Magh Bihu 2026: जनवरी आते ही देशभर में ठंड के साथ-साथ त्योहारों की रौनक भी बढ़ जाती है. जहां ज्यादातर राज्यों में मकर संक्रांति की तैयारियां शुरू हो जाती हैं, वहीं असम में इस समय उत्सव का माहौल कुछ खास होता है. यहां लोग माघ बिहू की तैयारियों में जुट जाते हैं. खेतों से फसल कटकर घर आ चुकी होती है, अनाज के भंडार भर जाते हैं और गांवों में खुशी साफ झलकने लगती है. पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में माघ आज बिहू 15 जनवरी, गुरुवार को मनाया जा रहा है. संक्रांति का क्षण 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर था, लेकिन असम में जश्न इससे पहले ही शुरू हो चुका है.
बिहू: असम की पहचान
असम में बिहू सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. माघ बिहू खास तौर पर खेती और प्रकृति के प्रति धन्यवाद जताने का पर्व माना जाता है. साल में तीन बार बिहू मनाया जाता है, लेकिन माघ बिहू इसलिए खास है क्योंकि यह फसल कटाई के बाद आता है. किसान सालभर की मेहनत के बाद इस दिन सुकून और खुशी के साथ जश्न मनाते हैं. खाने-पीने और मेल-जोल की वजह से ही इसे भोगली बिहू कहा जाता है.
जब घर-घर में फैलती है पकवानों की खुशबू
माघ बिहू के दिन असम के हर घर में स्वादिष्ट पकवान बनते हैं. चावल, तिल और गुड़ से बने पारंपरिक व्यंजन इस त्योहार की पहचान हैं. गांवों में ‘मेज़ी’ नाम के अलाव जलाए जाते हैं. सुबह-सवेरे लोग इन अलावों को अग्नि देवता को समर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. यह परंपरा लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम भी करती है.
गमोसा, नृत्य और खेलों से सजा बिहू का रंग
इस पर्व पर गमोसा देना असमिया संस्कृति की अहम परंपरा है. लाल और सफेद रंग का यह कपड़ा सम्मान और अपनापन दिखाता है. ढोल और पेपा की धुन पर किया जाने वाला बिहू नृत्य पूरे माहौल में ऊर्जा भर देता है. कई गांवों में भैंसों और मुर्गों की लड़ाई जैसे पारंपरिक खेल भी होते हैं, जिससे त्योहार किसी मेले जैसा नजर आता है. कुल मिलाकर माघ बिहू असम में खुशी, परंपरा और साथ होने का एहसास दिलाने वाला खास पर्व है.

