मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में दोगुना से ज्यादा की हुई वृद्धि
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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जिले में तेजी से बढ़ रहा है मत्स्य उत्पादन का कारोबार राज्य में मत्स्य उत्पादन के मामले में जिले का 16 वां स्थान अररिया : जिले में मत्स्य उत्पादन का कारोबार लगातार तरक्की कर रहा है. बड़ी तेजी से हर साल नये किसान मत्स्य पालन को एक व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं. मछली […]
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जिले में तेजी से बढ़ रहा है मत्स्य उत्पादन का कारोबार
राज्य में मत्स्य उत्पादन के मामले में जिले का 16 वां स्थान
अररिया : जिले में मत्स्य उत्पादन का कारोबार लगातार तरक्की कर रहा है. बड़ी तेजी से हर साल नये किसान मत्स्य पालन को एक व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं. मछली पालन के लिए बेहतर परिस्थिति पोखर, छोटे नदी-नालों की अधिकता के कारण जिले में मछली के उत्पादन का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है. बीते सात सालों के दौरान जिले में मछली के पैदावार में दोगुने से भी ज्यादा की वृद्धि देखी जा रही है. इस कारण उत्पादन के मामले में यह अपने समीपवर्ती कई अन्य जिलों को पीछे छोड़ मछली उत्पादन के मामले में राज्य में 16 वें स्थान पर पहुंच गया है.
सात साल में बढ़ा उत्पादन वर्ष 2010 के बाद से जिले में मछली का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. इकोनोमिक सर्वे ऑफ बिहार के मुताबिक वर्ष 2010 में जिले में मछली का कुल उत्पादन 4.4 टन था. इसके बाद उत्पादन का ग्राफ लगातार बढ़ता गया. वर्ष 2012-13 में मछली का कुल उत्पादन सात टन तक जा पहुंचा. इसके बाद वर्ष 2013-14 में उत्पादन में थोड़ी गिरावट दर्ज की गयी. फिर 2014-15 में यह इस साल उत्पादन सात टन से बढ़ते उत्पादन को हल्का झटका लगा.
उत्पादन में आयी इस मामूली गिरावट के बाद जो स्थियां संभली तो उत्पादन का ग्राफ लगातार नयी बुलंदियों को छूता जा रहा है. वर्ष 2014-15 में जिले में मछली का उत्पादन 9.9 टन रहा. अगले वर्ष ही इसमें और सुधार देखने को मिला और उत्पादन का स्तर 10.9 टन पर जा पहुंचा. उत्पादन में इस तरह की तेजी को देख कर इस वर्ष जिले में 11 टन से ज्यादा मछली के उत्पादन की उम्मीद जाहिर की जा रही है.
उत्पादन के मामले में जिले का राज्य में 16 वां स्थान
मछली उत्पादन के मामले में कभी फिसड्डी माना जाने वाले यह जिला फिलहाल अपने समीपवर्ती कई अन्य जिलों को पीछे छोड़ काफी आगे बढ़ गया है. पूर्णिया को अगर छोड़ दें तो पड़ोसी जिला किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा व बांका मछली उत्पादन के मामले में जिले से काफी पीछे हैं. पूर्णिया में सालाना मछली का उत्पादन 12 टन के करीब हैं. इसके अलावा कटिहार, खगड़िया व बेगुसराय मछली उत्पादन के लिहाज से राज्य के उत्कृष्ट जिलों में शामिल है. कटिहार में सालाना मछली का उत्पादन 23.5 टन के करीब है. तो बेगुसराय में टन मछली का सालाना उत्पादन है. इसी तरह इकोनोमिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक खगड़िया में सालाना मछली का उत्पादन 18 टन के करीब है.
जिले में असीम संभावनाएं
कृषि विज्ञान केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक रविंद्र जलज के मुताबिक मत्स्य पालन को लेकर किसानों में आयी जागरूकता के कारण उत्पादन का ग्राफ जिले में तेजी से बढ़ रहा है. आसान और लाभकारी व्यवसाय होने के कारण अब किसान इसे एक स्थायी व्यवसाय के तौर पर अपनाने लगे हैं. कई किसान सीधे केवीके से जुड़ कर उत्पादन की नयी विधियों का लाभ उठा रहे हैं. जिस तेजी से किसान इस व्यवसाय को अपना रहे हैं.
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