नहीं बन पाया हरियाली मार्केट

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मुसीबत. सब्जी दुकानदारों के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं चांदनी चौक से पूरब, ठाकुरबाड़ी रोड, जिया मार्केट के आस-पास सड़क किनारे सब्जी बेचने वालों की दुकानें रोज ब रोज लगती हैं. सच तो यह भी है कि आखिर सब्जी बेचने वाले जायें तो कहां जाये. कहां लगायें वह अपनी दुकान. सब्जी मार्केट की कोई मुकम्मल व्यवस्था […]

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मुसीबत. सब्जी दुकानदारों के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं
चांदनी चौक से पूरब, ठाकुरबाड़ी रोड, जिया मार्केट के आस-पास सड़क किनारे सब्जी बेचने वालों की दुकानें रोज ब रोज लगती हैं. सच तो यह भी है कि आखिर सब्जी बेचने वाले जायें तो कहां जाये. कहां लगायें वह अपनी दुकान. सब्जी मार्केट की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है जिससे सब्जी बेचने वाले और खरीदने वाले परेशान हैं.
अररिया : जिला मुख्यालय में सब्जी मंडी की मुकम्मल व्यवस्था न होने से सब्जी बेचने वालों व खरीदारों दोनों को परेशानी होती है. चांदनी चौक से पूरब, ठाकुरबाड़ी रोड, जिया मार्केट के आस-पास सड़क किनारे सब्जी बेचने वालों की दुकानें रोज ब रोज लगती हैं. सच तो यह भी है कि आखिर सब्जी बेचने वाले जायें तोकहां जाये. कहां लगायें वह अपनी दुकान.
सब्जी मार्केट की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है.
सब्जी मार्केट बनाने को ले वर्षों पूर्व हरियाली मार्केट बनाने का सपना लोगों को दिखाया गया था. आज तक पूरा नहीं हो पाया. भूखंड के मामले में पेच फंस गया है. सड़क किनारे सब्जी बेचने की दुकान लगने से स्थायी दुकानदारों को भी परेशानी होती है.
कहते हैं उपमुख्य पार्षद
नगर परिषद के उपमुख्य पार्षद गौतम कुमार साह ने बताया कि नप प्रशासन सब्जी विक्रेताओं के लिए हरियाली मार्केट निर्माण को ले प्रतिबद्ध है. हटिया रोड के पूर्वी छोर पर नदी किनारे जमीन चिह्नित है. हुडको ने इसका डीपीआर भी तैयार कर लिया है. लेकिन चिह्नित जमीन भारत सरकार की है. जमीन के हस्तांतरण का प्रयास किया जा रहा है. जिला प्रशासन इस बाबत सहयोग भी कर रहा है. जमीन वाला पेंच जिस दिन खत्म हो जायेगा.
हरियाली मार्केट बनना प्रारंभ हो जायेगा. तब सब्जी बेचने व खरदीने वालों की परेशानी स्वत: खत्म हो जायेगी. बहरहाल हरियाली मार्केट का सपना कब साकार होगा. ये तो अनिश्चय के भंवर में फंसा हुआ है. सड़क किनारे सब्जी बेचने व खरीद करने को लोग लाचार है. सड़ी-गली सब्जी सड़क पर फेंक जाने से भी लोगों की परेशानी बढ़ जाती है. दरअसल सब्जी मार्केट क मुक्कमल व्यवस्था सुंदर-स्वच्छ शहर के सपने को साकार करेगा. इस दिशा में प्रशासन को संवेदनशील होना होगा.
जहां मन किया, वहीं लगा ली दुकान
स्थायी दुकानदार विष्णु प्रसाद उर्फ लोहा सिंह के दुकान के आगे अदरख, लहसून की दुकान लगी है. पूछने पर लोहा सिंह ने बताया कि रमजान को लेकर दुकान लगा दी गयी है.
इससे परेशानी है. ग्राहकों को आने-जाने में परेशानी होती है. दुकान लगाने के एवज में पैसा लेने की बात से इनकार कर दिया. हालांकि अदरख विक्रेता ने भी इसे नकार दिया. मिठाई दुकान चलाने वाला विकास साह भी कहते हैं कि सब्जी मार्केट न होने से सब्जी बेचने आते ग्रामीण महिला व पुरुष जहां जगह मिल जाती है वहीं दुकान लगा लेते हैं. आखिर हमलोग क्या करें.
इस परेशानी को प्रशासन को देखना चाहिए.मेडिसिन दुकानदार नईम की दुकान के आगे सब्जी की दुकान लगी है. दुकान जाने के लिए महज कुछ फिट जगह है. इस बाबत नईम कहते हैं कि कहां भगा दें इन सब्जी वालों को. ये इसी समाज के हैं. प्रशासन सब्जी मार्केट बना दे. ये लोग चले जायेंगे. हां दवाई लेने आते ग्राहकों को परेशानी होती है.. हटिया रोड में स्टेशनरी दुकान चलाने वाला तौकीर उर्फ गुड्डू का कहना था कि सब्जी बेचने वाला रोज दुकान लगाता है. मना करने पर लड़ाई-झगड़ा पर उतारू हो जाता है कि हम सड़क किनारे दुकान लगाते हैं.
इन सब्जी दुकान के लगने से परेशानी होती है. लेकिन इसकी मुकम्मल व्यवस्था होनी चाहिए. जिससे शहर की रौनक भी बढ़ेगी. सब्जी का स्थायी दुकानदार गोपी कुमार गुप्ता कहते हैं कि यहां सब्जी मंडी नहीं है. बंगाल, कटिहार, पूर्णिया से सब्जी लायी जाती है. मंडी चालने के लिए जगह चाहिए. जिसकी कोई व्यवस्था नहीं है. सड़क किनारे सब्जी दुकान लगाने वाले लगभग अस्थायी है. गांव घर से आकर सब्जी बेचता है. इसे कहां भगा दिया जाये.
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