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मप्र में नौ वर्षीय लड़की ने अंडर 19 टीम में शामिल होकर रचा इतिहास

Updated at : 26 Apr 2017 5:57 PM (IST)
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मप्र में नौ वर्षीय लड़की ने अंडर 19 टीम में शामिल होकर रचा इतिहास

इंदौर : अनादि तागड़े की सहेलियां जब गुड़ियों से खेल रही थीं, तब इंदौर की यह मासूम-सी दिखनेवाली लड़की क्रिकेट की गेंद थामकर मैदान पर गेंदबाजी के गुर सीख रही थी. खेल के प्रति उसके जुनून का ही नतीजा है कि मध्यम गति की इस प्रतिभावान गेंदबाज को केवल नौ साल की उम्र में इंदौर […]

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इंदौर : अनादि तागड़े की सहेलियां जब गुड़ियों से खेल रही थीं, तब इंदौर की यह मासूम-सी दिखनेवाली लड़की क्रिकेट की गेंद थामकर मैदान पर गेंदबाजी के गुर सीख रही थी. खेल के प्रति उसके जुनून का ही नतीजा है कि मध्यम गति की इस प्रतिभावान गेंदबाज को केवल नौ साल की उम्र में इंदौर संभाग की अंडर-19 बालिका टीम में चुन लिया गया है.

अनादि को 27 अप्रैल से ग्वालियर में शुरू होनेवाले मध्यप्रदेश अंतर संभागीय किक्रेट टूर्नामेंट के लिए इंदौर संभाग की 16 सदस्यीय अंडर-19 बालिका टीम में शामिल किया गया है. कक्षा चार की छात्रा ने बुधवार को बताया, ‘जब मैं पांच साल की थी, तो मोहल्ले के लड़कों को क्रिकेट खेलता देख मेरे मन में इस खेल के लिए दिलचस्पी पैदा हुई. लेकिन, तब मुझे लड़के अपने साथ क्रिकेट खेलने नहीं देते थे. कुछ दिन तक मैंने अपने बड़े भाई के साथ क्रिकेट खेली. फिर मेरे पिता अनुराग तागड़े ने मुझे एक स्थानीय क्रिकेट क्लब में प्रशिक्षण के लिए भेज दिया. ‘

दांयें हाथ से मध्यम गति की गेंद फेंकनेवाली लड़की ने कहा, ‘बचपन में मुझे चमड़े की भारी गेंद से बहुत डर लगता था. लेकिन, पिता ने मेरा हौसला बढ़ा कर यह डर दूर किया.’ यह पूछे जाने पर कि उम्र में अपने से बड़ी लडकियों के साथ क्रिकेट खेलने में असहज महसूस नहीं होता, उसने जवाब दिया कि उसे टीम की वरिष्ठ खिलाड़ियों और कोच का पूरा सहयोग मिलता है, जिससे वह बिना किसी परेशानी के खेल पाती है.

अनादि का जन्म 31 मार्च, 2008 को हुआ और वह भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पंड्या की प्रशंसक है. वह बड़ी होकर देश की महिला क्रिकेट टीम में शामिल होना चाहती है. वह दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से भी मिलना चाहती है. अनादि की मां दीप्ति तागड़े बांयें हाथ की स्पिन गेंदबाज के रूप में विश्वविद्यालय स्तर पर क्रिकेट खेल चुकी हैं. लेकिन, किन्हीं कारणों से वह पेशेवर क्रिकेट नहीं खेल सकीं. जब वह अपनी बेटी के बारे मेें बात करती हैं, तो उनकी आंखों में उम्मीद की चमक देखी जा सकती है. दीप्ति ने कहा, ‘मुझे भरोसा है कि क्रिकेट के क्षेत्र में मेरा अधूरा रह गया सपना मेरी बेटी के जरिये जरूर पूरा होगा.’

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