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Vastu For Roti: रोटी का आकार में छिपा है वास्तु दोष, जानें रोटियों का गोल होना क्यों जरूरी

Updated at : 20 Jan 2026 1:58 PM (IST)
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Vastu For Roti

रोटी का आकार में छिपा है वास्तु दोष

Vastu For Roti: वास्तु शास्त्र में गोल रोटी को सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. जानिए रोटी के आकार और मन की स्थिति का जीवन पर प्रभाव.

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Vastu For Roti: भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल शरीर की आवश्यकता नहीं, बल्कि जीवन की ऊर्जा और चेतना का स्रोत माना गया है. हमारे शास्त्रों में भोजन से जुड़ी हर प्रक्रिया—चाहे वह पकाने का तरीका हो या परोसने की विधि—का विशेष महत्व बताया गया है. भोजन का स्वरूप, उसका स्वाद और उसकी बनावट व्यक्ति के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है. इसी कारण वास्तु शास्त्र में भोजन से जुड़ी कई बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है.

वास्तु शास्त्र में रोटी के आकार का महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार रोटी का आकार भी जीवन की ऊर्जा से जुड़ा होता है. रोटी को गोल आकार में बनाना शुभ माना गया है. गोल आकार पूर्णता और निरंतरता का प्रतीक है, जो जीवन में स्थिरता और संतुलन लाता है. माना जाता है कि अनियमित या टूटी-फूटी रोटी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती है.

सूर्य और चंद्रमा के संतुलन का प्रतीक

गोल रोटी को सूर्य और चंद्रमा की ऊर्जा से जोड़ा जाता है. सूर्य सक्रियता, शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है, जबकि चंद्रमा शांति, भावनाओं और मन का प्रतिनिधित्व करता है. गोल रोटी इन दोनों ऊर्जाओं के बीच संतुलन बनाए रखने का संकेत देती है. इसे ग्रहण करने से व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा बनी रहती है.

धन, शांति और समृद्धि का संकेत

वास्तु मान्यताओं के अनुसार गोल रोटी धन, सुख और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है. गोल आकार में कोई नुकीले कोने नहीं होते, जिससे नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश की संभावना कम होती है. यही कारण है कि परंपरागत रूप से कई शुभ वस्तुएं गोल आकार में बनाई जाती हैं.

रोटी बनाते समय मन की स्थिति

केवल रोटी का आकार ही नहीं, बल्कि उसे बनाते समय व्यक्ति की मानसिक अवस्था भी महत्वपूर्ण होती है. शांत, सकारात्मक और प्रेमपूर्ण मन से बनाई गई रोटी घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखती है. क्रोध या तनाव की स्थिति में बना भोजन नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.

इस प्रकार रोटी का गोल आकार केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र और मानसिक संतुलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है. इसे अपनाकर न केवल स्वास्थ्य लाभ मिलता है, बल्कि घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है.

ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा | 20+ वर्षों का अनुभव
ग्रह शांति, विवाह, धन और करियर विशेषज्ञ

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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