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डीडीसीए मानहानि मामला : हाईकोर्ट ने केजरीवाल और कीर्ति आजाद से लिखित जवाब मांगा

Updated at : 02 Mar 2016 4:45 PM (IST)
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डीडीसीए मानहानि मामला : हाईकोर्ट ने केजरीवाल और कीर्ति आजाद से लिखित जवाब मांगा

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीडीसीए द्वारा दायर पांच करोड़ रुपये की मानहानि के दीवानी मामले में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल तथा पार्टी से निलंबित किए गए भाजपा सांसद कीर्ति आजाद से आज कहा कि वे अपने लिखित बयान दाखिल करें. दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने अपनी कार्यप्रणाली और वित्तीय कामकाज के खिलाफ […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीडीसीए द्वारा दायर पांच करोड़ रुपये की मानहानि के दीवानी मामले में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल तथा पार्टी से निलंबित किए गए भाजपा सांसद कीर्ति आजाद से आज कहा कि वे अपने लिखित बयान दाखिल करें.

दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने अपनी कार्यप्रणाली और वित्तीय कामकाज के खिलाफ केजरीवाल और आजाद द्वारा की गई कथित टिप्पणियों के लिए उनके खिलाफ मानहानि का वाद दायर किया था. संयुक्त रजिस्ट्रार अनिल कुमार सिसोदिया ने केजरीवाल और आजाद को आज बयान दाखिल नहीं कर पाने के बाद निर्देश दिया कि वे 30 दिन के भीतर अपने बयान दाखिल करें. दोनों ने आज इस आधार पर बयान दाखिल नहीं किए कि दोनों को वाद की पूर्ण प्रति नहीं मिली.
अदालत ने कहा, ‘‘प्रतिवादी नंबर 1 और 2 (केजरीवाल तथा आजाद) को जारी सम्मन पर उनकी तरफ से वकील पेश हुआ और कहा कि उन्हें पूर्ण दस्तावेज नहीं मिले हैं. वादी (डीडीसीए) को निर्देश दिया कि वह प्रतिवादियों को आज से एक हफ्ते के भीतर प्रति उपलब्ध कराए.” उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिवादी दस्तावेज प्राप्त करने के बाद 30 दिन के भीतर अपने लिखित बयान (डीडीसीए द्वारा दायर वाद के संबंध में) दाखिल करेंगे. उसके बाद डीडीसीए चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करेगा. पक्षों को आज से 10 सप्ताह के भीतर अपने मूल दस्तावेज जमा करने होंगे.”
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दस्तावेजों को स्वीकार…अस्वीकार करने संबंधी हलफनामा आज से 12 सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाएगा और मामले में दलीलें पूरी करने तथा दस्तावेजों को स्वीकार…अस्वीकार करने के लिए सात जुलाई की तारीख दी.
अदालत का निर्देश दिल्ली जिला क्रिकेट संघ के दीवानी मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान आया. मामले में लिखित बयान दाखिल करने के लिए केजरीवाल और आजाद को 15 जनवरी को नोटिस जारी किया गया था.
डीडीसीए ने अपने वकील संग्राम पटनायक के जरिए कहा था कि केजरीवाल ने ‘‘उनके खिलाफ पूर्व उद्देश्य के साथ झूठे, हैरान करने वाले, लज्जाजनक, मानहानिकारक, निराधार, दुर्भावनापूर्ण, शर्मनाक और अपमानजनक बयान दिए.” वकील ने कहा था कि आजाद ने भी इस तरह के बयान दिए जो ‘‘निहित स्वार्थवश सिर्फ वादी (डीडीसीए) को बदनाम करने और नुकसान पहुंचाने के इरादे से दिए गए.” डीडीसीए ने अपनी शिकायत में कहा था कि वित्तीय अनियमितताओं और कनिष्ठ स्तर पर चयन में भ्रष्टाचार के आरोपों से क्रिकेट इकाई की ‘‘छवि खराब” हुई.
इसमें कहा गया, ‘‘नतीजतन, डीडीसीए को 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ. हालांकि डीडीसीए प्रतिवादियों द्वारा की गई उक्त मानहानि से उत्पन्न नुकसान के लिए पांच करोड़ रुपये (प्रत्येक पर ढाई…ढाई करोड़ रुपये) का वर्तमान वाद दायर कर रहा है.” शिकायत में कहा गया कि इसके अतिरिक्त डीडीसीए यह भी मांग करता है कि केजरीवाल और आजाद को सार्वजनिक रुप से माफी मांगनी चाहिए. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी केजरीवाल और उनकी पार्टी के पांच अन्य लोगों पर उच्च न्यायालय में 10 करोड़ रुपये का मानहानि वाद दायर कर रखा है.
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