Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत में शिवजी के अलावा किनकी पूजा करने से व्रत होता है पूरा?
Published by : Shaurya Punj Updated At : 28 Jan 2026 11:11 AM
क्या केवल शिवजी की पूजा से प्रदोष व्रत पूर्ण होता है?
Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत में केवल भगवान शिव की ही नहीं, बल्कि माता पार्वती, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से व्रत का फल पूरा मिलता है. यह व्रत खासतौर पर वैवाहिक सुख, धन और समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है.
Shukra Pradosh Vrat 2026: आने वाले 30 जनवरी 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत है. ये माघ महीने का दूसरा प्रदोष व्रत होगा. अगर आप शुक्र प्रदोष व्रत रखते हैं और यह जानना चाहते हैं कि भगवान शिव के अलावा किन देवताओं की पूजा करनी चाहिए, तो यह जानकारी आपके लिए है. शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, प्रदोष व्रत में केवल शिव पूजा ही नहीं, बल्कि कुछ विशेष देवताओं की आराधना करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है.
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत हर महीने त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. जब यह व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तब इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार
शुक्र प्रदोष व्रत से वैवाहिक सुख, धन, और भौतिक समृद्धि में वृद्धि होती है. यह व्रत विशेष रूप से गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना गया है.
शुक्र प्रदोष व्रत में किनकी पूजा करें?
- भगवान शिव
- माता पार्वती
- भगवान गणेश
- भगवान विष्णु
- माता लक्ष्मी
- नंदी महाराज
भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा क्यों जरूरी है?
शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, प्रदोष काल में शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है.
शुक्र प्रदोष व्रत पर माता पार्वती की पूजा से लाभ
- वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य
- परिवार में सुख-शांति
- दांपत्य जीवन की समस्याओं में कमी
- विशेषकर महिलाओं के लिए यह पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है.
शुक्र प्रदोष व्रत पर भगवान गणेश की पूजा का महत्व
प्रदोष व्रत की पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण आवश्यक माना गया है.
क्यों करें गणेश पूजा
- पूजा में आने वाली बाधाओं का नाश
- मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायता
- व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है
- शुक्र प्रदोष व्रत पूजा की सरल विधि
- गणेश जी को दूर्वा और लड्डू अर्पित करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें.
शुक्र प्रदोष व्रत में भगवान विष्णु की पूजा क्यों करें?
शुक्रवार का संबंध भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से भी माना जाता है. इसी कारण शुक्र प्रदोष व्रत में विष्णु पूजा का विशेष महत्व है.
शुक्र प्रदोष व्रत में माता लक्ष्मी की पूजा से क्या लाभ मिलता है?
- आर्थिक स्थिरता
- जीवन में संतुलन
- कर्मों का शुद्धिकरण
शास्त्रों के अनुसार, शिव और विष्णु एक-दूसरे के पूरक माने गए हैं, इसलिए दोनों की पूजा व्रत को और प्रभावशाली बनाती है.
माता लक्ष्मी की पूजा से क्या लाभ मिलता है?
- धन संबंधी समस्याओं में कमी
- घर में सकारात्मक ऊर्जा
- अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण
माता लक्ष्मी को कमल पुष्प और सफेद मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है.
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन नंदी महाराज की पूजा क्यों न भूलें?
- नंदी महाराज को भगवान शिव का परम भक्त और द्वारपाल माना जाता है.
- शुक्र प्रदोष व्रत को लेकर मान्यता
- नंदी की पूजा से शिव तक प्रार्थना शीघ्र पहुंचती है
- मनोकामना पूर्ति में सहायता मिलती है
- शिवलिंग के पास नंदी की ओर मुख करके प्रार्थना करना परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है.
शुक्र प्रदोष व्रत केवल शिव पूजा तक सीमित नहीं है. शिव परिवार और विष्णु-लक्ष्मी की पूजा इस व्रत को पूर्ण बनाती है और जीवन के धन, विवाह, सुख और शांति से जुड़े पक्षों को मजबूत करती है. सही विधि, श्रद्धा और संयम के साथ की गई पूजा से ही व्रत का वास्तविक फल प्राप्त होता है.
शुक्र प्रदोष व्रत रखने से क्या होता है?
यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में मधुरता, धन में वृद्धि और परिवार में शांति के लिए रखा जाता है. श्रद्धा और सही विधि से पूजा करने पर इसका शुभ फल मिलता है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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