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मुल्तान टेस्ट : जब राहुल के फैसले पर स्‍तब्‍ध और गुस्‍से में लाल पीले हो गये थे सचिन

Updated at : 06 Nov 2014 5:38 PM (IST)
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मुल्तान टेस्ट : जब राहुल के फैसले पर स्‍तब्‍ध और गुस्‍से में लाल पीले हो गये थे सचिन

नयी दिल्ली : महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अपनी बायोग्राफी में एक और खुलासा किया है. सचिन ने आज से दस बरस पहले खेले गए मुल्तान टेस्ट की चर्चा करते हुए खुलाया किया कि वह किस तरह से राहुल द्रविड के फैसले पर नाराज हो गयेथे.मुल्‍तान टेस्‍ट में सचिन तेंदुलकर 194 रन पर थे और […]

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नयी दिल्ली : महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अपनी बायोग्राफी में एक और खुलासा किया है. सचिन ने आज से दस बरस पहले खेले गए मुल्तान टेस्ट की चर्चा करते हुए खुलाया किया कि वह किस तरह से राहुल द्रविड के फैसले पर नाराज हो गयेथे.मुल्‍तान टेस्‍ट में सचिन तेंदुलकर 194 रन पर थे और उस समय के कार्यवाहक कप्तान राहुल द्रविड ने भारतीय पारी की घोषणा कर दी थी. इस फैसले पर सचिन स्तब्ध और गुस्से में लाल पीले हो गए थे.

