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क्रिकेट और चुनाव के मैदान में अपनी टीम की किस्मत बदलने वाले ‘कप्तान इमरान खान'', पढ़ें पूरा प्रोफाइल

Updated at : 26 Jul 2018 4:56 PM (IST)
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क्रिकेट और चुनाव के मैदान में अपनी टीम की किस्मत बदलने वाले ‘कप्तान इमरान खान'', पढ़ें पूरा प्रोफाइल

इस्लामाबाद : क्रिकेट खिलाड़ी से नेता बने इमरान खान ने एक बार कहा था , मुझे खुद में भरोसा था. मैंने कभी भी एक साधारण खिलाड़ी के रूप में खुद की कल्पना नहीं की. वे अपने इन शब्दों पर दो बार खरे उतरे – एक बार क्रिकेट के मैदान में और दूसरी बार अब राजनीति […]

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इस्लामाबाद : क्रिकेट खिलाड़ी से नेता बने इमरान खान ने एक बार कहा था , मुझे खुद में भरोसा था. मैंने कभी भी एक साधारण खिलाड़ी के रूप में खुद की कल्पना नहीं की. वे अपने इन शब्दों पर दो बार खरे उतरे – एक बार क्रिकेट के मैदान में और दूसरी बार अब राजनीति में.

पाकिस्तान के महानतम क्रिकेट खिलाड़ियों में शामिल 65 वर्षीय खान ने अपनी क्रिकेट टीम में एक नयी जान डालते हुए 1992 के विश्व कप की जीत में उसका नेतृत्व किया था और अब इस बार पाकिस्तान के आम चुनाव में अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक – ए – इंसाफ (पीटीआई) को शानदार जीत दिलाकर एक प्रेरणादायी नेता के रूप में भी खुद को साबित किया.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़े पश्तून जाति के नेता ने 1996 में पाकिस्तान तहरीक – ए – इंसाफ की शुरुआत की थी. पार्टी के नाम का मतलब है ‘ न्याय के लिए आंदोलन ‘. लेकिन इमरान देश की राजनीति में प्रभुत्व रखने वाली दो पार्टियों – पाकिस्तान मुस्लिम लीग – नवाज (पीएमएल – एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वर्चस्व के तोड़ने में संघर्ष करते रहे. देश में जब सैन्य शासन नहीं रहा है तब इन्हीं दोनों दलों की सरकारें रही हैं.

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खान सबसे पहले 2002 के चुनाव में संसद के सदस्य बने. वह 2013 के चुनाव में दोबारा नेशनल असेंबली (संसद का निचला सदन) के लिए निर्वाचित हुए. तब पीटीआई लोकप्रिय मतों के लिहाज से दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. चुनाव के एक साल बाद , मई 2014 में खान ने चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल – एन के पक्ष में धांधली किए जाने का आरोप लगाया था.

अगस्त , 2014 में खान ने शरीफ के इस्तीफे और चुनाव में कथित धांधली की जांच की मांग करते हुए अपने समर्थकों के साथ लाहौर से इस्लामाबाद के बीच एक रैली निकाली. एक महीने के भीतर ही खान ने पाकिस्तानी मूल के कनाडाई मौलवी ताहिर – उल – कादरी के साथ गठजोड़ किया और दोनों ने शरीफ सरकार बर्खास्त करने की मांग पर जोर दिया. दोनों के बीच हुए समझौते के बाद शुरू हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन का अंत कथित चुनाव धांधली की जांच के लिए शरीफ सरकार के न्यायिक आयोग के गठन के बाद खत्म हुए.

2018 के चुनाव के अपने प्रचार अभियान के दौरान खान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने , गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू करने , स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा में सुधार करने और देश को एक इस्लामी कल्याणकारी राष्ट्र में बदलने का वादा किया. समझा जाता है कि खान को शक्तिशाली सेना का समर्थन हासिल है. उनका मानना है कि क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए ‘सबसे व्यवहारिक’ नीति कश्मीर मुद्दे सहित तमाम विषयों पर भारत के साथ सहयोग करना है.

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पीटीआई ने देश के सामने मौजूद गंभीर आर्थिक एवं प्रशासनिक समस्याओं से निपटने के लिए 100 दिन की एक योजना तैयार की है. विदेश नीति एवं राष्ट्रीय रक्षा के मोर्चे पर खान की पार्टी ने अपने घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के मानदंडों के अनुरूप कश्मीर मुद्दे के हल की दिशा में एक योजना पर काम करने का वादा किया.

आतंकवाद से लड़ने के मुद्दे पर पार्टी ने आपराधिक न्याय तंत्र में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने का वादा किया. घोषणापत्र में कहा गया कि पार्टी ‘सशस्त्र बलों सहित पाकिस्तान की जमीं या लोगों का इस्तेमाल किसी भी दूसरे देश की अपनी राजनीतिक विचारधारा या आधिपत्य को बढ़ावा देने के लिए , आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए या किसी भी दूसरे देश को अस्थिर करने के लिए नहीं होने देगी.

पीटीआई की वेबसाइट पर डाले गए खान के प्रोफाइल में कहा गया है कि एक नेता के रूप में खान की दृष्टि एक स्वतंत्र एवं ईमानदार न्यायपालिका का निर्माण कर और सबको समान अवसर मुहैया कराने वाली एक योग्यता आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देकर पाकिस्तान को मानवीय मूल्यों पर आधारित एक न्याय संगत देश बनाने की है जो लोकतंत्र को बनाए रखे , मानवाधिकारों की हिफाजत करे और कानून का राज सुनिश्चत करे.

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एक समय खान को उनकी खूबसूरती के कारण पाकिस्तान का सबसे योग्य कुंवारा कहा जाता था. उन्होंने तीन बार शादी की. उनकी पिछली दो शादियों का तलाक के साथ अंत हुआ. उन्होंने पहली बार 1995 में एक ब्रिटिश अरबपति की बेटी जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी की जो नौ साल चली. खान और जेमिमा के दो बेटे हैं. खान की दूसरी शादी 2015 में हुई लेकिन टीवी प्रस्तोता रेहम खान के साथ उनकी यह शादी भी महज दस महीने बाद टूट गयी. इस साल की शुरूआत में खान ने तीसरी बार शादी की. उन्होंने इस बार अपनी ‘आध्यात्मिक मार्गदर्शक ‘ बुशरा मनेका से ब्याह रचाया.

खान का जन्म 1952 में पंजाब प्रांत के मियांवाली में हुआ. उनके पिता इकरामुल्ला खान नियाजी शनमनखेल समूह के पश्तून (पठान) नियाजी जाति के वंशज थे. वह पेशे से एक सिविल इंजीनियर थे. उनकी मां शौकत खानुन एक गृहिणी थीं. उनका परिवार लाहौर में बसा है लेकिन खान की आत्मजीवनी के मुताबिक वह खुद को अब भी पठान पृष्ठभूमि का मानते हैं.

खान ने लाहौर के एचिसन कॉलेज और इंग्लैंड के रॉयल ग्रामर स्कूल वोरसेस्टर से पढ़ाई की. 1972 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के केब्ले कॉलेज में दाखिला लिया जहां उन्होंने दर्शन , राजनीति और अर्थशास्त्र जैसे विषयों की पढ़ाई की.

1975 में उन्होंने स्नातक की डिग्री पायी. खान ने 1971 से 1992 के बीच पाकिस्तान के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला और 1992 में उनकी कप्तानी में पाकिस्तान की एकदिवसीय टीम ने देश के लिए अब तक का पहला और एकमात्र विश्व कप जीता.

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