Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में पितरों को जल अर्पित करते समय इन चीजों का होना जरूरी, नोट करें जल अर्पण का सही समय और सामग्री

Published by : Neha Kumari Updated At : 08 Sep 2025 2:08 PM

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Pitru Paksha 2025

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है. पितृ पक्ष के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. इस दौरान पितरों को जल अर्पित करने का विशेष महत्व है. ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. जल अर्पित करते समय कुछ विशेष सामग्री का होना आवश्यक है. आइए जानते हैं जरूरी नियमों और सामग्री के बारे में विस्तार से.

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Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है. पितृ पक्ष हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक मनाया जाता है. इस दौरान लोग अपने दिवंगत पितरों को याद कर उनकी आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं.

पितरों के तर्पण के लिए किए गए कर्मकांडों में से एक है पितरों को जल अर्पित करना. कहा जाता है कि पितृपक्ष के समय पूर्वजों को जल अर्पित करने से विशेष कृपा और आशीर्वाद मिलता है. जल अर्पण के लिए कुछ विशेष सामग्री का होना आवश्यक है. आइए जानते हैं पितृ पक्ष में जल अर्पण के दौरान आवश्यक चीजों और नियमों के बारे में:

जल अर्पण के लिए जरूरी चीजें और नियम

तांबे का लोटा: पितरों को जल अर्पित करने के लिए तांबे के लोटे का प्रयोग सबसे उत्तम माना जाता है. हिंदू धर्म में तांबे के लोटे को पवित्र और शुद्ध माना जाता है. कहा जाता है कि तांबे का लोटा जल को ऊर्जा और सकारात्मकता प्रदान करता है.

जल: लोटे में साफ जल भरें.

काले तिल: जल में काले तिल डालना जरूरी है. माना जाता है कि यह जल को पवित्र करता है. जल में तिल डालने के बाद लोटे को सिर के ऊपर उठाकर मंत्रों का उच्चारण करते हुए जल का अर्पण करना चाहिए.

धूप और दिया: मान्यता है कि जल अर्पण के दौरान धूप या दिया जलाना आवश्यक होता है. इससे वातावरण पवित्र होता है.

कुश (घास): जल अर्पित करने के लिए कुश का होना आवश्यक है.

दक्षिण दिशा की ओर मुख: तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करना चाहिए.

मंत्र जाप: जल अर्पित करते समय “ॐ पितृदेवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करना शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इस मंत्र का उच्चारण करने से पितृ दोष समाप्त होता है.

जल अर्पित करने का शुभ समय  

पितृ पक्ष में जल अर्पित करने का सबसे अच्छा समय कुतुप वेला माना जाता है. यह समय लगभग दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहता है. इसी समय तर्पण करने से पितरों को प्रसन्नता मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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