Vastu Tips: वास्तु शास्त्र भारतीय प्राचीन ज्योतिषीय विद्या का एक महत्वपूर्ण भाग है. इसमें घर की दिशाओं से लेकर घर में रखी हर एक वस्तु तक का उल्लेख किया गया है, जो घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करती हैं. ये प्रभाव शुभ और अशुभ दोनों हो सकते हैं. वास्तु शास्त्र में घर में किसी भी सामान को रखने से संबंधित कुछ नियम बताए गए हैं. इन नियमों का पालन करने से घर में सुख-शांति का माहौल बना रहता है. कई लोगों को इन नियमों की सही जानकारी नहीं होती, जिस वजह से वे अनजाने में कई गलतियां कर बैठते हैं, जिसका घर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. आज हम इस आर्टिकल में वॉटर प्यूरीफायर से जुड़े कुछ जरूरी वास्तु नियमों के बारे में बात करेंगे.
वॉटर प्यूरीफायर किस दिशा में लगाएं?
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, बिजली से चलने वाले सभी उपकरणों को दक्षिण या उत्तर दिशा में रखना चाहिए. दक्षिण दिशा अग्नि तत्व की दिशा मानी जाती है, जबकि उत्तर दिशा जल तत्व की होती है. कहा जाता है कि सामान्यतः दक्षिण दिशा में जल तत्व से जुड़ी चीजें नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इससे घर में तनाव बढ़ता है. लेकिन वॉटर प्यूरीफायर बिजली से भी संबंधित होता है, इसलिए इसे दक्षिण दिशा में लगाया जा सकता है.
- वहीं, उत्तर दिशा जल तत्व की दिशा होने के कारण इस दिशा में वॉटर प्यूरीफायर लगाना सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है. इससे घर में शांति बनी रहती है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
वॉटर प्यूरीफायर किस दिशा में नहीं लगाना चाहिए?
वास्तु के अनुसार, वॉटर प्यूरीफायर को कभी भी किचन की दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं लगाना चाहिए. इसे शुभ नहीं माना जाता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से घर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
वॉटर प्यूरीफायर से पानी पीते समय रखें इन बातों का ध्यान
कहा जाता है कि कभी भी फिल्टर से सीधे गिलास में पानी लेकर नहीं पीना चाहिए. इसे शुभ नहीं माना जाता है. पानी का सेवन करने से पहले फिल्टर के पानी को किसी पात्र में निकालकर कुछ समय के लिए रख दें. जब पानी पूरी तरह स्थिर हो जाए, तब गिलास में डालकर पिएं. पानी की स्थिरता मानसिक स्थिरता पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और मन को शांत करती है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

