बंदी की मौत पर जेल में हंगामा

Published at :15 Feb 2014 2:24 AM (IST)
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बंदी की मौत पर जेल में हंगामा

मधुबनी:मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदी की मौत पर कैदियों ने शुक्रवार की शाम हंगामा किया. इस दौरान तोड़ फोड़ व रोड़ेबाजी की गयी. घटना में तीन पुलिसकर्मी की जख्मी होने की सूचना है. कैदी लगभग तीन घंटे तक अपनी बैरकों से बाहर हंगामा करते रहे. इस दौरान जेल की सुरक्षा में लगे पुलिस वाले […]

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मधुबनी:मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदी की मौत पर कैदियों ने शुक्रवार की शाम हंगामा किया. इस दौरान तोड़ फोड़ व रोड़ेबाजी की गयी. घटना में तीन पुलिसकर्मी की जख्मी होने की सूचना है. कैदी लगभग तीन घंटे तक अपनी बैरकों से बाहर हंगामा करते रहे. इस दौरान जेल की सुरक्षा में लगे पुलिस वाले खुद को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न जगहों में छुपे रहे. कैदियों का उत्पाद जारी था.

कैदी साथी की मौत के लिए जेल अधीक्षक को जिम्मेवार ठहरा रहे थे. उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे. हंगामे की सूचना पर डीएम लोकेश कुमार सिंह, एएसपी एसएस पांडेय समेत राजनगर व पंडौल थाना पुलिस मौके पर पहुंची. देर शाम तक डीएम व अन्य पदाधिकारियों के प्रयास पर कैदियों का हंगामा शांत हुआ. मृतक बंदी पंडौल थाना क्षेत्र के बटुरी गांव निवासी पप्पू यादव (36 ) बताया जाता है. वह पत्नी की दहेज हत्या मामले में पिछले वर्ष से जेल में बंद था. पंडौल थाना में दर्ज इस मामले को लेकर उसने स्वयं पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था. इस मामले में पप्पू यादव का का बहनोई पवन यादव भी जेल में बंद है.

दोनों के खिलाफ न्यायालय में मामला चल रहा है. इसके बाद कैदियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. शुरुआत में जेल प्रशासन व जेल पुलिस मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन कैदी पप्पू की मौत के लिए जेल अधीक्षक को जिम्मेवार ठहराते हुए तोड़ फोड़ व रोड़ेबाजी शुरू कर दी. पहले पुलिस ने बल प्रयोग कैदियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उनके गुस्से के सामने पुलिस को पीछे हटना पड़ा. जेल पुलिस खुद को तब तक सुरक्षित क्षेत्र में रखा, जब तक की बाहर से अन्य पुलिस बल आयी. इसके बावजूद घंटों तक सुरक्षा बल कैदियों में बैरक की ओर जाने की हिम्मत जुटा पाये थे. कैदियों का आरोप था, दो दिन पहले जेल अधिकारी ने मृतक बंदी की पिटाई की थी. इसमें वह बूरी तरह जख्मी हो गया था. पिटाई के बाद उसका इलाज कराने के बजाय बंदी को जख्मी हालत में ही बैरक में छोड़ दिया गया. इसके कारण बंदी पप्पू यादव की मौत हो गयी. हालांकि जेल प्रशासन कैदियों के आरोप से इंकार करती है.

हंगामे के दौरान जेल पहुंचे जिलाधिकारी लोकेश कुमार सिंह को बंदियों से बातचीत करने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी. हंगाम कर रहे कैदी, डीएम के बात सुनने के बजाय अविलंब जेल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे. कैदियों के आक्रमण रूख को देखते हुए जेल प्रशासन ने डीएम को भी कैदियों के समीप नहीं जाने दिया. सुरक्षित क्षेत्र से ही लाउड स्पीकर के जरिये डीएम ने कैदियों से बातचीत की. हालांकि इस दौरान भी कैदी हंगामा करते रहे. बातचीत में कैदियों ने जेल अधीक्षक पर अनावश्यक मारपीट करने समेत कई अन्य संगीन इल्जाम लगाये. इस पर डीएम श्री सिंह ने कहा कि कैदियों के तमाम आरोपों को वे स्वयं देखेगे. इसकी जांच करेगें. इसमें दोषी पाये जाने वाले जेल के किसी भी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को बख्शा नहीं जायेगा. बंदी पप्पू यादव की मौत को लेकर प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी और कार्रवाई की जायेगी.

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