आज है कालाष्टमी, करें काल भैरव की चालीसा का पाठ, डर और भय का होगा नाश

श्री काल भैरव चालीसा
Kalashtami 2026: कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा की जाती है. इस दिन पूजा के समय काली भैरवी की चालीसा का पाठ करने से पूजा के फल पर शुभ प्रभाव पड़ता है. इसलिए इस दिन घरों या मंदिरों में काल भैरव की पूजा करते समय अवश्य काली भैरवी की चालीसा का पाठ करें.
Kalashtami 2026: आज 9 फरवरी 2026 को मासिक कालाष्टमी मनाया जा रहा है. यह दिन भगवान शंकर के रौद्र स्वरूप, भगवान काल भैरव को समर्पित है. मान्यता है कि भगवान काल भैरव की आराधना से जीवन से नकारात्मकता दूर होती है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और भय-दर का नाश होता है. भगवान काल भैरव की आराधना के समय चालीसा का पाठ करने का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि काल भैरव जल्दी प्रसन्न होते हैं. यहां पढ़ें भगवान काल भैरव की चालीसा के लिरिक्स.
काल भैरव चालीसा (Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi)
भैरव चालीसा – दोहा
श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ,
चालीसा वन्दन करों, श्री शिव भैरवनाथ।
श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल,
श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल।
भैरव चालीसा – चौपाई
जय जय श्री काली के लाला,
जयति जयति काशी-कुतवाला।
जयति बटुक भैरव जय हारी,
जयति काल भैरव बलकारी।
जयति सर्व भैरव विख्याता,
जयति नाथ भैरव सुखदाता।
भैरव रूप कियो शिव धारण,
भव के भार उतारन कारण।
भैरव रव सुन है भय दूरी,
सब विधि होय कामना पूरी।
शेष महेश आदि गुण गायो,
काशी-कोतवाल कहलायो।
जटाजूट सिर चन्द्र विराजत,
बाला, मुकुट, बिजयठ साजत।
कटि करधनी घुंघरु बाजत,
दर्शन करत सकल भय भाजत।
जीवन दान दास को दीन्हो,
कीन्हो कृपा नाथ तब चीन्हो।
वसि रसना बनि सारद-काली,
दीन्यो वर राख्यो मम लाली।
धन्य धन्य भैरव भय भंजन,
जय मनरंजन खल दल भंजन।
कर त्रिशूल, डमरु, शुचि कोड़ा,
कृपा कटाक्ष सुयश नहीं थोड़ा।
जो भैरव निर्भय गुण गावत,
अष्टसिद्धि, नवनिधि, फल पावत।
रूप विशाल, कठिन दुख मोचन,
क्रोध कराल, लाल दुहुं लोचन।
अगणित भूत-प्रेत संग डोलत,
बं बं बं शिव, बं बं बोतल।
रुद्रकाय, काली के लाला,
महा कालहू के हो काला।
बटुक नाथ हो काल गंभीर,
श्वेत, रक्त, और श्याम शरीरा।
करत तीनहू रूप प्रकाशा,
भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा।
त्न जड़ित कंचन सिंहासन,
व्याघ्र चर्म, शुचि नर्म सुआनन।
तुमहि जाई काशिहिं जन ध्यावहिं,
विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं।
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय,
जय उन्नत हर उमानन्द जय।
भीम त्रिलोकन स्वान साथ जय,
बैजनाथ श्री जगतनाथ जय।
महाभीम भीषण शरीर जय,
रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय।
अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय,
श्वानारुढ़ सयचन्द्र नाथ जय।
निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय,
गहत अनाथन नाथ हाथ जय।
त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय,
क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय।
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय,
कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय।
रुद्र बटुक क्रोधेश काल धर,
चक्र तुण्ड, दश पाणिव्याल धर।
करि मद पान, शम्भु गुणगावत,
चौंसठ योगिन संग नचावत।
करत कृपा जन पर बहु ढंगा,
काशी कोतवाल अड़बंगा।
देयं काल भैरव जब सोटा,
नसै पाप, मोटा से मोटा।
जाकर निर्मल होय शरीर,
मिटै सकल संकट, भव पीरा।
श्री भैरव भूतों के राजा,
बाधा हरत, करत शुभ काजा।
ऐलादी के दुःख निवारयो,
सदा कृपा करि, काज सम्हारयो।
सुंदरदास सहित अनुरागा,
श्री दुर्वासा निकट प्रयागा।
श्री भैरव जी की जय लेख्यो,
सकल कामना पूरण देख्यो।
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By Neha Kumari
प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.
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