जर्जर तार ले रहे जान, छह माह में हुई नौ लोगों की मौत

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विभागीय गलती से मौत होने पर मुआवजा का है प्रावधान: सहायक विद्युत अभियंता वाइटल एक्सिडेंटल एक्ट के तहत न्यायालय में वाद दायर करें लोग: अधिवक्ता अररिया : जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पिछले छह माह के दौरान विद्युत स्पर्शाघात से लगभग नौ लोगों की जान जा चुकी है. किसी की मौत बिजली तार टूटने […]

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विभागीय गलती से मौत होने पर मुआवजा का है प्रावधान: सहायक विद्युत अभियंता

वाइटल एक्सिडेंटल एक्ट के तहत न्यायालय में वाद दायर करें लोग: अधिवक्ता
अररिया : जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पिछले छह माह के दौरान विद्युत स्पर्शाघात से लगभग नौ लोगों की जान जा चुकी है. किसी की मौत बिजली तार टूटने से तो किसी की मौत झूलते बिजली तार के संपर्क में आ जाने से हो गयी. किसी की मौत अपने घर में बिजली का काम करने के दौरान हो गयी. लगभग दो माह पूर्व रानीगंज थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में झूलते बिजली के तार के संपर्क में आ जाने से एक महिला और दो बच्चों की मौत हो गयी थी. इस घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था. बिजली के तार टूट कर गिर जाने से सिमराहा थाना क्षेत्र में दो किशोर की जान चली गयी.
नरपतगंज के खैरा गांव में अपने घर में वायरिंग ठीक कर रहे युवक ने विद्युत स्पर्शाघात से दम तोड़ दिया था. नगर थाना क्षेत्र के कुसियारगांव चौक के समीप अचानक घर में विद्युत प्रवाहित होने के चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गयी थी. मृत युवक का दो माह पूर्व ही शादी हुई थी. यह भी झकझोरने वाली घटना थी. ताजातरीन मामले में नगर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत चातर के पूर्व मुखिया अब्दुल वारिक उर्फ कालू व ट्रैक्टर चालक रफीक की मौत विद्युत स्पर्शाघात से हो गयी. घटना से इलाके में कोहराम मच गया. ये सारी घटनाएं बेहद दर्दनाक मौत का संकेत देता है.
कहते हैं बिजली एसडीओ
इन घटनाओं के संदर्भ में बिजली एसडीओ अररिया अक्षय कुमार सिन्हा ने कहा कि अगर विभागीय खामियों से किसी की मौत होती है तो उसमें मुआवजा का प्रावधान है. चार लाख तक मुआवजा मिलने का प्रावधान है. रानीगंज के लक्ष्मीपुर की घटना में बच्चे व महिला की मौत को ले मुआवजा के लिए पेपर अग्रसारित किया गया है. मुआवजा राशि की स्वीकृति होते ही पीड़ित के परिजनों को चेक दे दिया जायेगा. विभागीय गलती नहीं होने पर मुआवजा देय नहीं होगा. ताजा-तरीन मामले में जांच करवाया गया. तार नहीं टूटा था. बल्कि ट्रैक्टर-ट्रोली बिजली तार के संपर्क में आ गया था. जिसमें दो लोगों की जान चली गयी.
कहते हैं अधिवक्ता
इस बाबत वरीय अधिवक्ता एलपी नायक कहते हैं कि सामूहिक आपदा से प्रभावित परिवार को चार लाख रुपये सरकार देती है. लेकिन इस तरह की घटनाओं को ले वाइटल एक्सिडेंट एक्ट 1885 के तहत पीड़ित के परिजनों को न्यायालय में वाद दायर करने से ज्यादा लाभ मिलने की संभावना रहती है. लेकिन जानकारी के अभाव में पीड़ित ऐसा नहीं कर पाते हैं. जबकि साउथ इंडिया में पीड़ित इस तरह का क्लेम को ले न्यायालय में जरूर जाते हैं. अज्ञानता व जानकारी के अभाव के कारण पीड़ित संभावित लाभ से वंचित रह जाते हैं.
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