जुड़ शीतल पर्व कल: मैथिली समाज में क्यों खास है यह त्योहार?

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कल मनाया जाएगा जुड़ शीतल पर्व

Jud Sheetal Festival 2026: जुड़ शीतल पर्व मैथिली समाज का खास त्योहार है, जिसमें बासी भोजन, शीतल जल और मां शीतला की पूजा का विशेष महत्व है, जो स्वास्थ्य और परंपरा से जुड़ा है.

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Jud Sheetal 2026: मैथिली भाषी समाज में 15 अप्रैल को ‘जुड़ शीतल’ पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यह पर्व विशेष रूप से शीतलता, स्वास्थ्य और पारिवारिक आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग बासी जल से स्नान करते हैं और मां शीतला की पूजा-अर्चना करते हैं. पूजा के बाद बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. साथ ही घर के मुख्य द्वार पर भी बासी भोजन अर्पित कर सिंदूर का टीका लगाया जाता है, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव की कामना की जाती है.

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जुड़ शीतल 2026 कब है?

परंपरा के अनुसार, जुड़ शीतल पर्व सतुआनी (सतुआन) के अगले दिन मनाया जाता है. यही कारण है कि इसकी तिथि हर साल 14 या 15 अप्रैल के आसपास पड़ती है. मैथिली कैलेंडर के अनुसार 14 अप्रैल से नववर्ष की शुरुआत होती है, जबकि अगले दिन जुड़ शीतल का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.

‘जुड़ायल रहु’ का आशीर्वाद

इस पर्व की सबसे खास परंपरा है बड़ों द्वारा छोटों को आशीर्वाद देना. सुबह-सुबह घर के बुजुर्ग परिवार के सदस्यों के सिर पर चुल्लू भर ठंडा पानी डालते हैं और ‘जुड़ायल रहु’ (सदा शीतल रहो) का आशीर्वाद देते हैं. यह परंपरा न केवल धार्मिक भावना को दर्शाती है, बल्कि भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाने का प्रतीक भी है.

बासी भोजन और सत्तू की परंपरा

रांची के हनुमान जोड़ा मंदिर के पुजारी रामेश्वर पाठक के अनुसार जुड़ शीतल के दिन भोजन की परंपरा भी बेहद खास होती है. इस दिन ताजा भोजन बनाने के बजाय एक दिन पहले तैयार किया गया बासी भोजन खाने का रिवाज है. इसमें कढ़ी-बड़ी, भात (चावल), सत्तू, दही-चूड़ा और आम की चटनी प्रमुख रूप से शामिल होते हैं. हालांकि यह सुनने में अलग लग सकता है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण छिपा है. गर्मी के मौसम की शुरुआत में ठंडा और हल्का भोजन शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है और पाचन तंत्र को आराम देता है.

लोकसंस्कृति और उत्सव का रंग

इस दिन लोकगीत, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक आयोजन पूरे वातावरण को उत्सवमय बना देते हैं. परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी मिलकर इस पर्व का आनंद लेते हैं, जिससे सामाजिक संबंध भी मजबूत होते हैं.

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अन्य प्रमुख तिथियां

जुड़ शीतल के आसपास अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियां भी आती हैं. 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी, जबकि 17 अप्रैल को अमावस्या तिथि शाम तक रहेगी, जिस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है. इस प्रकार जुड़ शीतल पर्व परंपरा, स्वास्थ्य और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश देता है.

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