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BCCI भी अब होगा NADA के दायरे में, खेल सचिव बोले- सभी के लिए समान होंगे नियम

Updated at : 09 Aug 2019 2:28 PM (IST)
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BCCI भी अब होगा NADA के दायरे में, खेल सचिव बोले- सभी के लिए समान होंगे नियम

नयी दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी अब नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) के दायरे में आएगा. खेल सचिव आरएस जुलानिया ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि बीसीसीआई के पास इसके लिए ना कहने की गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की तमाम खेल नियामक संस्थाएं और सभी खिलाड़ी एक समान हैं. सभी को […]

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नयी दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी अब नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) के दायरे में आएगा. खेल सचिव आरएस जुलानिया ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि बीसीसीआई के पास इसके लिए ना कहने की गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की तमाम खेल नियामक संस्थाएं और सभी खिलाड़ी एक समान हैं. सभी को एक ही नियम का पालन करना होगा. जुलानिया ने कहा कि, किसी को भी इस मामले में विशेषाधिकार नहीं दिया जा सकता है.

काफी सालों तक इंकार करने के बाद अब बीसीसीआई डोपिंग एजेंसी की शर्तों को मानने पर राजी हो गया है. फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीसीसीआई के कार्यकारी अध्यक्ष राहुल जौहरी ने कहा कि अब बोर्ड नाडा के दायरे में आता है. इसलिए हम तमाम अन्य खेल संस्थाओं की तरह इसके सभी नियमों को मानने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

बता दें कि ये फैसला हाल ही में युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ के मामले के संदर्भ में लिया गया है. गौरतलब है कि पृथ्वी शॉ को प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के कारण आठ महीने के लिए क्रिकेट के किसी भी प्रारुप में खेलने पर प्रतिंबधित कर दिया गया था. हालांकि ये आमतौर पर किसी खिलाड़ी को डॉप टेस्ट में फेल रहने पर दी जाने वाली सजा से काफी कम था.

डोप टेस्ट में फेल होने पर पृथ्वी शॉ पर बैन

मामला केवल यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि बीसीसीआई पर इस मामले में पृथ्वी शॉ को बचाने का भी आरोप लगा. कुछ मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक पृथ्वी शॉ से डोप टेस्ट के लिए नमूने फरवरी में ही लिए गए थे जिसकी जांच रिपोर्ट 48 घंटे बाद आ जानी चाहिए थी, लेकिन ये हाल में आया. कहा गया कि पृथ्वी शॉ इंडियन प्रीमियर में खेल सकें इसलिए जानबूझकर रिपोर्ट में देरी की गई. हालांकि आरोपों से इंकार करते हुए कहा गया कि तकनीकी खामियों के कारण रिपोर्ट आने में देरी हो गयी.

आयोजित किया जाता है वर्कशॉप

पृथ्वी शॉ ने डोप टेस्ट में फेल होने के बाद अपने ऊपर आठ महीने के लिए लगे बैन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था. उन्होंने कहा था कि मैंने खांसी के इलाज के लिए शिरप ली थी. बता दें कि खिलाड़ियों के लिए ऐसे वर्कशॉप आयोजित किए जाते हैं जिनमें उन्हें बताया जाता है कि कौन सी दवा खानी और कौन सी नहीं. खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाओं की पूरी लिस्ट भी दिखाई जाती है.

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