बिक्री पर लगी रोक, बढ़ा दिये दाम
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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प्रतिबंध . पान-गुटखा की बिक्री को ले जारी आदेश जिले में बेअसर राज्य में पान मशालों के विनिर्माण, बिक्री, परिवहन, प्रदर्शन व भंडारण को सरकार ने एक वर्ष के लिए प्रतिबंधि कया है. लेकिन पान मशाला की बिक्री को लेकर सरकारी आदेश जिले में बेअसर साबित हो रहा है. अररिया : पान मशाला की बिक्री […]
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प्रतिबंध . पान-गुटखा की बिक्री को ले जारी आदेश जिले में बेअसर
राज्य में पान मशालों के विनिर्माण, बिक्री, परिवहन, प्रदर्शन व भंडारण को सरकार ने एक वर्ष के लिए प्रतिबंधि कया है. लेकिन पान मशाला की बिक्री को लेकर सरकारी आदेश जिले में बेअसर साबित हो रहा है.
अररिया : पान मशाला की बिक्री को लेकर हाल में जारी नया सरकारी आदेश जिले में बेअसर साबित हो रहा है. राज्य में पान मशालों के विनिर्माण, बिक्री, परिवहन, प्रदर्शन और भंडारण को सरकार द्वारा एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित किये जाने के बाद भी जिले में इसकी बिक्री धड़ल्ले से जारी है.
शहरी क्षेत्र के पान मशालों के बड़े कारोबारी हो या गांव देहात के गुमटी नुमा छोटे पान की दुकान अपने ग्राहकों को अब भी आसानी से ऐसे उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं. पान मशाले, गुटका और इससे मिलते जुतले उत्पाद बेचने व खरीदने वाले आसानी से नये सरकारी आदेश को धता बताने में कामयाब हो रहे हैं. इन प्रतिबंधित उत्पादों को लेकर जारी सरकारी आदेश को सख्ती से लागू कराने के प्रशासनिक पहल के अभाव में पान मशालों की बिक्री जिले में अब भी लाभकारी व्यवसाय बना हुआ है.
दुकानों में धड़ल्ले से बिक रहे हैं पान मशाले
सरकार ने शराब के बाद बीते 21 मई से राज्य में पान मशाला व गुटका को भी प्रतिबंधित कर दिया है. जारी सरकारी आदेश में गुटका व पान मशाला बनाने, बेचने, एक जगह से दूसरी जगह लाने ले जाने, सहित इसके भंडारण व प्रदर्शन पर एक साल के लिये रोक लगा दी है. आदेश तोड़ने वालों के विरुद्ध खाद्य संरक्षा व मानक अधिनियम 2006 के तहत कठोर कार्रवाई करने की बात नये सरकारी आदेश में कही गयी है.
आदेश के बाद पान मशालों के दामों में हुई वृद्धि
पान मशाला व गुटका के बिक्री को लेकर जारी नये सरकारी आदेश के बाद इसकी उपलब्धता प्रभावित होने की जगह इसके दामों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गयी है. पान मशाले बनाने वाली डीएच कंपनी के उत्पाद के दाम आसमान पर जा पहुंचे हैं. कंपनी के प्रसिद्ध उत्पाद कलश जर्दा, रजनीगंधा पान मशाला सहित अन्य उत्पाद पर अंकित दामों की तुलना में ग्राहकों से 30 से 40 प्रतिशत अधिक कीमत वसूले जा रहे हैं. पूछे जाने पर दुकानदार ऊंचे कीमत पर इसके उपलब्ध होने की बात तो करते हैं लेकिन कीमत अदा करने के बाद सहज उपलब्धता की बात को भी वे स्वीकार करते हैं.
प्रतिबंध के बाद भंडारण पर है जोर
पान मशालों के बिक्री पर लगी रोक के बाद इसके विक्रेता अपना सारा ध्यान इसके भंडारण पर केंद्रित किये हैं. ज्यादा मुनाफा कमाने की चाहत में दुकानदार किसी भी कीमत पर बड़े स्तर पर इसके भंडारण के प्रयासों में लगे हैं. खास बात ये की इसके बिक्री व भंडारण को रोकने के लिये अब तक समुचित प्रशासनिक प्रयास के अभाव में व्यवसायियों का मनोबल दिन ब दिन परवान चढ़ने लगा है. ऐसे में अगर प्रतिबंध को लागू करने में प्रशासनिक सख्ती जल्द नहीं दिखी तो फिर अन्य सरकारी कायदे कानून की तरह इस निर्देश को भी जिले में सिरे से नाकाम होने से नहीं रोका जा सकेगा.
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