'शिक्षक आते हैं, मगर पढ़ाते नहीं', अव्यवस्था को लेकर भड़की छात्राएं, पटना में सड़क जाम कर किया प्रदर्शन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Feb 2023 8:08 PM
छात्राओं ने बताया कि क्लास में शिक्षक आते हैं, मगर पढ़ाते नहीं है. स्कूल में कुल 14 ही शिक्षक हैं. जिनमें से दो-तीन ही शिक्षक क्लास में बेहतर ढंग से पढ़ाते हैं. इसके साथ ही छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में करीब 300 छात्राओं के रहने के लिए मात्र 11 रूम ही है.
पटना के कदमकुआं स्थित राजकीय कन्या आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने सड़क पर उतर कर स्कूल में पढ़ाई न होने व हॉस्टल में होने वाली असुविधा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. मंगलवार को नाला रोड गोलंबर के पास एकजुट होकर छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान करीब 150 छात्राओं ने डेढ़ घंटे तक सड़क पर स्कूल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्कूल में बेहतर शिक्षा व्यवस्था बहाल करने और हॉस्टल की स्थिति में सुधार करने की मांग की.
विरोध कर रही छात्राओं ने बताया कि क्लास में शिक्षक आते हैं, मगर पढ़ाते नहीं है. स्कूल में कुल 14 ही शिक्षक हैं. जिनमें से दो-तीन ही शिक्षक क्लास में बेहतर ढंग से पढ़ाते हैं. इसके साथ ही छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में करीब 300 छात्राओं के रहने के लिए मात्र 11 रूम ही है. एक रूम में 20 से अधिक छात्राएं रहने के लिए मजबूर हैं. एक बेड पर पांच-पांच छात्राओं को सोना पड़ता है. कई छात्राएं रूम में फर्श पर अपना बिस्तर बिछा कर सोती हैं. इसके अलावा हॉस्टल में तैयार की गयी सूची के अनुसार उन्हें खाना भी नहीं परोसा जाता है. सुबह के नाश्ते में अक्सर फरही और बिस्कुट ही दिया जाता है. इसके अलावा खाने में मिलने वाली सब्जी में अत्यधिक पानी ही रहता है.
छात्राओं द्वारा किये प्रदर्शन से करीब डेढ़ घंटे तक पर सड़कों पर यातायात बाधित रहा. जिसके बाद पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर छात्राओं को शांत कराते हुए उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया. आश्वासन मिलने के बाद छात्राओं ने प्रदर्शन को समाप्त किया. स्कूल के प्राचार्य विजय कुमार ने बताया कि कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने छात्राओं की परेशानियों को सुनते हुए जल्द ही सभी समस्याओं को दूर करने की बात कही है.
स्कूल में कक्षा छह से 12वीं में करीब 300 छात्राएं हैं. लेकिन आवासीय विद्यालय में मात्र तीन ही बाथरूम है जिसकी वजह से छात्राओं को नहाने व कपड़े धोने के लिए प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है. छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल की सीलिंग से भी प्लास्टर छूट कर गिरते रहता है जिसकी वजह से रात में सोने भी डर लगता है. इसके साथ ही बाथरूम की नियमित रूप से सफाई नहीं होने की वजह से बाथरूम जाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
पिछड़ा अतिपिछड़ा कल्याण विभाग की ओर से स्कूल का संचालन किया जा रहा है. स्कूल को पाटिपुत्र इलाके से साल 2012 में कदमकुआं इलाके में शिफ्ट किया गया था. स्कूल के प्रबंधक ने बताया कि कल्याण विभाग की ओर से भवन की मरम्मत के लिए आदेश दिया गया है. एक सप्ताह में मरमम्त का कार्य शुरू कर दिया जायेगा. जगह की कमी की वजह से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए विभाग की ओर से स्कूल को नये जगह शिफ्ट करने के लिए जगह चिन्हित करने का आश्वासन दिया गया है.
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स्कूल में शिक्षक की कमी तो है ही. जो शिक्षक क्लास में आते भी हैं वो ठीक ढंग से नहीं पढ़ाते हैं. हॉस्टल में रूम की कमी, गंदे बाथरूम और सूची के अनुसार खाना नहीं मिलने से हर दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है- धनवंतरी, कक्षा 9
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हॉस्टल के एक रूम में 20 से भी अधिक छात्राएं रहती हैं. एक बेड पर पांच-पांच छात्राएं सोने के मजूबर हैं. इसके साथ ही गंदे बाथरूम की वजह से भी नहाने और कपड़े धोने के लिए सोचना पड़ता है- सुमन, कक्षा 8
राजकीय कन्या आवासीय विद्यालय के प्राचार्य विजय कुमार नें बताया कि स्कूल के सभी शिक्षकों को क्लास में मोबाइल का इस्तेमाल करने पर रोक लगाया गया है. शीघ्र ही जर्जर भवन की मरम्मत विभाग की ओर से की जायेगी. इसके साथ ही छात्राओं को सूची के अनुसार खाना परोसने के लिए भी एनजीओ को बाध्य किया गया है.
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