रुका हुआ है ड्रेनेज का निर्माण लापरवाही तकनीकी स्वीकृति की आस में रुका पड़ा है साढ़े सात करोड़

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नगर परिषद के पास करोड़ों रुपये का आवंटन पड़ा हुआ है. बावजूद कई महत्वपूर्ण योजनाओं का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है, जबकि बिहार जल पार्षद के द्वारा कुछ माह पूर्व बिछाये गये पाइप लाइन के बाद शहर के कई नालों को तोड़ा गया है. परिणाम स्वरूप अब बारिश के मौसम में नालों में […]

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नगर परिषद के पास करोड़ों रुपये का आवंटन पड़ा हुआ है. बावजूद कई महत्वपूर्ण योजनाओं का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है, जबकि बिहार जल पार्षद के द्वारा कुछ माह पूर्व बिछाये गये पाइप लाइन के बाद शहर के कई नालों को तोड़ा गया है. परिणाम स्वरूप अब बारिश के मौसम में नालों में भरा पानी ओवर फ्लो होकर सड़कों तक आयेगा, जिससे जल जमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न होगी. नप के पास ड्रेनेज निर्माण को लेकर राशि भेज दी गयी थी.

अररिया : नगर परिषद क्षेत्र के डेढ़ दर्जन महत्वपूर्ण योजना जिसमें आवंटन भी उपलब्ध है इसके बावजूद तकनीकी स्वीकृति के इंतजार में अब तक जमीन पर उतरने की बाट जोह रहा है. इन योजनाओं में ज्यादातार ऐसी योजनाएं हैं जिन पर बारिश के मौसम में काम नहीं हो सकता है. हालात ऐसे लग रहे हैं कि बारिश के मौसम के बीत जाने के बाद भी यह योजना सड़क पर नहीं उतर पायेगी परिणाम होगा शहरवासियों को बारिश के पानी के जमावड़े के बीच रहने के दंश को झेलना होगा.
इन महत्वूपर्ण योजना में शहर के पानी को शहर के बाहर निकालने की भी योजनाएं शामिल हैं. जानकारी अनुसार इन योजनाओं का प्राक्कलन तो तैयार है लेकिन तकनीकी स्वीकृति की आश में योजनाओं की फाईल कार्यपालक अभियंता के कार्यालय का चक्कर काट-काट कर परेशान हो चुकी है. यही नहीं जब इन योजनाओं को तकनीकी स्वीकृति कार्यपालक अभियंता दे देंगे, तो फिर इनकी स्वीकृति नगर विकास विभाग से होनी है.
इसके बाद निविदा का प्रकाशन होगा और इसके बाद स्वीकृत संवेदक को सीएस की स्वीकृति प्रदान की जायेगी. लेकिन इस बीच भला समय किसी का इंतजार करने बैठा रहेगा, शहर के लोगों को गंदे पानी के जाम के बीच जीने की मजबूरी को तो झेलना ही पड़ेगा.
राशि है उपलब्ध
नप क्षेत्र अंतर्गत आने वाले नालों को एक दूसरे से जोड़ कर फिर इन नालों के पानी को बड़े नाले से जोड़ कर शहर से बाहर निकालने की ड्रेनेज निर्माण की राशि तकरीबन साढ़े सात करोड़ रुपये नगर परिषद को मिले तीन माह से ज्यादा हो गया है. लेकिन इसके निर्माण को लेकर तैयार हुए इस्टीमेट को अब तक नगर परिषद के इओ सिर्फ यह कह कर टाल रहे हैं कि योजनाओं के प्राक्कलन को अब तक कार्यपालक अभियंता के कार्यालय से तकनीकी स्वीकृति नहीं मिल पायी है जिस कारण इन योजनाओं को अग्रतर कार्रवाई के लिए नहीं भेजा जा रहा है. शहर के बाजार से लेकर वार्डों की गलियों में बारिश के मौसम में जब नाला में भरा गंदा पानी ओभर फ्लो कर सड़कों पर आ जाता है. इसके बाद सड़क पर जमा पानी धीरे-धीरे बढ़ता जाता है, तो कचरों के जमावड़े के बीच लोगों को न चाहते हुए भी दूषित व दुर्गंध युक्त वातावरण में रहना पड़ता है, जबकि शहरवासियों को इन समस्याओं से दो चार नहीं होना पड़े इसके लिए नगर विकास विभाग के द्वारा नप को राशि बारिश आने से पहले ही मार्च 16 में भेज दी गयी. इसके बावजूद भी नगर परिषद के द्वारा कार्य शुरू नहीं कराना दु:खद है.
तकनीकी स्वीकृति के इंतजार में ये योजनाएं
तकनीकी स्वीकृति के इंतजार में 15 योजनाएं जिसमें दस से बारह करोड़ रुपये की राशि नगर विकास विभाग से आवंटित हो कर नगर परिषद के पास यूं ही बची हुई है. इन पर काम कब का शूरू हो जाना चाहिए था लेकिन तकनीकी स्वीकृति के नाम पर ये जमीन पर उतरने का लंबा इंतजार कर रही है. इनमें साढ़े सात करोड़ रुपये के प्राक्कलन से तैयार होने वाले ड्रेनेज निर्माण का कार्य भी शामिल है. इनमें चांदनी चौक से वर्मा सेल, चांदनी चौक से जैन धर्मशाला, चांदनी चौक से बाबाजी की कुटिया, चांदनी चौक से हरियाली मार्केट हो कर परमान नदी तट तक, अररिया आरएस रेलवे गुमटी से कोसी धार तक बनने वाली ड्रेनेज निर्माण की योजना शामिल है. इसके बाद टाउन हॉल से जिला समिति की सड़क जहां सालों भर जल जमाव की स्थिति बनी रहती है आदि 15 योजनाएं शामिल हैं. पैसा सरकार का खर्च होना है बावजूद कार्यपालक अभियंता हो या कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा देरी किया जाना समझ से परे है.
पाइप बिछाने में तोड़े गये थे कई नाले
नप के कार्यपालक अभियंता का शिथिल रवैया है जिम्मेदार-कार्यपाकल पदाधिकारी
शहरवासियों के लिए इस बार भी बारिश बनेगा जी का जंजाल
कहते हैं पदाधिकारी
यह सही बात है कि योजनाओं के लिए आवंटन प्राप्त हुआ है. इन योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए जिला शहरी अभिकरण के कार्यपालक अभियंता जो कि नगर परिषद का काम भी देखते हैं को भेजा गया है. अगर टीएस की प्रक्रिया समय पर समाप्त हो जाती तो इसे पूर्व में ही नगर विकास विभाग को भेज कर स्वीकृति ले निविदा की प्रक्रिया को संपन्न करा आवंटित राशि से योजनाओं का कार्य शुरू करा दिया जाता.
भवेश कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी
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