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बीसीसीआई ने कहा, क्रिकेट के लिए पैसा जरूरी, जस्टिस लोढ़ा ने दी सफाई

Updated at : 04 Oct 2016 3:06 PM (IST)
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बीसीसीआई ने कहा, क्रिकेट के लिए पैसा जरूरी, जस्टिस लोढ़ा ने दी सफाई

नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्तमान टेस्ट श्रृंखला के भविष्य को लेकर कयास लगाने से इनकार कर दिया लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा कि पैसे के बिना खेल नहीं चलाया जा सकता हालांकि लोढा पैनल ने भी स्पष्टीकरण दिया कि उसने बैकों को बीसीसीआई के खाते […]

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नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्तमान टेस्ट श्रृंखला के भविष्य को लेकर कयास लगाने से इनकार कर दिया लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा कि पैसे के बिना खेल नहीं चलाया जा सकता हालांकि लोढा पैनल ने भी स्पष्टीकरण दिया कि उसने बैकों को बीसीसीआई के खाते फ्रीज करने के निर्देश नहीं दिये हैं. ठाकुर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें राज्य संघों को धनराशि जारी करने की अनुमति नहीं दी जा रही जबकि राज्य संघ मैचों का आयेजन करने के लिए धन के लिए उन पर निर्भर हैं.

ठाकुर ने कहा, ‘‘मैं इस पर बात नहीं कर सकता कि श्रृंखला जारी रहेगी या नहीं लेकिन यदि खिलाड़ियों और संघों को भुगतान नहीं किया जाता है तो इससे तब गंभीर स्थिति पैदा होगी जबकि टीम टेस्ट में नंबर एक, टी20 में नंबर दो और वनडे में नंबर तीन है. यह सबसे शक्तिशाली बोर्ड है. हमने आईपीएल जैसे सफल टूर्नामेंट को तैयार किया. हम पैसे के बिना खेल नहीं चला सकते. ” उन्होंने कहा, ‘‘बीसीसीआई बाहर से पैसे नहीं लेता चाहे वह केंद्र हो या राज्य सरकार. बैंकों को कहा गया है कि वे भुगतान जारी नहीं करें. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की परिस्थिति पैदा हुई. क्या बीसीसीआई ने इतने वर्षों से कुछ नहीं किया. इस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए. ”

अपनी सिफारिशों को नहीं मानने पर उच्चतम न्यायालय से नियुक्त लोढा पैनल ने बीसीसीआई के प्रति कडा रवैया अपनाते हुए उन बैंकों को ‘निर्देश’ दिये जिनमें बीसीसीआई के खाते हैं कि वे 30 सितंबर को बोर्ड की विशेष आम बैठक में लिये गये वित्तीय फैसलों के संबंध में राज्य संघों को बडी धनराशि का भुगतान नहीं करे.

ठाकुर ने कहा, ‘‘बीसीसीआई के बारे में तब सवाल उठाये जा रहे हैं जबकि हमने टेस्ट क्रिकेटर की मैच फीस सात लाख से बढाकर 15 लाख रुपये कर दी है. अधिकतर राज्य इकाईयां इसको लेकर अनिश्चितता की स्थिति में हैं कि वे इस घरेलू सत्र में मैचों की मेजबानी कैसे करेंगे। उन्हें यह फैसला करना होगा कि क्या वे पैसे के बिना मैचों की मेजबानी कर सकते हैं या नहीं. ” लोढा ने हालांकि स्पष्ट किया कि उन्होंने बैंकों को बीसीसीआई के खातों से पैसा निकालने पर रोक लगाने के लिये नहीं कहा. उन्होंने कहा, ‘‘हमने बीसीसीआई के खातों पर रोक नहीं लगायी है. हमने बीसीसीआई को निर्देश दिये हैं कि वह राज्य संघों को धनराशि का भुगतान न करे.

दैनिक कार्य, नित्य व्यय, मैच चलते रहने चाहिए। इसको लेकर बिल्कुल भी कोई रोक नहीं।” बीसीसीआई ने हालांकि दलील दी कि राज्य संघ मैचों का आयोजन करने के लिये बोर्ड पर निर्भर हैं और लोढा पैनल के ताजा निर्देशों को देखते हुए वे अपना कामकाज नहीं कर पाएंगे जिससे न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी श्रृंखला के मैचों के लिए उनकी तैयारियां प्रभावित होंगी. बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘‘बोर्ड के सदस्य संघ अपने साथ हो रहे इस तरह के व्यवहार से दुखी हैं. वे मैचों का आयोजन के लिए बीसीसीआई से मिलने वाली धनराशि पर निर्भर हैं. अब तक सात राज्य संघों ने घरेलू सत्र के दौरान मैचों की मेजबानी करने में असमर्थता जतायी है जबकि नौ अन्य ने इस मामले में जानकारी चाही है. यदि चीजें इसी तरह से चलती रही तो श्रृंखला ( न्यूजीलैंड के खिलाफ ) आज शाम तक रद्द कर दी जा सकती है. ”

बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘‘अभी बहुत ज्यादा हस्तक्षेप किया जा रहा है. लोगों को यह समझने की जरुरत है कि भारत बीसीसीआई प्रशासन के तहत ही क्रिकेट में महाशक्ति बना। हम एकमात्र खेल संस्था हैं जो सरकार सहित किसी से भी एक भी पैसा नहीं लेते. हमने अपने बलबूते पर सारा आधारभूत ढांचा तैयार किया है. ” लोढा पैनल और बीसीसीआई के बीच चल रही जंग ने कल तब नया मोड ले लिया था जब लोढा पैनल ने अपने पत्र में बैकों को बीसीसीआई की तरफ से राज्य संघों को होने वाले भुगतान को रोकने के लिये कहा.

पैनल ने बैंकों को लिखे पत्र में कहा, ‘‘समिति को पता चला है कि बीसीसीआई की 30 सितंबर 2016 को हुई कार्यकारिणी की आपात बैठक में विभिन्न राज्य संघों को बडी धनराशि का भुगतान करने के संबंध में कुछ फैसले किये गये.” पत्र में कहा गया है, ‘‘आप यह भी जानते हो कि बीसीसीआई ने उच्चतम न्यायालय के फैसले और साथ ही इस समिति द्वारा तय की गयी पहली समयसीमा का उल्लघंन किया है जिसमें धनराशि के वितरण की नीति 30 सितंबर 2016 तक तैयार करना शामिल है. ”

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