फीफा वर्ल्ड कप : फिर चलेगा टिकी-टाका का जादू!

Updated at : 04 Jun 2014 8:03 AM (IST)
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फीफा वर्ल्ड कप : फिर चलेगा टिकी-टाका का जादू!

मौजूदा चैंपियन स्पेन एक बार फिर फीफा वर्ल्ड कप जीतने की प्रबल दावेदार है. पिछले छह साल में तीन बड़े खिताब (दो यूरो कप और एक वर्ल्ड कप) स्पेन की इस दावेदारी की तस्दीक भी करते हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय में स्पेनिश टीम की शैली आलोचनाओं का शिकार हो रही है. स्पेनिश टीम मिडफील्डरों […]

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मौजूदा चैंपियन स्पेन एक बार फिर फीफा वर्ल्ड कप जीतने की प्रबल दावेदार है. पिछले छह साल में तीन बड़े खिताब (दो यूरो कप और एक वर्ल्ड कप) स्पेन की इस दावेदारी की तस्दीक भी करते हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय में स्पेनिश टीम की शैली आलोचनाओं का शिकार हो रही है. स्पेनिश टीम मिडफील्डरों के दबदवे वाली टिकी-टाका शैली में खेलती है और विपक्षी टीमों का दावा है कि उसने इसकी काट ढूंढ निकाली है.

* क्या है टिकी-टाका

टिकी-टाका शैली 70 और 80 के दशक की हॉलैंड टीम के टोटल फुटबॉल से प्रभावित है. इस शैली में न तो फॉरवर्ड का महत्व है और न ही डिफेंडरों का. सारा जिम्मा मिडफील्डरों पर होता है. इस शैली में छोटे-छोटे पास के जरिए गेंद को अधिकांश समय तक अपने कब्जे में रखने पर जोर होता है. टिकी-टाका की व्यूह रचना में विपक्षी टीम उलझ जाती है और मौका ताड़कर स्पेनिश टीम गोल करने में कामयाब हो जाती है.

* क्या है काट

विशेषज्ञों के मुताबित मजबूत डिफेंस या तेज तर्रार काउंटर अटैक के जरिए टिकी-टाका को विफल किया जा सकता है. क्लब स्तर पर टिकी-टाका शैली से खेलने वाली बार्सिलोना टीम को चेल्सी ने अपने मजबूत डिफेंस के जरिए कभी कामयाब नहीं होने दिया. चेल्सी का अनुकरण करते हुए हाल-फिलहाल अन्य टीमों ने भी बार्सिलोना के खिलाफ सफलता पायी. इसी तरह तेज-तर्रार आक्रमण के जरिए पिछले कनफेडरेशन कप के फाइनल में ब्राजील ने स्पेन को करारी शिकस्त दी थी. तब नेमार, फ्रेड और हल्क की तिकड़ी का स्पेन के पास कोई माकूल जवाब नहीं था.

– टिकी-टाका का सफर

* टिकी-टाका शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल स्पेनिश कमेंटेटर आंद्रेस मोंटेस ने 2006 वर्ल्ड कप में स्पेन-ट्यूनिशया मैच के दौरान किया.

* स्पेन में टिकी-टाका शैली की शुरुआत बार्सिलोना के पूर्व मैनेजर जॉन क्रूयुफ (हॉलैंड के पूर्व खिलाड़ी) ने 1988 में की थी. यह शैली हॉलैंड टीम की टोटल फुलबॉल से प्रभावित है.

* स्पेन की राष्ट्रीय टीम ने इस शैली को 2006 में ही अपनाया था लेकिन उसे इसके साथ सफलता मिलने की शुरुआत 2008 यूरो कप से हुई. इस शैली ने स्पेन को आधुनिक समय में दुनिया की सबसे मजबूत फुटबॉल टीम में तब्दील कर दिया.

* 2010 वर्ल्ड कप और 2012 यूरो कप में भी स्पेन की टीम इसी शैली से खेली और चैंपियन बनने में सफल रही. इस दौरान कोई भी टीम उसे चुनौती नहीं दे सकी.

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