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Papankusha Ekadashi Katha: पापांकुशा एकादशी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान विष्णु की कृपा से कटेंगे सभी पाप

Updated at : 02 Oct 2025 12:32 PM (IST)
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Papankusha Ekadashi Vrat Katha

Papankusha Ekadashi Vrat Katha

Papankusha Ekadashi Katha: इस साल 3 अक्टूबर 2025 को पापांकुशा एकादशी का व्रत है. इस दिन भक्त विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं. पापांकुशा एकादशी का व्रत विशेष रूप से पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है.

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Papankusha Ekadashi Katha: एकादशी व्रत करने वाले के लिए व्रत कथा का पाठ करना अनिवार्य है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस कथा का भक्ति भाव से पाठ करता है, उसे मृत्यु के बाद यम की यातनाओं का सामना नहीं करना पड़ता. इस व्रत से जीवन में पुण्य की वृद्धि होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है.आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी की पूरी व्रत कथा.

पापांकुशा एकादशी व्रत की कहानी

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से अश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी के महत्व और उसका पालन करने की विधि जानने की इच्छा व्यक्त की. तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि यह व्रत पापांकुशा एकादशी कहलाता है.

पापांकुशा एकादशी व्रत की पूरी कथा

विंध्याचल पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था. वह बहुत ही क्रूर और निर्दयी था. उसका जीवन हिंसा, चोरी और बुरे संगत में ही बीता. एक दिन उसे जंगल में तपस्या कर रहे महर्षि अंगिरा मिले. बहेलिए ने उनसे कहा, “हे महर्षि, मैंने जीवन भर पाप किए हैं. अनेक मासूम जीवों की हत्या की है. अब मुझे नर्क ही जाना पड़ेगा. कृपया कोई उपाय बताइए जिससे मेरे पाप नष्ट हों और मुझे मुक्ति मिले.” महर्षि अंगिरा ने उसे आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. बहेलिए ने महर्षि की बात मानी और इस एकादशी का व्रत विधिपूर्वक रखा. उन्होंने भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा की. भगवान विष्णु की कृपा से बहेलिए के सारे पाप समाप्त हो गए. जब यमदूत उसे यमलोक ले जाने आए, तो उन्होंने देखा कि बहेलिए के पाप पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं. यमदूत खाली हाथ लौट गए और बहेलिया को भगवान विष्णु की दया से वैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई.

पापांकुशा एकादशी पूजा विधि

पापांकुशा एकादशी आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है. इस दिन व्रत रखने वाले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. सबसे पहले पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें और फिर उन्हें पीले रंग के फूल जैसे गेंदे, अपराजिता और हरसिंगार अर्पित करें. तुलसी के पत्ते और धूप, दीप, चंदन तथा नैवेद्य चढ़ाना व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

पापांकुशा एकादशी महत्त्व

पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना अनिवार्य है. इस कथा को सुनने और पढ़ने से व्यक्ति के सारे पाप समाप्त होते हैं और उसे यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही, व्रत रखने और दान देने से घर में सुख-समृद्धि और परिवार में शांति बनी रहती है. पापांकुशा एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति के पूर्वजन्म के पाप भी मिट जाते हैं और उसे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है. इस व्रत का पालन जीवन में धार्मिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ देता है.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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JayshreeAnand

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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