समंदर किनारे क्यों खास है गॉल स्टेडियम? भारत-श्रीलंका टेस्ट के बीच जानिए किले और मशहूर क्लॉक टावर का राज
गॉल क्रिकेट स्टेडियम में बैटिंग करने उतरी भारतीय प्लेयर (फोटो—एक्स)
गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि इतिहास और क्रिकेट का अनूठा संगम है. हिंद महासागर की लहरों और सदियों पुराने गॉल फोर्ट के बीच स्थित यह स्टेडियम दुनिया के खूबसूरत क्रिकेट स्थलों में से एक है.
Galle International Cricket Stadium History : क्रिकेट के मैदान तो दुनिया में कई हैं, लेकिन कुछ स्टेडियम सिर्फ मैच की मेजबानी नहीं करते, बल्कि अपने आसपास की कहानी भी सुनाते हैं. गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम ऐसा ही एक मैदान है, जहां क्रिकेट और इतिहास का अनोखा मेल देखने को मिलता है. एक तरफ हिंद महासागर की नीली लहरें हैं, तो दूसरी तरफ सदियों पुराना गॉल फोर्ट और उसी किले के बीच मशहूर क्लॉक टावर नजर आता है. इसी खूबसूरत मैदान पर भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला खेला जा रहा है.
गॉल में खेला जा रहा 50वां टेस्ट मैच
भारत के लिए यह मैच इसलिए भी खास है क्योंकि टीम श्रीलंका में अपना 600वां टेस्ट मुकाबला खेल रही है. वहीं, गॉल स्टेडियम भी इस मुकाबले के साथ एक खास पड़ाव पर पहुंच गया है. भारत-श्रीलंका का यह टेस्ट इस मैदान पर खेला जाने वाला 50वां टेस्ट मैच है. इसके साथ गॉल एशिया का पहला ऐसा क्रिकेट स्टेडियम बन गया है, जहां 50 टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं.
एक तरफ समंदर, दूसरी ओर ऐतिहासिक किला
View on Instagram
गॉल स्टेडियम की सबसे खास तस्वीर यही है कि मैदान के एक ओर हिंद महासागर दिखाई देता है और दूसरी ओर गॉल फोर्ट की ऐतिहासिक दीवारें. मैच के दौरान जब कैमरा मैदान से हटकर किले की प्राचीर और समुद्र की ओर जाता है, तो क्रिकेट का नजारा किसी पोस्टकार्ड जैसा नजर आता है. यह स्टेडियम गॉल शहर में ऐतिहासिक गॉल फोर्ट के पास स्थित है. समुद्र की हवाएं, किले की दीवारें और मैदान पर क्रिकेट-इन तीनों का मेल गॉल को दुनिया के खूबसूरत क्रिकेट स्थलों में शामिल करता है. गॉल फोर्ट सिर्फ एक पुराना किला नहीं है. इसकी चारदीवारी के भीतर आज भी एक पूरा शहर बसता है. यहां चर्च, कैफे, रेस्टोरेंट, ऑफिस और कई दूसरी इमारतें मौजूद हैं. वहीं मैच के दौरान किले की दीवारों पर खड़े होकर भी लोग क्रिकेट का आनंद लेते दिखाई देते हैं.
गॉल क्लॉक टावर की क्या है कहानी?
गॉल फोर्ट के सबसे पहचानने योग्य स्थलों में से एक है गॉल क्लॉक टावर, जिसे एन्थोनिज मेमोरियल क्लॉक टावर भी कहा जाता है. यह टावर 1883 में बनाया गया था और गॉल फोर्ट के मून बैस्टियन के पास स्थित है. इसका निर्माण स्थानीय लोगों के सार्वजनिक योगदान से हुआ था. यह टावर डॉक्टर पी. डी. एन्थोनिज की याद में बनाया गया था. इसकी डिजाइन जॉन हेनरी गेस लैंडन ने तैयार की थी. क्लॉक टावर की घड़ी डॉक्टर एन्थोनिज के एक आभारी मरीज मुदलियार सैमसन डी एब्रू राजापक्षे ने भेंट की थी. आज यह टावर गॉल फोर्ट की पहचान का अहम हिस्सा है और स्टेडियम से जुड़े क्रिकेट दृश्यों में भी कई बार नजर आता है.