अपनी आत्मकथा प्लेइंग इट माय वे में तेंदुलकर ने बताया कि वह पारी समाप्ति की घोषणा से कितने दुखी थे और उन्होंने द्रविड से उन्हें अकेले छोड़ देने को कहा ताकि वह दोहरा शतक चूकने की निराशा से उबर सकें. उन्होंने किताब में लिखा , मैंने राहुल को आश्वस्त किया कि इस घटना का मैदान पर मेरे प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पडेगा लेकिन मैदान के बाहर मैं कुछ समय अकेले रहना चाहता हूं ताकि इससे उबर सकूं. तेंदुलकर ने यह भी कहा कि उस घटना का द्रविड और उनके आपसी संबंध पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडा.
उन्होंने कहा, उस घटना के बावजूद मुझे खुशी है कि राहुल और मैं अच्छे दोस्त बने रहे और मैदान पर भी हमारा तालमेल कैरियर खत्म होने तक बना रहा. हमारा क्रिकेट और हमारी दोस्ती पर कोई असर नहीं पडा. हैशेट इंडिया द्वारा प्रकाशित किताब में तेंदुलकर ने मुल्तान में पारी की घेाषणा से जुडे पूरे वाकये और ड्रेसिंग रुम के घटनाक्रम को बयां किया है.
तेंदुलकर ने लिखा, चाय के समय मैने कार्यवाहक कप्तान राहुल द्रविड और कोच जान राइट से पूछा कि क्या रणनीति है. मुझे बताया गया कि वे पाकिस्तान को बल्लेबाजी के लिये एक घंटा देना चाहते हैं. यह सही भी था और मैं चाय के बाद अपनी पारी को उसी के अनुसार खेलने के इरादे से उतरा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पारी की रफ्तार इस तरह से बढाई ताकि वह दोहरे शतक तक समय रहते पहुंच सके और पाकिस्तान को बल्लेबाजी के लिये 15 ओवर दिये जा सके.
उन्होंने लिखा, चाय के बाद हालांकि आधे घंटे के भीतर रमेश पोवार ने मुझे आकर तेजी से रन बनाने को कहा. मैने मजाक भी किया कि मुझे पता है कि तेजी से रन बनाने हैं लेकिन फील्ड को देखते हुए हम इतने ही तेजी से बना सकते हैं.तेंदुलकर ने कुछ देर बाद जब मैं 194 पर था तब वह फिर आया और कहा कि मुझे इसी ओवर में दोहरा शतक पूरा करना होगा क्योंकि राहुल ने पारी घोषित करने का फैसला किया है.
मैं कहने जा रहा था कि अभी भी बाकी छह रन बनाने के लिये मेरी गणना के अनुसार 12 गेंद बाकी थी जिसके बाद पाकिस्तान के लिये 15 ओवर रह जाते. तेंदुलकर को उस ओवर में एक भी गेंद खेलने को नहीं मिली.उन्होंने लिखा, उसके बाद मुझे एक भी गेंद खेलने को नहीं मिली और इमरान फरहत के सामने युवराज क्रीज पर था. उसने पहली दो गेंद खाली छोडी और तीसरी गेंद पर दो रन लिये. चौथी गेंद भी खाली गई और पांचवीं गेंद पर वह आउट हो गया.
तेंदुलकर ने लिखा, जब अगला बल्लेबाज पार्थिव पटेल आ रहा था तब मैने देखा कि राहुल हमें वापिस आने का इशारा कर रहा है. उसने पारी की घोषणा कर दी थी जब मैं 194 रन पर था और दिन के 16 ओवर का खेल बाकी था. हमने जो सोचा था उससे एक ओवर ज्यादा.
उन्होंने कहा कि वह द्रविड के फैसले से स्तब्ध रह गए थे. उन्होंने कहा, मैं स्तब्ध था क्योंकि उसके कोई मायने नहीं थे. वह मैच का दूसरा दिन था, चौथा नहीं. मैं ड्रेसिंग रुम लौटने लगा और मुझे लगा कि पूरी टीम इस फैसले से हैरान थी. मेरे कुछ साथियों ने सोचा कि मैं ड्रेसिंग रुम में गुस्से से अपना सामना फेंककर तमाशा करुंगा. मैं हालांकि यह सब नहीं करता और मैने इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहने का फैसला किया.
तेंदुलकर ने कहा, मैंने अपना सामान रखा और मैदान पर उतरने के लिये जान से कुछ समय मांगा. मैं भीतर से सुलग रहा था. उन्होंने कहा , मैं बाथरुम में अपना चेहरा धो रहा था तब जान मेरे पास आये और माफी मांगी. उन्होंने कहा कि वह इस फैसले में शामिल नहीं थे. मैं हैरान रह गया और उनसे कहा कि कोच होने के नाते वह भी फैसले का हिस्सा होते हैं और उन्हें शर्मिंदा होने की कोई जरुरत नहीं है अगर उन्हें अपना फैसला सही लगता है. तेंदुलकर ने कहा कि राइट के बाद नियमित कप्तान सौरव गांगुली भी उनसे इस फैसले के लिये माफी मांगने आये.
उन्होंने लिखा, जान के बाद सौरव मेरे पास आया और माफी मांगते हुए कहा कि यह उसका फैसला नहीं था. यह हैरानीभरा था क्योंकि बतौर कप्तान वह चाय के समय बातचीत का हिस्सा था और पारी की घोषणा के समय ड्रेसिंग रुम में भी था.उन्होंने लिखा, मैंने सौरव से कहा कि अब इस पर बात करने का कोई मतलब नहीं है.
तेंदुलकर ने यह भी कहा कि उन्होंने द्रविड से कहा कि वह वाकई नाराज है और नहीं होने का दिखावा नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, राहुल ने कहा कि टीम के हित में फैसला लिया गया और हमें यह मैच जीतना ही होगा. मैंने उससे कहा कि मैं भी टीम के लिये ही बल्लेबाजी कर रहा था और 194 रन टीम की मदद के लिये ही थे.
उन्होंने द्रविड को एक महीना पहले खेले गए सिडनी टेस्ट की याद दिलाई. उन्होंने कहा, जब हम दोनों चौथे दिन बल्लेबाजी कर रहे थे और सौरव ने दो तीन संदेश भेजे कि हमें कब पारी घोषित करनी है और राहुल बल्लेबाजी करता रहा. दोनों हालात एक से थे और सिडनी में पारी घोषित करना अधिक महत्वपूर्ण था क्योंकि उससे हम टेस्ट और श्रृंखला की जीत से हाथ धो सकते थे. यदि मुल्तान में राहुल जीत को इतना लालायित था तो उसे सिडनी में भी ऐसा ही करना चाहिये था.
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