Teachers Day Special: इन गुरुओं की वजह से टीम इंडिया को मिला सचिन, धोनी जैसा स्टार

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Teachers Day

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Teachers Day Special: आज पूरे देश में शिक्षक दिवस (Teachers Day 2024) मनाया जा रहा है. भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर हर वर्ष शिक्षक दिवस मनाया जाता है.

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Teachers Day Special: हम सभी के जीवन में शिक्षकों की भूमिका सबसे अलग है. अगर हम आज अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं, तो कहीं न कहीं किसी गुरु का आशीर्वाद ही है. जिस तरह एक कुम्हार मिट्टी को तराश कर एक अनोखा रूप देता है, उसी तरह एक गुरु अपने शिष्य को तराश कर योग्य नागरिक बनाता है. आज अगर दुनियाभर में क्रिकेट में भारत की धाक है, तो इसके पीछे गुरुओं का ही हाथ रहा है. अगर गुरु नहीं होते तो टीम इंडिया को सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, सौरव गांगुली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, विराट कोहली, रोहित शर्मा जैसा क्रिकेटर नहीं मिलता. तो आइये इस शिक्षक दिवस के मौके पर टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ियों के गुरुओं को जानें.

सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है. उन्हें खेल के क्षेत्र में पहली बार भारत रत्न से नवाजा गया. सचिन तेंदुलकर के नाम क्रिकेट में कई रिकॉर्ड दर्ज हैं. सचिन को मास्टर ब्लास्टर बनाने में एक गुरु का ही हाथ रहा है. अगर गुरु रमाकांत आचरेकर नहीं होते हो सचिन को शायद ही दुनिया पहचान पाती. रमाकांत आचरेकर ने ही सचिन की प्रतिभा को पहचाना और क्रिकेट की बारीकियों को सिखाया. जब सचिन नेट्स पर बल्लेबाजी करते-करते थक जाते तो रमाकांत आचरेकर स्टंप पर सिक्का रख देते. सचिन को आउट करने वाले को वह सिक्का मिल जाता था. आचरेकर सचिन के अलावा, विनोद कांबली, प्रवीण आमरे, बलविंदर सिंह संधू जैसे स्टार खिलाड़ियों के भी कोच रहे हैं. शिक्षक दिवस के मौके पर सचिन हमेशा रमाकांत आचरेकर को याद करते हैं.

महेंद्र सिंह धोनी

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और कैप्टन कुल महेंद्र सिंह धोनी को आज पूरी दुनिया प्यार करती है. धोनी आज इंटरनेशनल क्रिकेट से भले ही संन्यास ले चुके हैं, लेकिन उनका क्रेज थोड़ा भी कम नहीं हुआ है. धोनी एक छोटे से शहर रांची से निकलकर दुनिया भर में फेमस हुए. माही को धोनी बनाने में कई गुरुओं का हाथ रहा है. क्लब क्रिकेट में धोनी को चंचल भट्टाचार्य ने कोचिंग दी थी. चंचल दा ने ही धोनी को शुरुआती दिनों में क्रिकेट के गुर सिखाए थे. हालांकि धोनी को क्रिकेटर बनाने में उनके स्कूल के शिक्षक केआर बनर्जी की बड़ी भूमिका रही है. धोनी का बचपन में फुटबॉल की ओर झुकाव था. लेकिन केआर बनर्जी ने ही उन्हें फुटबॉल से क्रिकेट की ओर लेकर आए. केआर बनर्जी नहीं होते तो धोनी आज क्रिकेट नहीं बल्कि फुटबॉल खेलते नजर आते.

विराट कोहली

विराट कोहली को दुनियाभर में ‘रन मशीन’ के नाम से जाना जाता है. कोहली की बल्लेबाजी को शायद ही कोई नापसंद करता हो. कोहली को ‘विराट’ बनाने में उनके बचपन के कोच राजकुमार शर्मा का खास रोल रहा है. विराट कोहली भी अपने बचपन के कोच राजकुमार को कभी नहीं भूलते. हाल के दिनों में कोहली ने अपने कोच को स्कोडा रैपिड कार तोहफे में दिया था. राजकुमार शर्मा को 2016 में द्रोणाचार्य अवार्ड से भी नवाजा गया था.

रोहित शर्मा

टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा की बल्लेबाजी का खौफ दुनियाभर के गेंदबाजों में है. जब रोहित का बल्ला चलता है, तो उनके सामने दिग्गज से दिग्गज गेंदबाज घुटने टेक देता है. रोहित शर्मा के नाम वनडे में 264 रन का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है. 2014 के बाद कोई भी क्रिकेटj इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाया है. रोहित शर्मा को आज अगर दुनिया जानती है, तो इसके पीछे उनके बचपन के कोच दिनेश लाड का हाथ रहा है. बचपन में रोहित शर्मा के पास पैसे नहीं थे. पैसे के कारण उनकी पढ़ाई रूक जा रही थी, लेकिन कोच दिनेश लाड ने रोहित शर्मा को स्कूल में एडमिशन कराया. कोच ने रोहित से फी नहीं लेने की गुजारिश भी की थी. उन्होंने छोटी उम्र में ही रोहित शर्मा की प्रतिभा को भांप लिया था.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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