1876 से जुड़ी है मैदान की कहानी
गॉल स्टेडियम का इतिहास काफी पुराना है. 1876 के आसपास यहां रेसकोर्स हुआ करता था. धीरे-धीरे इस जगह पर क्रिकेट गतिविधियां बढ़ीं और मैदान ने खेल का रूप लेना शुरू किया. मई 1888 में यहां पहला स्कूल क्रिकेट मैच खेला गया था. यह मुकाबला रिचमंड कॉलेज और ऑल सेंट्स कॉलेज के बीच हुआ था. बाद में रिचमंड कॉलेज और महिंदा कॉलेज के बीच होने वाला वार्षिक मुकाबला भी यहां की पुरानी क्रिकेट परंपरा का हिस्सा बन गया. 1927 में इस मैदान को आधिकारिक तौर पर क्रिकेट स्टेडियम का दर्जा मिला. इसके बाद यहां क्रिकेट लगातार आगे बढ़ता गया.
Also Read: 17 साल बाद भारत लौट रहा BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप, सिंधु समेत इन स्टार्स पर रहेंगी नजरें
1998 में खेला गया पहला टेस्ट
गॉल में पहला टेस्ट मैच 3 जून 1998 को श्रीलंका और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया. मेजबान श्रीलंका ने इस मुकाबले को पारी और 16 रन से अपने नाम किया. इसके कुछ वर्षों बाद भारत ने भी इस मैदान पर अपना पहला टेस्ट खेला. अगस्त 2001 में भारतीय टीम गॉल में उतरी, लेकिन उसे 10 विकेट से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद भारत ने यहां चार और टेस्ट खेले. अब तक गॉल में भारत का रिकॉर्ड 5 टेस्ट में 2 जीत और 3 हार का है. भारत ने यहां अपनी पहली जीत 2008 में दर्ज की थी, जब टीम ने श्रीलंका को 170 रन से हराया. इसके बाद 2017 में भारत ने 304 रन से जीत हासिल की थी.
गॉल में सहवाग के बल्ले का जलवा
गॉल में भारतीय बल्लेबाजों की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड वीरेंद्र सहवाग के नाम है. उन्होंने चार पारियों में 391 रन बनाए हैं. सहवाग ने यहां दो टेस्ट शतक लगाए, जिसमें एक दोहरा शतक भी शामिल है. वहीं गेंदबाजी में रविचंद्रन अश्विन भारतीयों में सबसे आगे हैं. उन्होंने गॉल में चार पारियों में 14 विकेट लिए हैं और एक बार 10 विकेट भी हासिल किए हैं.
Also Read: एशिया कप और एशियन गेम्स के लिए पाकिस्तान की टीम घोषित, इस खिलाड़ी को मिली कप्तानी
मुरलीधरन ने यहीं पूरे किए थे 800 विकेट
गॉल मैदान ने क्रिकेट के कई यादगार पल देखे हैं. इनमें सबसे खास पलों में से एक श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन से जुड़ा है. 2010 में मुरलीधरन ने इसी मैदान पर अपने टेस्ट करियर का आखिरी मुकाबला खेला था. भारत के खिलाफ उस मैच में उन्होंने अपने टेस्ट करियर के 800 विकेट पूरे किए. वह विकेट उनके करियर की आखिरी गेंद पर आया था, जिससे उनका विदाई मैच भी बेहद खास बन गया. ऑस्ट्रेलिया के महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न से जुड़ी भी एक खास उपलब्धि इसी मैदान की है. उन्होंने गॉल में अपने टेस्ट करियर का 500वां विकेट हासिल किया था.
सुनामी ने बदल दी थी मैदान की तस्वीर
26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सुनामी ने गॉल स्टेडियम को भी भारी नुकसान पहुंचाया था. मैदान और आसपास की कई इमारतें प्रभावित हुईं. कुछ समय के लिए स्टेडियम को सुनामी से प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर के रूप में भी इस्तेमाल किया गया. इसके बाद मैदान का पुनर्निर्माण शुरू हुआ. नया पवेलियन और मीडिया सेंटर बनाया गया तथा दर्शकों के बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया. दिसंबर 2007 में स्टेडियम को दोबारा खोला गया.
Also Read: जब इंडोर स्टेडियम में खेला गया पहला ODI इंटरनेशनल मैच, जानिए उस दिन की पूरी कहानी
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में
By अभिजीत कुमार
अभिजीत कुमार पत्रकारिता जगत में दो वर्षों का अनुभव रखने वाले युवा पत्रकार हैं. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में कार्य किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर के स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के संपादन, लेखन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










