जब लाइव मैच में आपा खो बैठा यह दिग्गज खिलाड़ी, रेफरी के मुंह पर थूका और फिर जो हुआ...

Edited by Ritu Raj
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समीर शेकर

Samir Shaker Spitting Incident: फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच इस समय पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है. मैदान पर जहां एक तरफ कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. वहीं दूसरी तरफ अनुशासन तोड़ने वाले खिलाड़ियों पर रेड कार्ड और सख्त कार्रवाई की गाज भी गिर रही है. वैसे, फुटबॉल इतिहास में मैदान पर बदसलूकी के कई मामले सामने आए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास की सबसे कठोर और बड़ी सजाओं में से एक क्या थी.

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Samir Shaker Spitting Incident: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इस समय दुनिया भर की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. खेल के साथ-साथ मैदान पर अनुशासन तोड़ने वाले खिलाड़ियों को रेड कार्ड और कड़ी सजा भी मिल रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास की सबसे बड़ी और सख्त सजाओं में से एक क्या थी. यह कहानी है इराक के पूर्व डिफेंडर समीर शेकर (Samir Shaker) की, जिन्हें मैदान पर की गई एक शर्मनाक हरकत के लिए पूरे एक साल के लिए प्रतिबंधित (बैन) कर दिया गया था.

क्या था पूरा विवाद

यह ऐतिहासिक घटना साल 1986 के फीफा वर्ल्ड कप की है, जिसका आयोजन मेक्सिको में किया गया था. इराक और बेल्जियम के बीच खेले जा रहे एक हाई-वोल्टेज मुकाबले के दौरान इराकी खिलाड़ी समीर शेकर अपना आपा खो बैठे. मैच में फैसले से नाराज होकर शेकर ने कोलंबियाई रेफरी जीसस डियाज (Jesus Diaz) पर थूक दिया.

खेल भावना को ठेस पहुंचाने का आरोप

मैदान पर रेफरी के साथ की गई बदसलूकी समीर शेकर को बेहद भारी पड़ी है. फीफा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच बैठाई और खिलाड़ी को दोषी पाया. खेल भावना को तार-तार करने के आरोप में समीर पर एक साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है. वर्ल्ड कप के इतिहास में किसी खिलाड़ी के खिलाफ की गई यह अब तक की सबसे बड़ी और सबसे सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में से एक है.

एक विवाद ने तबाह किया इंटरनेशनल करियर

समीर शेकर के लिए फीफा की यह सजा महज एक प्रतिबंध नहीं, बल्कि उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का ‘द एंड’ साबित हुई. इस बड़े विवाद और एक साल के लंबे बैन के बाद वह दोबारा कभी इराक की नेशनल टीम में वापसी नहीं कर सके. मैदान पर की गई उस एक गलती की वजह से उनका पूरा अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल करियर बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ पर आकर हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गया.

समीर शेकर ने कोचिंग से बदली अपनी किस्मत

समीर शेकर की कहानी सिर्फ एक प्रतिबंध पर खत्म नहीं होती. खिलाड़ी के रूप में मैदान छोड़ने के बाद उन्होंने हार न मानने का जज्बा दिखाया और कोचिंग में अपना लोहा मनवाया. यह फुटबॉल का एक दिलचस्प मोड़ था कि जिस खिलाड़ी को फीफा ने प्रतिबंधित किया था, वही बाद में बांग्लादेश की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का हेड कोच बना. शेकर के मार्गदर्शन और रणनीतिक कौशल के कारण बांग्लादेशी टीम ने दमदार खेल दिखाया और SAFF चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाकर सबको चौंका दिया.

फीफा इतिहास की सबसे बड़ी चेतावनी

समीर शेकर ने भले ही कोच के रूप में खोया हुआ सम्मान वापस पाने की कोशिश की, लेकिन 1986 का वह विवादित पल फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास से कभी नहीं मिट सका. उसे आज भी मैदान पर अनुशासनहीनता के सबसे बड़े उदाहरणों में गिना जाता है, जो आधुनिक फुटबॉल के युवा खिलाड़ियों को हमेशा मर्यादा में रहने की सीख देता है.

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प्रभात खबर डिजिटल में स्पोर्ट्स कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत। खेल पत्रकारिता में एक साल का अनुभव और स्पोर्ट्स की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में मास्टर्स। उद्देश्य है पाठकों तक तेज, सटीक और विश्वसनीय स्पोर्ट्स कवरेज पहुँचाना।

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