लिखना था महासुदर्शन वटी, लिख रहे हैं पारासिटामोल व सिफेक्जिम

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उदासीनता. अस्पतालों में आयुष चिकित्सकों की हुई बहाली, पर नहीं है दवा अररिया : आये थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास ‘ जैसी स्थिति जिले में पदस्थापित आयुष चिकित्सकों की है. आयुर्वेद कॉलेज में आयुर्वेद की पढ़ाई के बाद जो जड़ी-बूटी का ज्ञान प्राप्त हुआ, वह अब हाशिये पर है और सरकारी नौकरी पाकर ऐसे […]

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उदासीनता. अस्पतालों में आयुष चिकित्सकों की हुई बहाली, पर नहीं है दवा

अररिया : आये थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास ‘ जैसी स्थिति जिले में पदस्थापित आयुष चिकित्सकों की है. आयुर्वेद कॉलेज में आयुर्वेद की पढ़ाई के बाद जो जड़ी-बूटी का ज्ञान प्राप्त हुआ, वह अब हाशिये पर है और सरकारी नौकरी पाकर ऐसे आयुर्वेद चिकित्सक अब अंग्रेजी दवा का पाठ पढ़ने को विवश हैं. मजबूरी यह है कि नौकरी मिली थी आयुर्वेद की दवा लिखने के लिए, लेकिन यहां परिस्थितिवश अंग्रेजी दवा लिखनी पड़ रही है. दरअसल सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेद की दवा की आपूर्ति वर्षों से नहीं हो रही है,
ऐसे में आयुष चिकित्सक के सामने अपनी मजबूरी है. विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल में उन्हें पदस्थापित कर दिया गया है और उन्हें ओपीडी से लेकर रात्रि ड्यूटी तक बजानी पड़ रही है. ऐसे में न जानते हुए भी और न चाहते हुए भी उन्हें मरीजों को अंग्रेजी दवा लिखनी पड़ रही है. सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि आयुष चिकित्सक अंग्रेजी दवा लिख कर किस प्रकार की चिकित्सा कर रहे होंगे और उनकी प्रतिभा का कितना सदुपयोग राज्य सरकार कर पा रही है.
पदस्थापित हैं 26 आयुष चिकित्सक : जिले के सरकारी अस्पतालों में आयुष चिकित्सा व पदस्थापित आयुष डॉक्टरों से ली जाने वाली ड्यूटी को लेकर मामला बहुत अजीबोगरीब है. जिले में कुल मिला कर 26 आयुष डॉक्टर पदस्थापित तो हैं, पर आयुष दवाओं की आपूर्ति लगभग पांच साल से ठप है. जानकार बताते हैं
कि इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 में अंकित प्रावधानों के अनुसार आयुष डॉक्टर एलोपैथिक दवा नहीं लिख सकते. पर सच्चाई यह है कि पदस्थापित आयुष डॉक्टर धड़ल्ले से वही दवा लिख रहे हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि आयुष डॉक्टरों से एलोपैथिक डॉक्टरों का ही काम सरकार ले रही है.
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