क्या आप जानते हैं शिवलिंग पर टपकती मटकी का नाम?

Published by : Shaurya Punj Updated At : 11 Feb 2026 8:58 AM

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शिवलिंग पर मटकी क्या कहलाती है

Shivling water pot: मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर बंधी मटकी को गलंतिका कहते हैं. जानें इसे कब और क्यों बांधा जाता है, वैशाख मास से जुड़ी मान्यताएं और इसका धार्मिक महत्व.

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Shivling water pot: अक्सर मंदिरों में हम देखते हैं कि शिवलिंग के ऊपर एक पानी से भरी मटकी बंधी होती है, जिससे बूंद-बूंद जल लगातार शिवलिंग पर गिरता रहता है. यह दृश्य खासतौर पर गर्मियों के दिनों में अधिक देखने को मिलता है. बहुत से लोगों के मन में सवाल आता है कि इस मटकी को क्या कहते हैं और इसे क्यों बांधा जाता है.

क्या कहते हैं इस मटकी को?

शिवलिंग के ऊपर बांधी जाने वाली इस पानी की मटकी को “गलंतिका” कहा जाता है. गलंतिका का अर्थ है – जल पिलाने वाला बर्तन या करवा.

इस मटकी के नीचे एक छोटा सा छेद किया जाता है, जिससे पानी धीरे-धीरे टपकता रहता है. यह मिट्टी, तांबे या अन्य धातु की भी हो सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य है कि जल की धारा लगातार शिवलिंग पर गिरती रहे. इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि मटकी का पानी पूरी तरह खत्म न होने पाए.

वैशाख मास में ही क्यों बांधी जाती है गलंतिका?

इन दिनों वैशाख मास चलता है, जो आमतौर पर अप्रैल-मई की तेज गर्मी में आता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में शिवलिंग पर गलंतिका बांधने की विशेष परंपरा है. गर्मी के कारण वातावरण का तापमान अधिक होता है, इसलिए शिवलिंग पर निरंतर जल अर्पित किया जाता है ताकि भगवान शिव को शीतलता मिले. यही कारण है कि इस महीने मंदिरों में यह परंपरा अधिक दिखाई देती है.

इस परंपरा से जुड़ी पौराणिक कथा

धर्म ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय सबसे पहले कालकूट नाम का विष निकला था. यह विष इतना भयंकर था कि पूरे संसार में हाहाकार मच गया. तब भगवान शिव ने उस विष को अपने गले में धारण कर लिया. मान्यता है कि उस विष के कारण शिवजी के शरीर में अत्यधिक ताप उत्पन्न हुआ. इसी ताप को शांत करने के लिए उन पर जल चढ़ाया गया. तभी से शिवलिंग पर जल अर्पित करने और गर्मी के दिनों में गलंतिका बांधने की परंपरा शुरू हुई.

जल चढ़ाने की परंपरा का महत्व

शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाने की परंपरा भी इसी कथा से जुड़ी मानी जाती है. माना जाता है कि जल अर्पित करने से शिवजी को शांति और ठंडक मिलती है. गर्मी के मौसम में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए वैशाख मास में गलंतिका बांधकर लगातार जल अर्पण किया जाता है.

किन बातों का रखें ध्यान?

वैशाख मास में लगभग हर शिव मंदिर में गलंतिका बांधी जाती है. इस दौरान ध्यान रखें कि मटकी में डाला जाने वाला जल पूरी तरह शुद्ध हो. क्योंकि यह जल सीधे शिवलिंग पर गिरता है, इसलिए उसकी पवित्रता बहुत जरूरी मानी जाती है. साफ-सफाई और श्रद्धा के साथ की गई पूजा ही फलदायी मानी जाती है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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