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मिथिला में आज भी सभी लड़कियों की एक जैसी चाहत, महादेव की तरह मिले मेरा पति

Updated at : 15 Feb 2026 1:49 PM (IST)
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Mithila Girls Mahadev Like Husband Wish

मिथिला की परंपरा

Mahashivratri 2026: महादेव सा पति आज भी सबसे बडी चाहत है. मिथिला में आठ वर्ष उपरांत लडकियां गौरी पूजने लगती हैं. छोटी सी कटोरी में एक सुपारी पर सिंदूर डालती हुई लडकियां घर-घर आपको दिख जायेगी. सदियों से यह परंपरा चली आ रही है. परिवार और दांपत्य को सुखमय बनाने के लिए महादेव को समझना बेहद जरुरी है.

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Mahashivratri 2026: मिथिला में एक दामाद के रूप में महादेव का स्थान सदा सर्वोपरी रहा है. 18वीं सदी में राम जरुर मिथिला में प्रचारित किये गये, लेकिन राम गीतों तक ही आज भी सिमित है. लोकाचार या व्यवहार में महादेव ही मिथिला में समाहित हैं. आज भी दूल्हे के आगे आगे शंकर चलता है. लडकी के आंगन में शंकर के आने की सूचना ही विवाह की शुरुआत मानी जाती है.

कोहबर में शिव-गौरी की तस्वीर उकेरी जाती है

कुमुद सिंह ने बताया कि कोहबर में शिव-गौरी की तस्वीर उकेरी जाती है. कोहबर में गौरी पूजा जाता है. और रहे भी क्यों ना, गौरी को वो सारा सुख मिला, जो एक महिला की चाहत होती है. गौरी के जीवन में दुख जैसा शब्द महादेव ने कभी आने ही नहीं दिया. महादेव ने पति के हर दायित्व को ऐसे निभाया कि वो पति के मानक बन गये. गौरी से ताकतवर पत्नी दूसरी नहीं हुई, जिस महादेव के गुस्से से तीनों लोक कांप जाता है, वो महादेव महज गौरी के रूठ जाने से परेशान हो जाते हैं. यह दापत्य का स्नेह है, जो गौरी को मिला.

मिथिला में वर का मतलब महादेव

महादेव से अधिक नारी सम्मान देने वाला दूसरा पति नहीं है. महादेव से अधिक नारी सशक्तिकरण किसी दूसरे ईश्वर ने नहीं किया. आदर्श परिवार किसे कहते हैं, वो महादेव के परिवार को देखकर ही समझा जा सकता है. आज भी जब मिथिला में कोई पिता अपनी बेटी के लिए वर खोजता है, तो वो महादेव खोजता है, न कि विष्णु खोजता है.

मिथिला की लड़कियों की चाहत, महादेव सा पति

कुमुद सिंह बताती हैं कि वसंत पंचमी के दिन जब मिथिला के लोग कैलाश (शिवालय) जाकर महादेव को गौरी से विवाह का निमंत्रण देते हैं, तो दल का हर सदस्य बेटी का पिता होता है और उसके लिए जीवन का सबसे अनमोल वरदान महादेव को दामाद के रूप में निमंत्रित करने का सुअवसर होता है. आज भी मिथिला की हर बेटी यही कामना करती है कि पति हो तो महादेव सा, वर्ना जीवन व्यर्थ है.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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