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Sankashti Chaturthi 2026: पढ़ा हुआ नहीं रहता याद, बार-बार भटकता है मन? द्विजप्रिय चतुर्थी पर करें ये सरल उपाय

Updated at : 31 Jan 2026 10:25 AM (IST)
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Sankashti Chaturthi 2026 Remedies

संकष्टी चतुर्थी उपाय

Sankashti Chaturthi 2026: यदि आपको पढ़ी हुई चीज़ें याद नहीं रहती हैं या पढ़ते समय ध्यान बार-बार भटकता है, तो द्विजप्रिय चतुर्थी का दिन इस समस्या के निवारण के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस आर्टिकल में कुछ सरल उपायों की चर्चा की गई है, जो पढ़ाई-लिखाई से संबंधित बाधाओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं.

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Sankashti Chaturthi 2026: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है. हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और विघ्नहर्ता अर्थात् बाधाओं को दूर करने वाला देवता माना गया है. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन घरों और मंदिरों में धूमधाम से भगवान गणेश की पूजा की जाती है. यह पर्व विद्यार्थियों के लिए बेहद खास माना जाता है.कहते हैं कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से एकाग्रता बढ़ती है, बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है और शिक्षा व कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त होती है.

संकष्टी चतुर्थी के दिन कौन-से उपाय करना शुभ होता है?

हरे दूर्वा का अर्पण: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा (घास) की गांठें अर्पित करें. हिंदू धर्म में दूर्वा को ‘अमृत’ के समान माना गया है. मान्यता है कि इसके अर्पण से मानसिक शांति मिलती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है.

सरस्वती-गणेश पूजन: शिक्षा में सफलता के लिए इस दिन अपनी किताबें या पेन भगवान गणेश के चरणों में रखें. इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें.

दान: इस दिन गरीब बच्चों को शिक्षा से जुड़ी सामग्री जैसे पेन, पेंसिल या नोटबुक का दान करना शुभ माना जाता है. इससे बुध ग्रह मजबूत होता है, ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है तथा तर्कशक्ति बढ़ती है.

सफेद वस्त्र का प्रयोग: द्विजप्रिय चतुर्थी के दिन पूजा करते समय सफेद या पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है. इससे मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है.

मंत्र उच्चारण

इस दिन पूजा के समय भगवान गणेश के निम्न मंत्रों का जाप करें—

  • ॐ गं गणपतये नमः.
  • ॐ नमो हेरम्ब मद मोहितं मम संकटान् निवारय-निवारय स्वाहा.
  • “विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम्.
    पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम्॥”

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व

‘द्विजप्रिय’ का अर्थ है- जो ब्राह्मणों या विद्वानों के प्रिय हों. इस दिन भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से छठे स्वरूप की पूजा की जाती है. इस स्वरूप के चार हाथ होते हैं और यह ज्ञान का प्रतीक माने जाते हैं. मान्यता है कि इस स्वरूप की उपासना से ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि का विकास होता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं.

यह भी पढ़ें: Sankashti Chaturthi 2026: कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, जानें सही तिथि, पूजा विधि और मंत्र

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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