महावीर मंदिर की अनोखी परंपरा: जहां दो हनुमान विग्रहों की एक साथ होती है पूजा

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महावीर मंदिर पटना

महावीर मंदिर पटना

Mahavir Mandir Patna: पटना जंक्शन के पास स्थित महावीर मंदिर देश के प्रमुख हनुमान मंदिरों में गिना जाता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दो हनुमान विग्रहों की एक साथ विधिवत पूजा की जाती है. बख्तियार खिलजी के आक्रमण, ब्रिटिश काल में पुनरुद्धार और दोनों प्रतिमाओं की स्थापना से जुड़ा इतिहास इसे विशेष बनाता है. जानिए महावीर मंदिर की अनूठी परंपरा, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि.

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Mahavir Mandir Patna: बिहार की राजधानी पटना में स्थित महावीर मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक है. पटना जंक्शन के समीप स्थित यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि अपनी अनूठी परंपरा के कारण भी विशेष पहचान रखता है. भारत में सामान्यतः किसी मंदिर में एक ही विग्रह की पूजा की जाती है, लेकिन महावीर मंदिर ऐसा दुर्लभ धार्मिक स्थल है जहां दो हनुमान विग्रहों की विधिवत पूजा की जाती है. यही विशेषता इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है.

बख्तियार खिलजी के आक्रमण से जुड़ा इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार, 12वीं-13वीं शताब्दी के दौरान तुर्क शासक इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने बिहार के अनेक धार्मिक और शैक्षणिक केंद्रों को नष्ट किया. नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे विश्वविख्यात संस्थानों के साथ कई मंदिर भी उसके आक्रमण का शिकार बने. कहा जाता है कि वर्तमान पटना स्टेशन क्षेत्र में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर को भी ध्वस्त कर दिया गया और वहां स्थापित हनुमान प्रतिमा को पास के नाले में फेंक दिया गया.

श्रद्धा ने बचाई परंपरा

मंदिर के विनाश के बाद स्थानीय हिन्दू समाज ने हार नहीं मानी. श्रद्धालुओं ने एक व्यायामशाला में नई हनुमान प्रतिमा स्थापित कर नियमित पूजा-अर्चना शुरू की. यह स्थान धीरे-धीरे लोगों की आस्था का केंद्र बन गया और वर्षों तक इसी प्रतिमा की पूजा होती रही.

कैसे शुरू हुई दो विग्रहों की पूजा?

वर्ष 1875 में पटना रेलवे स्टेशन के निर्माण के दौरान खुदाई में वह प्राचीन हनुमान प्रतिमा प्राप्त हुई, जिसे आक्रमण के समय नाले में फेंका गया था. ब्रिटिश अधिकारियों ने इस प्रतिमा को पहले से स्थापित प्रतिमा के समीप रखवा दिया.

धर्माचार्यों और स्थानीय बुजुर्गों के सामने एक विशेष परिस्थिति उत्पन्न हुई. दोनों प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी थी और दोनों से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई थी. विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि दोनों विग्रहों की एक साथ पूजा की जाएगी. 1880 की हनुमान जयंती पर दोनों प्रतिमाओं को विधिवत स्थापित कर पूजा प्रारंभ हुई, जो आज भी जारी है.

महावीर मंदिर का वर्तमान महत्व

महावीर मंदिर आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. माना जाता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना और पूजा भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करती है. दो हनुमान विग्रहों की पूजा की यह परंपरा भारतीय धार्मिक इतिहास में एक अद्वितीय उदाहरण है, जो आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक संरक्षण की प्रेरक कहानी को जीवंत रखती है.


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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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