जब विराट कोहली की ही तरह हार्दिक पांड्या ने भी अपने कोच को किया हैरान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Aug 2018 5:46 PM
मुंबई : टैटू, कानों के डायमंड स्टड और आलोचकों के प्रति बेपरवाही कुछ ऐसी चीजें हैं जो विराट कोहली एवं हार्दिक पांड्या के व्यक्तित्व में समान हैं लेकिन इनके अलावा दोनों में एक समानता और है जो उनके बचपन के कोच के साथ उनका जुड़ाव है. कुछ साल पहले विराट के बड़े भाई विकास उनके […]
मुंबई : टैटू, कानों के डायमंड स्टड और आलोचकों के प्रति बेपरवाही कुछ ऐसी चीजें हैं जो विराट कोहली एवं हार्दिक पांड्या के व्यक्तित्व में समान हैं लेकिन इनके अलावा दोनों में एक समानता और है जो उनके बचपन के कोच के साथ उनका जुड़ाव है.
कुछ साल पहले विराट के बड़े भाई विकास उनके बचपन के कोच राजकुमार शर्मा के घर गये और उन्हें एक चमचमाती होंडा सिटी कार की चाभी सौंपी. इसके बाद विकास ने अपने छोटे भाई की कोच से बात करायी और विराट ने कोच को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं. विराट से इस तरह का स्नेह पाकर कोच राजकुमार भावविभोर हो गये.
इसी तरह 2016 में हार्दिक ऑस्ट्रेलिया के अपने पहले दौरे से लौटने के बाद अपनी अकादमी गये. अकादमी में वह अपने कोच जितेंद्र सिंह से मिले और उन्हें सीधा कार के एक शोरूम ले गये और उन्हें एक नयी कार भेंट की. जितेंद्र ने उस दिन को याद करते हुए कहा, ‘हार्दिक ऑस्ट्रेलिया के दौरे के बाद मुझसे मिलने आया था. उसे तब पहली बार भारतीय टीम में लिया गया था. वह मुझे कार के एक शोरूम ले गया, जहां उसने और क्रुणाल (हार्दिक के बड़े भाई) ने मुझे एक कार भेंट की.’
बचपन में नटखट स्वभाव के रहे हार्दिक और बड़े भाई क्रुणाल ने भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे की अकादमी में प्रशिक्षण लिया था. हार्दिक के पिता हिमांशु ने आज कहा, मैं मूल रूप से सूरत का रहने वाला हूं. लेकिन बड़ौदा में क्रिकेट से जुड़ी सुविधा बेहतर होने के कारण मैंने अपने परिवार के साथ वहां जाकर रहने का फैसला किया क्योंकि हम तब क्रुणाल के क्रिकेट के बारे में सोच रहे थे. क्रुणाल ने किरण मोरे की अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया और सात साल का हार्दिक उसके साथ अकादमी जाने लेगा.
किरण सर (मोरे) ने उससे अपनी अकादमी में आने के लिए कहा और मेरे बच्चों से कोचिंग का शुल्क भी नहीं लिया. कोच जितेंद्र ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा, एक बार अंडर-19 के एक मैच में हमारी टीम में केवल एक ही तेज गेंदबाज था क्योंकि बाकी सभी बड़ौदा के लिए रणजी और अंडर-23 टूर्नामेंट में खेल रहे थे. हार्दिक लेग स्पिनर था.
मैंने हार्दिक से नयी गेंद से चमक खत्म करने के लिए लक्ष्य बनाकर गेंद डालने को कहा. उन्होंने कहा, और हार्दिक ने एक पारी में पांच विकेट लिए. वह दूसरे छोर से गेंदबाजी कर रहे तेज गेंदबाज से भी ज्यादा असरदार साबित हुआ. सनत कुमार सर ने भी उस दौरान हर्दिक को देखा और उसे तेज गेंदबाजी ही करने की सलाह दी.
जितेंद्र ने कहा, उसी सत्र में हार्दिक को बड़ौदा के लिए टी20 में खेलने का मौका मिला जहां उसने शानदार प्रदर्शन किया और फिर कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
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