अब जिले में भी मोर को देख सकेंगे लोग

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कुसियार गांव स्थित वन विभाग की जमीन पर बन रहा है जैव विविधता पार्क पार्क में लाया जायेगा विभिन्न प्रकार की पक्षियों को बन रहा है इको हर्ट, जहां बैठ कर एहसास कर सकेंगे पहाड़ियों पर बैठने का अररिया : जिलावासियों के लिए एक अच्छी खबर है. अब जिलावासियों को मोर सहित अन्य दुर्लभ पक्षियों […]

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कुसियार गांव स्थित वन विभाग की जमीन पर बन रहा है जैव विविधता पार्क पार्क में लाया जायेगा विभिन्न प्रकार की पक्षियों को

बन रहा है इको हर्ट, जहां बैठ कर एहसास कर सकेंगे पहाड़ियों पर बैठने का
अररिया : जिलावासियों के लिए एक अच्छी खबर है. अब जिलावासियों को मोर सहित अन्य दुर्लभ पक्षियों का दर्शन करने राजस्थान सहित अन्य जगहों पर नहीं जाना पड़ेगा. विलुप्त होते जा रहे प्रजाति के सफेद उल्लू का भी दीदार यहां हो पायेगा. हरे-भरे वृक्षों के टहनियों में बैठे पक्षियों के कलरव का लोग आनंद उठा पायेंगे. आंखों को सकून देने वाली हरियाली, रोज गार्डेन, बटर फ्लाय, मेडिकल प्लांट के बीच लगभग दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के बांस, पौराणिक वन का तनाव भरे माहौल में निश्चय ही चित को शांत करने वाला होगा. लेकिन जिलावासियों को इसके लिए 2022 तक का इंतजार करना पड़ सकता है. अररिया शहर से 12 किलोमीटर दूर एनएच 57 के किनारे जैव विविधता पार्क का निर्माण कराया जा रहा है. इसके लिए 35 एकड़ भूखंड पर इसका निर्माण कार्य चल रहा है. कृपर्स (लत्तीनुमा पौधों) से चिल्ड्रेन पार्क बनाया जायेगा.
कहते हैं वन क्षेत्र पदाधिकारी : इस बाबत वनों के क्षेत्र पदाधिकारी बीके सिन्हा कहते हैं कि जब यह पार्क तैयार हो जायेगा. तो सिर्फ जिला ही नहीं उत्तरी बिहार का अद्भुत स्पॉट में यह सुमार होगा. तिललियों के उड़ते-घुमड़ते झुंडों के बीच जब लोग अंठखेलिया करेंगे.
पौराणिक वनों में जाने पर एक अलग एहसास लोग करेंगे. तो रोज गार्डेन की खुशबू का लोग आनंदयी उठायेगे. कीपर्स (लत ) से लिपट कर पर्यटक प्राकृतिक आनंद की अनुभूति सीने में सहेजेंगे. खुबसूरत तरीके से बनाये जा रहे इस पार्क में इक्को हर्ट में बैठकर एहसास करेंगे कि मानो किसी पहाड़ पर बने घर में बैठ कर प्रकृति का आनंद उठा रहे हैं. पंख फैलाये मयूर नृत्य का लोग लुफ्त उठा पायेंगे. उन्होंने बताया कि इसे पूर्ण होने में लगभग पांच वर्ष और लग सकता है. उन्होंने बड़े ही आत्मीय अंदाज में कहा कि सेवा में कल रहे या न रहे. इसके निर्माण कार्य की देखरेख करने मात्र से मानो शरीर को नयी ऊर्जा मिल जा रही है.
बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
जब यह पार्क बन कर तैयार हो जायेगा. पर्यटकों, राहगीरों की आवाजाही शुरू होगी. शहर के लोग जब तफरीह के लिए पार्क की ओर मुखातिब होंगे. तो निश्चय ही रोजगार के अवसर पर पैदा होंगे. पार्क के आसपास होटल, ढावा, चाय-नाश्ते की दुकानों के भी खुलने की पुरजोर संभावना है. ऐसे में रोजगार के लिए भटकते लोगों को निश्चय ही रोजगार का अवसर मिलेगा. इसके अलावा कल तक क्राइम स्पॉट के लिए कुख्यात कुसियारगांव जंगल एक अति सुरक्षित स्पॉट बन जायेगा. जहां वन विभाग के कर्मी, पदाधिकारी 24 घंटा तैनात होंगे.
पर्यटकों के लिए होगा आकर्षण का केंद्र
सीमावर्ती जिला के लोग परिवार के साथ सैर-सपाटा करने या तो नेपाल के वादियों में अथवा दार्जिलिंग की ओर रूख करते रहे हैं. कड़वा सच यह भी है कि जिला मुख्यालय में एक भी पार्क नहीं है. जहां छुट्टियों के दिन लोग परिवार के सदस्यों के साथ समय बिता सकें. खुली हवा में सांस ले सकें. प्रकृति का आनंद उठाये. ऐसे में जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर दूर निर्माणाधीन पार्क लोगों को आकर्षित करेगा. एनएच 57 पर हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर आने वाले वाहनों की कतारे लगेगी. उस पर सवार लोग एयरकंडीसन इको हर्ट में समय गुजार कर न सिर्फ थकान मिटायेंगे बल्कि उन्हें नयी उर्जा मिलेगी. आंखों में चमक आयेगी कि चलो इस तरह का पार्क तो मैला आंचल में है. निर्माणाधीन पांच इक्को हर्ट लोगों को दूर से अपनी ओर खीच लायेगा. इस आकर्षक तरीके से उसे बनाया जा रहा है.
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