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Yashpal Sharma Died : यशपाल शर्मा को मरते दम तक रहा इस बात का मलाल, 5000 पाउंड तक देने को थे तैयार

By Prabhat khabar Digital
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Yashpal Sharma Died
Yashpal Sharma Died
pti photo

1983 आईसीसी वर्ल्ड कप (1983 ICC World Cup) का हिस्सा रहे दिग्गज क्रिकेटर यशपाल शर्मा (Yashpal Sharma) अब हमारे बीच नहीं रहे. मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. वह 66 वर्ष के थे. दिग्गज क्रिकेटर के निधन से पूरा खेल जगत इस समय सदमे में है. साथ क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों का रो-रो कर बुरा हाल हो चुका है. वे यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि भारत को पहली बार वर्ल्ड कप दिलाने वाला हीरो अब हमारे बीच नहीं रहा.

यशपाल शर्मा 1979 विश्व कप की उस भारतीय टीम का हिस्सा भी थे जिसे श्रीलंका की टीम के खिलाफ भी शिकस्त का सामना करना पड़ा था. लेकिन चार साल बाद कपिल देव की अगुआई में भारत ने वर्ल्ड कप पर कब्जा जमाया, जिसमें यशपाल ने भी बड़ी भूमिका निभायी.

यशपाल शर्मा के पास सुनील गावस्कर जैसी योग्यता, दिलीप वेंगसरकर का विवेक या गुंडप्पा विश्वनाथ जैसी कलात्मकता नहीं थी, लेकिन जो भी ‘यश पाजी' को जानता है उसे पता है कि उनके जैसा समर्पण, जज्बा और जुनून बेहद कम लोगों के पास होता है.

यशपाल शर्मा ने भारत के लिए कई यादगार मैच खेले, लेकिन उस दिग्गज खिलाड़ी को एक बात की मलाल मरते दम तक रहा. दरअसल यशपाल शर्मा ने विश्व कप 1983 के भारत के पहले मैच में ओल्ड ट्रैफर्ड में वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार 89 रन की पारी थी.

उनकी उसी पारी के दम पर भारत ने जीत की पटकथा लिखी. भारत ने उस मैच को 32 रन से जीता था. उस मैच के बारे में यशपाल ने बेहद मलाल के साथ कहा था, आपको पता है, मैंने बीबीसी से कई बार पता किया कि क्या उनके पास उस मैच की फुटेज है. मैं उस पारी की रिकॉर्डिंग के लिए किसी को भी कम से कम 5000 पाउंड तक देने को तैयार था.

मैलकम मार्शल को मानते थे सबसे घातक गेंदबाज

यशपाल दिग्गज तेज गेंदबाज मैलकम मार्शल को सबसे घातक गेंदबाज मानते थे. उन्होंने एक बार बताया था कि मार्शल के साथ उनका अजीब रिश्ता था. मैं जब भी बल्लेबाजी के लिए आता था तो वह कम से कम दो बार गेंद मेरी छाती पर मारता था.

यशपाल ने कहा था, आपको पता है मैंने 1983 में (विश्व कप से ठीक पहले) सबीना पार्क में 63 रन बनाए थे और सबसे आखिर में आउट हुआ था, मैं ड्रेसिंग रूप में वापस गया, टी-शर्ट उतारी और वहां मैलकम की प्यार की निशानी (मैलकम की शॉर्ट गेंद से लगी चोट) थी. वे सभी महान गेंदबाज थे लेकिन मैलकम विशेष था। वह डरा देता था.

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