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World environment Day: प्रकृति से कितना प्यार करते हैं धौनी? करोड़ों के विज्ञापन तक छोड़ लगे हैं सिर्फ इस काम में

Updated at : 05 Jun 2021 8:37 AM (IST)
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World environment Day: प्रकृति से कितना प्यार करते हैं धौनी? करोड़ों के विज्ञापन तक छोड़ लगे हैं सिर्फ इस काम में

World environment Day: क्रिकेट की दुनिया में धौनी (MS Dhoni) को शानदार ढंग से मैच फिनिश करने के लिए जाना जाता है. लेकिन क्रिकेट की दुनिया का यह एक्सपर्ट फिलहाल कृषि जानकारों से सलाह लेकर फल और सब्जियां उगा रहे हैं.

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World environment Day: पूरी दुनिया में 5 जून का दिन विश्व पर्यावरण दिवस (Enviroment Day) के तौर पर मनाया जाता है. पौधारोपरण करने से ना सिर्फ वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है बल्कि पर्यावरण में फैली दूषित वायु को शुद्ध होता है. टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में शामिल महेंद्र सिंह धौनी (MS Dhoni) का भी पर्यावरण से लगाव किसी से छिपा नहीं है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास के बाद इस समय अपने गृह जिले रांची में खेती-किसानी से जुड़ गये हैं. नी ने रांची रिंग रोड से सटे सेंबो गांव में 43 एकड़ क्षेत्र में ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं.

क्रिकेट की दुनिया में धौनी को शानदार ढंग से मैच फिनिश करने के लिए जाना जाता है. लेकिन क्रिकेट की दुनिया का यह एक्सपर्ट फिलहाल कृषि जानकारों से सलाह लेकर फल और सब्जियां उगा रहे हैं. धौनी के खेत में में स्ट्रॉबेरी के अलावा अनानास, शरीफा, अमरूद, पपीता, प्याज, टमाटर, लौकी, मटर भी लगी हुई है. इसके साथ ही तरबूज, फूलगोभी की फसल हो चुकी है और चारों तरफ आम के पेड़ अलग से लगाए गए हैं. धौनी के फॉर्म हाउस में तैयार उत्पादों की रांची के बाजारों में जमकर मांग देखी जा रही है.

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खेती के लिए छोड़ा करोड़ों का एड 

बता दें कि पूर्व भारतीय कप्तान ने कोरोना वायरस महामारी के बीच कोई व्यावसायिक विज्ञापन नहीं करके फिलहाल जैविक खेती में व्यस्त हैं. धोनी के मैनेजर ने पिछले साल इस बात की जानकारी देते हुए बताया था कि उसने ब्रांड प्रचार बंद कर दिया है और कहा है कि जब तक जीवन सामान्य नहीं हो जाता तब तक वो कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं करेंगे. उन्होंने कहा था कि धौनी के पास 40 से 50 एकड़ खेती की जमीन है और वो वहां पपीते, केले की जैविक खेती में व्यस्त है.

मालूम हो कि धौनी ने खेती के लिए ऑर्गेनिक तरीका अपनाया है. उन्होंने अपने खेत में खुद के तैयार खाद का प्रयोग करते हैं. उन्होंने अपने फॉर्म हाउस में जगह-जगह पर जीवामृत तैयार कर रहे हैं और उसी से फसलों में छीड़काव करते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ जाता है.

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