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Magh Mela Snan 2026: आज माघ मेला का दूसरा अमृत स्नान, मकर संक्रांति का बढ़ा धार्मिक महत्व

Updated at : 14 Jan 2026 10:56 AM (IST)
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माघ मेला 2026 का दूसरा अमृत स्नान आज

Magh Mela Snan 2026 के तहत आज प्रयागराज में माघ मेला का दूसरा अमृत स्नान किया जा रहा है. मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी के संयोग से इस स्नान का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है.

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Magh Mela Snan 2026: प्रयागराज में इन दिनों माघ मेला अपने पूरे वैभव और श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ है. संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है, क्योंकि आज 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है. यह माघ मेले का दूसरा प्रमुख और अत्यंत पुण्यदायी स्नान पर्व माना जाता है. विशेष संयोग यह है कि आज षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ गया है.

आत्मशुद्धि और साधना का पर्व

मकर संक्रांति और माघ स्नान का यह अवसर केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का पर्व माना जाता है. शास्त्रों में वर्णित नियम भले ही सरल हों, लेकिन उन्हें पूर्ण श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाना आवश्यक बताया गया है. संगम में स्नान करते समय मौन धारण करने की परंपरा है. श्रद्धालु जल में उतरते हुए मन ही मन पवित्र मंत्रों का जाप करते हैं, जैसे “ॐ नमः शिवाय” या “गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती”, जिससे मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं.

सूर्यदेव को अर्घ्य का विधान

स्नान के उपरांत सूर्यदेव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है. तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प और साबुत अक्षत डालकर उत्तरायण सूर्य को अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस शुभ समय में दिया गया अर्घ्य जीवन में स्थिरता, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन प्रदान करता है.

तिल का पुण्यदायी प्रयोग

मकर संक्रांति के दिन तिल का प्रयोग अत्यंत शुभ माना जाता है. काले तिल मिलाकर स्नान करना या तिल का उबटन लगाना माघ माह में विशेष पुण्यदायी बताया गया है. यह न केवल धार्मिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है.

कल्पवासियों के लिए अमृत स्नान

कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्नान विशेष महत्व रखता है. माघ मेला 2026 का यह दूसरा प्रमुख स्नान अमृत के समान फल देने वाला माना गया है, जिसे आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य प्राप्ति का मार्ग कहा जाता है.

ये भी पढ़ें: माघ मेले का दूसरा स्नान का मुहूर्त जानना है जरूरी 

मंत्र जाप और मोक्ष की कामना

स्नान के समय “ॐ नमो नारायणाय”, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ विष्णवे नमः” जैसे मंत्रों का जाप करने से पुण्य फल में कई गुना वृद्धि होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ माह में गंगा स्नान करने से व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष का अधिकारी बनता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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