इस विश्वकप में 30 यार्ड के घेरे में रहेंगे चार से पांच फिल्डर

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इस विश्वकप में 30 यार्ड के घेरे में रहेंगे चार से पांच फिल्डर

क्रिकेट का विश्वकप 14 फरवरी से शुरू होने वाला है. इस विश्वकप के सबसे बड़े मुकाबले में शुमार भारत-पाकिस्तान का मुकाबला इस बार पहले ही राउंड में होने वाला है. एडीलेड के ग्राउंड में यह महामुकाबला होगा.इस मैच को देखने से पहले हर क्रिकेट प्रेमी के लिए यह जान लेना जरूरी है कि इस बार […]

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क्रिकेट का विश्वकप 14 फरवरी से शुरू होने वाला है. इस विश्वकप के सबसे बड़े मुकाबले में शुमार भारत-पाकिस्तान का मुकाबला इस बार पहले ही राउंड में होने वाला है. एडीलेड के ग्राउंड में यह महामुकाबला होगा.इस मैच को देखने से पहले हर क्रिकेट प्रेमी के लिए यह जान लेना जरूरी है कि इस बार आईसीसी ने विश्वकप के नियमों में क्या बदलाव किया है और क्या नया इस बार के विश्वकप में हो सकता है, ताकि मैच देखते वक्त किसी तरह की दुविधा उत्पन्न न हो. क्रिकेट के जानकारों की मानें तो इस बार का विश्वकप अन्य विश्वकप के मुकाबले ज्यादा रोचक होगा, क्योंकि इस बार कई टीमें खिताब की हकदार दिख रही हैं. आईसीसी वर्ल्डकप 2015 इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस विश्वकप में कई ऐसी बातें देखने को मिलेंगी, जो पिछले किसी विश्वकप में नहीं दिखीं थी. आइए जानें उनके बारे में :-

क्षेत्ररक्षण पर पाबंदियां और पावर प्ले : अब 30 यार्ड के घेरे के बाहर चार से पांच फिल्डर का रहना पूरी इनिंग में जरूरी होगा. वहीं पावर प्ले की संख्या सिर्फ दो होगी, एक बॉलिंग साइड के लिए और दूसरी बैटिंग साइट के लिए. शुरुआती दस ओवर बॉलिंग साइड के लिए पावर प्ले होगा और 40 ओवर के बाद दूसरा पावर प्ले बैटिंग साइड के लिए होगा.
दो नयी गेंद का होगा प्रयोग : इस बार के विश्वकप में दो नयी गेंद प्रयुक्त होगी, जिससे बैटिंग खासकर ओपनर बैट्समैन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जायेगी. वहीं तेज गेंदबाजों के लिए यह मददगार होगा, लेकिन रिवर्स स्विंग मुश्किल हो जायेगी.
पार्ट टाइमर बॉलर्स की भूमिका घटेगी : इस विश्वकप में पार्ट टाइमर बॉलर्स की भूमिका घटेगी और वे उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पायेंगे, जैसा कि विश्वकप में युवराज सिंह जैसे ऑल राउंडर ने किया था.
स्पिनर्स को नहीं मिलेगा लाभ : ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियों में स्पिनर्स को कोई खास लाभ नहीं मिलता है.नये नियमों से भी उन्हें कोई फायदा नहीं मिलता दिख रहा है.
डीआरएस पद्धति : आईसीसी ने कंफर्म किया है कि डीआरएस पद्धति को ज्यादा सटीक बनाया जायेगा और अंपायर के निर्णय को ज्यादा निष्पक्ष बनाने के लिए अतिरिक्त टूल का प्रयोग किया जायेगा.
पुरस्कार राशि में बढ़ोत्तरी : इस बार आईसीसी ने पुरस्कार राशि में 25 प्रतिशत की वृद्धि की है.पहली बार ऐसा होगा कि क्वार्टर फाइनल तक भी नहीं पहुंचने वाली टीम को प्रति टीम के हिसाब से 35 हजार डॉलर की राशि दी जायेगी.
नहीं होंगे सुपर ओवर: इस विश्वकप में टाई की स्थिति में सुपर ओवर की सुविधा नहीं होगी. यहां तक की फाइनल में भी यह नियम लागू होगा और टाई की स्थिति में ट्रॉफी की हकदार दोनों टीमें होंगी और उन्हें संयुक्त विजेता घोषित किया जायेगा.
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