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शाहिद के जाने से गरीब हो गयी भारतीय हॉकी

Updated at : 20 Jul 2016 5:16 PM (IST)
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शाहिद के जाने से गरीब हो गयी भारतीय हॉकी

नयी दिल्ली : दुनिया भर में अपनी ‘ड्रिबलिंग’ का लोहा मनवाने वाले दिग्गज खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की आज निधन हो गये. पूरा देश उन्‍हें श्रृद्धांजलि दे रहा है. पूर्व हॉकी धुरंधरों ने कहा, शाहिद मैदान के भीतर जितने महान थे, मैदान के बाहर एक इंसान के तौर पर भी उनकी मिसाल नहीं मिल सकती. प्रधानमंत्री […]

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नयी दिल्ली : दुनिया भर में अपनी ‘ड्रिबलिंग’ का लोहा मनवाने वाले दिग्गज खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की आज निधन हो गये. पूरा देश उन्‍हें श्रृद्धांजलि दे रहा है. पूर्व हॉकी धुरंधरों ने कहा, शाहिद मैदान के भीतर जितने महान थे, मैदान के बाहर एक इंसान के तौर पर भी उनकी मिसाल नहीं मिल सकती.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें जुनून से भरा खिलाड़ी बताया. मोदी ने ट्विटर पर लिखा ,‘‘ मोहम्मद शाहिद के असामयिक निधन से भारत ने ऐसा प्रतिभाशाली खिलाड़ी खो दिया जो पूरे जुनून और ऊर्जा के साथ खेलता था.’

उन्होंने लिखा ,‘‘ हमने मोहम्मद शाहिद को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन हमारी मदद या दुआओं के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. श्रद्धांजलि.’
खेलमंत्री विजय गोयल ने आज शाहिद के परिजनों से मिलकर उनके निधन पर शोक जताया. गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शोकसंतप्त परिवार को सांत्वना दी. उन्होंने कहा कि शाहिद के निधन से भारत ने एक महान खिलाड़ी खो दिया है. उन्होंने कहा कि शाहिद का जीवन और कैरियर युवाओं को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और ओलंपिक जैसे टूर्नामेंटों में देश का नाम रोशन करने के लिये प्रेरित करेगा.

हॉकी इंडिया ने ट्वीट कर कहा, इस खिलाड़ी के असामय‍िक मौत से भारतीय हॉकी ने एक महान खिलाड़ी खो दिया.

अमर मजूमदार ने ट्वीट कर कहा, उनकी आत्‍मा को शांति मिले. वे महान थे उनके जाने से हॉकी संसार गरीब हो गया.
तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बलबीर सिंह सीनियर ने उन्हें भारत के महानतम खिलाडियों में से एक बताया जबकि मास्को ओलंपिक (1980) में उनके साथ खेल चुके और उनके करीबी मित्रों में शामिल एम के कौशिक ने कहा कि अंतिम समय तक उन्होंने जिंदादिली नहीं छोड़ी. वहीं विश्व कप 1975 में भारत की खिताबी जीत के नायक और मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ने उन्हें अपने दौर में दुनिया के तीन सर्वश्रेष्ठ ड्रिबलरों में शुमार किया.
बलबीर सिंह सीनियर ने कहा ,‘‘ मोहम्मद शाहिद के असामयिक निधन से मैं काफी दुखी हूं. वह महान खिलाड़ी और उतना ही उम्दा इंसान था. भारत के लिये खेल चुके महानतम खिलाडियों में उसका नाम भी गिना जायेगा. मैदान पर उसकी ड्रिबलिंग देखने लायक होती थी.’ उन्होंने हालांकि खेद जताया कि महान खिलाडियों को उनके जाने के बाद ही याद किया जाता है. उन्होंने कहा ,‘‘ उनका निधन भारतीय हाकी के लिये अपूरणीय क्षति है लेकिन मुझे दुख इस बात का है कि महान खिलाडियों को उनके जाने के बाद ही याद किया जाता है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को इस दुख से निपटने का सामर्थ्य दे.’
म्युनिख ओलंपिक 1972 की कांस्य पदक विजेता हाकी टीम के सदस्य डाक्टर वेस पेस ने कहा ,‘‘ वह सर्वश्रेष्ठ हाकी खिलाडियों में से एक थे. जब वह भारतीय टीम के लिये चुने गए तब मैं चयनकर्ता था. वह काफी विनम्र और हमेशा मुस्कुराने वाले खिलाड़ी थे. इतनी कम उम्र में उनका निधन दुखद है.’ महान हॉकी खिलाड़ी गुरबख्श सिंह ने कहा ,‘‘ भारतीय हॉकी के लिये यह दुखद दिन है. इतनी कम उम्र में उनका निधन हो गया. दुर्भाग्य की बात है कि वह लीवर की बीमारी से पार नहीं पा सके.’
वहीं कौशिक ने मास्को ओलंपिक की यादों को ताजा करते हुए कहा ,‘‘ वह 1980 में काफी युवा था और हम उससे सीनियर थे. वह सभी का सम्मान करता और खूब हंसी मजाक करता लेकिन इसका पूरा ध्यान रखता कि कोई आहत ना हो.’ उन्होंने कहा ,‘‘ उसके ड्रिबलिंग कौशल ने भारत को स्वर्ण पदक जिताने में मदद की और पूरी दुनिया ने उसके फन का लोहा माना. पेनल्टी कार्नर बनाने से लेकर गोल करने तक में उसका कोई सानी नहीं था.’
कौशिक ने कहा ,‘‘ वह गरीब परिवार से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचे थे. संयुक्त परिवार में रहने के कारण उनमें टीम भावना गजब की थी. उनकी जिंदादिली अंत तक उनके साथ रही और कभी उनको देखकर लगता ही नहीं था कि वह इतने बीमार हैं. हम अस्पताल में उनसे मिलने गए तो उन्होंने कहा था कि जल्दी ही ठीक हो जाउंगा लेकिन होनी को यह मंजूर नहीं था.’ अशोक कुमार ने कहा कि लखनऊ होस्टल के दिनों में ही शाहिद को देखकर उन्हें अनुमान हो गया था कि यह भारत के महानतम खिलाडियों में से एक होगा.
उन्होंने कहा ,‘‘ उस दौर में यानी ध्यानचंद के बाद के दौर में इनामुर रहमान और पाकिस्तान के शहनाज शेख के अलावा किसी को ड्रिबल के लिये जाना गया तो वह शाहिद थे. दुनिया के महानतम ड्रिबलरों में से एक और 1980 ओलंपिक में तो उनका खेल शबाब पर था.’
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं शाहिद को लखनउ होस्टल के दिनों से जानता था जब हम इंडियन एयरलाइंस के सालाना शिविर के लिये केडी सिंह बाबू स्टेडियम जाते थे. मैं युवा लड़कों के साथ अभ्यास करना पसंद करता था जिनमें से शाहिद एक था. उसका खेल इतनी कम उम्र में भी सीनियर खिलाडियों की तरह था और मैं तभी समझ गया था कि एक दिन यह भारत के महानतम खिलाडियों में से एक होगा.’
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