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Masik Shivratri 2025: आज इन दिव्य योग में मनाई जाएगी मासिक शिवरात्रि, जानिए क्यों है ये दिन खास

18 Nov, 2025 3:44 am
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Masik Shivrtari 2025

मासिक शिवरात्रि क्यों है खास?

Masik Shivratri 2025: हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का बेहद पवित्र दिन माना जाता है. इस रात्रि में शिव-शक्ति की ऊर्जा अत्यधिक प्रबल होती है और भक्तों की मनोकामनाएं तेजी से पूर्ण होती हैं. आइए जानते हैं इसका महत्व, मुहूर्त और पूजा-विधि.

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Masik Shivratri 2025: नवंबर महीने की मासिक शिवरात्रि आज है. आज दो शुभ योग है, जिसके कारण यह तिथि भक्तों के लिए बेहद विशेष मानी जा रही है. नवंबर 2025 में यह व्रत 18 नवंबर दिन मंगलवार को रखा जाएगा. इस दिन शिवभक्त विशेष पूजा, उपवास और रात्रि जागरण के माध्यम से महादेव की कृपा प्राप्त करते हैं. शास्त्रों में इसे मनोकामना पूर्ण करने और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने वाला अत्यंत शुभ पर्व बताया गया है.

धार्मिक महत्व

माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि वह पावन रात्रि है जब शिव और शक्ति का विशेष योग होता है. इस दिन की गई पूजा दांपत्य जीवन में सामंजस्य लाती है और अविवाहितों को अच्छा जीवनसाथी मिलने में सहायक मानी गई है.

मनोकामनाएं पूरी करते हैं भगवान शिव

शिव पुराण के अनुसार जो भक्त पूरे भक्तिभाव से व्रत रखते हैं, भगवान शिव उनकी कठिन परिस्थितियों को दूर करते हैं और जीवन की बाधाओं को समाप्त करते हैं. यह व्रत इच्छा-पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी कहा गया है.

व्रत से मिलती है पापों से मुक्ति

इस दिन उपवास व शिवलिंग अभिषेक करने से मन के दोष दूर होते हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है. कहा जाता है कि यह व्रत व्यक्ति को पुराने कर्म बंधनों और मानसिक बोझ से मुक्त करता है.

सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति

  • शिवभक्त इस अवसर पर अच्छे स्वास्थ्य, आर्थिक मजबूती और परिवार की उन्नति के लिए पूजा करते हैं.
  • शास्त्रों में माना गया है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत जीवन में स्थिरता और सौभाग्य बढ़ाता है.

विशेष योग से बढ़ रही है तिथि की शुभता

इस वर्ष नवंबर की मासिक शिवरात्रि पर आयुष्मान और सौभाग्य योग बन रहे हैं, जिसके कारण इस दिन पूजा का पुण्यफल और भी अधिक प्रभावी माना जा रहा है.

शुभ मुहूर्त

  • तिथि प्रारंभ: 18 नवंबर 2025, सुबह 07:12 बजे
  • तिथि समाप्त: 19 नवंबर 2025, सुबह 09:43 बजे
  • निशिता काल पूजा: 18 नवंबर की रात 11:40 से 12:33 बजे तक
  • रात्रि का यह समय शिव उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

कैसे करें मासिक शिवरात्रि की पूजा?

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा स्थान को साफ करके शिवलिंग तैयार करें.
  • शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) का अभिषेक करें.
  • महादेव को बेलपत्र, चंदन, धूप, दीप, फूल, भांग और धतूरा चढ़ाएं.
  • रात्रि में, खासकर निशिता काल में, शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा पढ़ें.
  • अंत में आरती कर पूजा समाप्त करें और शांत मन से ध्यान करें.
  • ये भी पढ़ें: Daily Puja Mistakes: पूजा में ये 9 गलतियां रोक सकती है घर की बरकत, जानिए सही नियम
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JayshreeAnand

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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