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Samastipur News: 3 साल में सामने आये एक हजार से ज्यादा जमीनी विवाद के मामले

7 Dec, 2025 6:55 pm
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Samastipur News: 3 साल में सामने आये एक हजार से ज्यादा जमीनी विवाद के मामले

प्रखंड क्षेत्र में लगातार जमीनी विवाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं. हर दिन दो-चार मामले ग्राम कचहरी से लेकर थाना और कोर्ट तक पहुंच रहा है.

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Samastipur News:मोरवा : प्रखंड क्षेत्र में लगातार जमीनी विवाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं. हर दिन दो-चार मामले ग्राम कचहरी से लेकर थाना और कोर्ट तक पहुंच रहा है. विभाग के द्वारा जमीनी विवाद के निपटारे के लिए जनता दरबार का आयोजन किया गया लेकिन उसमें भी कोई विशेष फायदा नहीं हुआ. लगातार जमीनी विवाद के मामले थाना के कांड में तब्दील हो रहे हैं. बताया जाता है कि गत 3 साल में 1000 से ज्यादा जमीनी विवाद के मामले सामने आये. ग्राम कचहरी में हर शुक्रवार और शनिवार को जमीनी विवाद के मामले की सुनवाई होती है लेकिन अधिकार सीमित होने की वजह से मामला नहीं सुलझा पाता. यही हाल कमोबेश अंचल अधिकारी के जनता दरबार में भी देखा जा रहा है. सीओ के द्वारा मामले की सुनवाई नहीं होने की सूरत में इसे सक्षम न्यायालय को भेजा जा रहा है. इस तरह पुलिस और कोर्ट पर एक बार फिर जमीन विवाद के दबाव बढ़ते जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य शुरू होते ही जमीनी विवाद के मामले में काफी तेजी आई है. लोगों का कहना है कि फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों ने अपनी जमीन के अधिग्रहण के बदले में कागजात एकत्र किए जिससे पूरे मामले की कलई खुल गई जो मामला दशकों से दबा था वह सामने आ गया. इसी क्रम में यह भी पता चला कि खतियान और पर्चा में भी भारी गड़बड़ी है. लोगों कहना है कि खतियान बरकरार है और पूर्वज उसके जमीन बेच चुके हैं. ऐसे में लोग खतियान लेकर जमीन को ढूंढने के प्रयास कर रहे हैं. जिसके कारण जमाबंदीधारक और जमीन के मालिक से उनकी बहस हो रही है. मापी की प्रक्रिया भी काफी पेंचीदा होने की वजह से ससमय मामलों का निष्पादन नहीं हो पाता है. वहीं नक्शा, खतियान पर्चा, दस्तावेज, केवाला जैसे कागजात में भी विसंगति की वजह से जमीनी विवाद के मामले नहीं सुलझ रहे हैं. पेपर दुरुस्त नहीं होने की वजह से दाखिल खारिज में भी परेशानी होती है. जिसके कारण यह मामला और गंभीर हो जाता है. जनता दरबार का आयोजन पहले थाना स्तर पर होता था. कुछ पुलिस की भी तो कुछ कागज की सुनवाई से मामला सुलझ जाता था. लेकिन अब थाना के बदले में इस अंचल कार्यालय में कर दिया गया है. जिससे कि लोगों की परेशानी तो बढ़ी है. लेकिन मामले का निपटारा नहीं हो पा रहा है. इस बाबत सीओ आलोक रंजन के द्वारा बताया गया कि लोगों को संयम से काम लेना चाहिए. उचित कागजात उपलब्ध होने के बाद ही जमीन के वास्तविक हकीकत की जानकारी लेते हुए उस पर पहल करनी चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Ankur kumar

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By Ankur kumar

Ankur kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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