सावन आते ही सज जाएगा बाबा गरीबनाथ धाम, जानिए क्यों कहते हैं इसे बिहार का देवघर

बाबा गरीबनाथ मंदिर, मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ धाम बिहार के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है, जिसे श्रद्धालु "बिहार का देवघर" भी कहते हैं. सावन माह शुरू होते ही यहां आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है. दूर-दूर से आने वाले कांवड़िये पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर कई किलोमीटर की यात्रा तय कर बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करते हैं. मान्यता है कि यहां विराजमान स्वयंभू शिवलिंग पर सच्चे मन से जल अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
Baba Garibnath Mandir: सावन माह का आरंभ 30 जुलाई 2026 से होने वाला है और इसके साथ ही बिहार के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ धाम में आस्था का महासंगम देखने को मिलेगा. हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है. सावन की सोमवारी पर देर रात से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाएंगी. बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठेगा. कांवड़िये पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर हाजीपुर के रास्ते मुजफ्फरपुर पहुंचेंगे और बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करेंगे. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन तथा मंदिर समिति विशेष व्यवस्थाएं करेगी.
बिहार का देवघर कहलाता है बाबा गरीबनाथ धाम
मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ धाम बिहार के सबसे प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में गिना जाता है. इसे श्रद्धालु प्रेम से "बिहार का देवघर" भी कहते हैं. सावन के दौरान यहां लाखों भक्त भगवान शिव को जल अर्पित करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा गरीबनाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं, इसलिए यहां आने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
ऐसे हुई थी स्वयंभू शिवलिंग की खोज
मंदिर का इतिहास करीब दो सौ वर्ष पुराना है. वर्ष 1810 में जिस स्थान पर आज मंदिर स्थित है, वहां घना जंगल हुआ करता था. जंगल की सफाई के दौरान जब एक बरगद के पेड़ को काटा गया तो उसमें से रक्त निकलने लगा. इसके बाद खुदाई में एक शिवलिंग प्राप्त हुआ. इस चमत्कारी घटना के बाद वर्ष 1812 में यहां एक छोटा मंदिर बनाया गया. बाद में 1842 में चाचान परिवार ने भव्य मंदिर का निर्माण कराया.
क्यों पड़ा बाबा गरीबनाथ नाम?
बाबा गरीबनाथ नाम के पीछे भी एक रोचक कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि एक गरीब भक्त मुंशी जी अपनी बेटी की शादी के लिए आर्थिक संकट से जूझ रहे थे. तब भगवान शिव ने उनकी सहायता की. इस चमत्कार से भावुक होकर मुंशी जी "गरीबों के नाथ" का जयघोष करते हुए मंदिर पहुंचे. तभी से भगवान शिव यहां बाबा गरीबनाथ के नाम से प्रसिद्ध हो गए.
कॉरिडोर बनने से बदलेगी मंदिर की तस्वीर
राज्य सरकार बाबा गरीबनाथ धाम को भव्य धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर यहां बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर विकसित किया जाएगा. छाता बाजार, मक्खन साह चौक, प्रभात सिनेमा चौक और मंदिर के समीप भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे. इसके अलावा मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, साहू पोखर में ग्लास ब्रिज और श्रद्धालुओं के लिए विशेष पैदल मार्ग का निर्माण भी प्रस्तावित है. इन योजनाओं के पूरा होने के बाद बाबा गरीबनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में और अधिक पहचान हासिल करेगा.
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By Shaurya Punj
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