कृषि यंत्रों की बिक्री में एक करोड़ से अधिक घोटाले की आशंका

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यंत्रों की खरीदारी के बगैर हुआ एक करोड़ से अधिक का भुगतान स्थल जांच में निर्धारित जगह से गायब मिले वर्मी कंपोस्ट के कई यूनिट अररिया : जिले में अनुदानित मूल्य पर कृषि यंत्रों की खरीद और वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने के नाम पर भारी धांधली का मामला सामने आ रहा है. कृषि विभाग से […]

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यंत्रों की खरीदारी के बगैर हुआ एक करोड़ से अधिक का भुगतान

स्थल जांच में निर्धारित जगह से गायब मिले वर्मी कंपोस्ट के कई यूनिट
अररिया : जिले में अनुदानित मूल्य पर कृषि यंत्रों की खरीद और वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने के नाम पर भारी धांधली का मामला सामने आ रहा है. कृषि विभाग से संबद्ध जिले के कई यंत्र विक्रेता और किसानों की मिली भगत से बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिये जाने की बात सामने आ रही है. विभागीय स्तर पर की गयी जांच के प्राथमिक नतीजों के मुताबिक किसानों ने यंत्रों की खरीददारी किये बगैर, अनुदान राशि के लिए विभाग के पास अपना दावा पेश किया.
कुछ एक मामलों में ऐसे किसानों को अनुदान राशि का भुगतान भी कर दिया गया. इतना ही नहीं जांच के क्रम में कई वर्मी कंपोस्ट यूनिट भी निर्धारित जगह पर नहीं पाये गये. यंत्र बिक्री के नाम पर अनुदान राशि के गबन का अंजाम देने में स्वीकृति ट्रेडर्स सहित अन्य यंत्र विक्रेताओं के नाम सामने आ रहे हैं.
गौरतलब है कि बीते वित्तीय वर्ष में अररिया नप के अलावा अररिया प्रखंड के चातर व गैड़ा पंचायत में यंत्रों का उठाव जिले में सबसे अधिक हुआ है. गबन के सबसे ज्यादा मामले भी इन्हीं तीन जगहों से सामने आ रहे हैं. यंत्र विक्रेता द्वारा इतने बड़े स्तर पर अनुदान राशि के दुरूपयोग को अंजाम दिये जाने में विभागीय अधिकारी व कर्मी की संलिप्तता भी सामने आ रही है.
1.18 करोड़ के अनुदान का भुगतान : मालूम हो कि बीते वित्तीय वर्ष में जिला कृषि विभाग को अनुदानित दर पर किसानों को कृषि यंत्र मुहैया कराने के लिए राज्य से चार करोड़ 49 लाख 25 हजार का लक्ष्य प्राप्त हुआ था. इसमें विभाग द्वारा ट्रेजरी से कुल तीन करोड़ 79 लाख 80 हजार 550 रुपये की निकासी की गयी.
वित्तीय वर्ष खत्म होता देख समुचित रूप से कागजात की जांच किये बगैर ही विभाग द्वारा एक करोड़ 18 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया. विभाग द्वारा भुगतान की गयी राशि को लेकर शिकायतें सामने आने पर भुगतान की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दिया गया है. इस फर्जी वाड़ा का अंजाम देने में स्वीकृति ट्रेडर्स का नाम प्राथमिकता के तौर पर सामने आ रहा है. यंत्र खरीदारी के फर्जी दावे और यंत्र विक्रेताओं के फर्जी कैशमेमो पर हुए भुगतान को सरकारी राशि के गबन के बड़े मामले के रूप में देखा जा रहा है.
जांच में फर्जी पाया गया जमा कैशमेमो
जिले के किसानों को अनुदानित मूल्य पर कृषि यंत्र मुहैया कराने वाले यंत्र विक्रेताओं ने विभागीय स्तर से भुगतान के लिए फर्जी कैशमैमो का सहारा लिया. मामला उजागर होने पर हुई विभागीय जांच में पाया गया कि यंत्र विक्रेता किसानों को जो यंत्र बेचे जाने का दावा पेश कर रहे हैं. वास्तव में वह फर्जी है. विक्रेताओं ने किसानों को बेचे जाने वाले यंत्र की न तो कहीं से खरीदारी की गयी और
न ही किसानों को यंत्र बेचे गये. जिन किसानों द्वारा यंत्र की खरीदारी का दावा पेश करते हुए विभागीय स्तर पर अनुदानित राशि के भुगतान के लिए कृषि विभाग को आवेदन दिये. उनमें से यंत्र खरीदारी के अधिकांश किसानों का दावा भी फर्जी मिला. स्थल जांच के अनुदान के लिए दावा करने वाले पचास प्रतिशत से अधिक किसानों के पास खरीद के यंत्र नहीं पाये गये.
50 प्रतिशत से अधिक किसान के यंत्र खरीदारी के दावे गलत पाये गये हैं. स्वीकृति ट्रेडर्स सहित विभाग से संबंध अन्य यंत्र विक्रेता द्वारा भुगतान के लिये पेश किये गये दावे फर्जी मिले हैं. बिना यंत्र की खरीदारी व बिक्री के ही अनुदान के दावे विभाग को सौंपे गये. प्रथम दृष्टया स्वीकृति ट्रेडर्स के साथ चातर व गैड़ा पंचायत के कृषि समन्वयक की मामले में संलिप्तता जाहिर हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि कैशमैमो पर संदेह होने के बाद स्वीकृति ट्रेडर्स के प्रोपराइटर रानी मेहता से जब इसका विस्तृत विवरण मांगा गया तो उनके द्वारा अब तक कोई कागजात नहीं दिया गया है. जल्द ही मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराने की भी बात उन्होंने कही.
शिवदत्त सिन्हा, जिला कृषि पदाधिकारी.
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