखाई देते हैं. सीमांचल का यह प्राचीन मंदिर आज भी लाखों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है.
Aaj ka Darsan: अररिया से मृगेंद्र मणि सिंह की रिपोर्ट . बिहार के अररिया जिले के मदनपुर गांव में स्थित मदनेश्वर स्थान यानी मदनेश्वर धाम सिर्फ एक शिव मंदिर नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, इतिहास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है. सीमांचल और पूर्वांचल के सबसे प्रसिद्ध शिवधामों में गिने जाने वाले इस मंदिर में हर साल भारत और नेपाल से लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. खासकर सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
सदियों पुराना है मदनेश्वर धाम का इतिहास
स्थानीय मान्यताओं और इतिहासकार डॉ. बुकानन की पूर्णिया रिपोर्ट के अनुसार, मदनेश्वर धाम का निर्माण करीब वर्ष 1740 के आसपास कराया गया था. कहा जाता है कि पूर्णिया के तत्कालीन फौजदार नवाब सैफ खां के दीवान राजा नंद लाल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था. मंदिर में स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, जिसके कारण इसकी धार्मिक मान्यता और भी बढ़ जाती है.
मदनेश्वर धाम सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. मंदिर परिसर और इसके आसपास आज भी गुप्तकालीन एवं प्राचीन मूर्तियां मिलती हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की कहानी कहती हैं.
सावन में दिखता है अद्भुत नजारा
सावन के महीने में मदनेश्वर धाम का दृश्य बेहद भव्य हो जाता है. दूर-दूर से कांवरिये यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. महाशिवरात्रि पर भी यहां विशाल मेले का आयोजन होता है. मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है.
हालांकि मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति में कभी-कभी मंदिर परिसर में जलजमाव की समस्या भी देखने को मिलती है. ऐसे में श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.
मंदिर की सेवा में जुटा है भारती परिवार
मदनेश्वर धाम के मुख्य कर्ताधर्ता महंत स्वर्गीय शिव शंकर भारती के पुत्र विवेक भारती और आशुतोष भारद्वाज हैं. दोनों ही मंदिर के रख-रखाव, पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों की देखरेख करते हैं. स्थानीय लोगों के बीच इनकी भूमिका को काफी सम्मान की नजर से देखा जाता है.
मदनेश्वर धाम आज भी अररिया की पहचान और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां इतिहास और श्रद्धा एक साथ जीवंत दिखाई देते हैं.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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