Jivitputrika Vrat 2021: किस दिन रखा जाएगा जिउतिया व्रत 28 या 29, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत नियम

Updated at : 15 Sep 2021 11:52 AM (IST)
विज्ञापन
Jivitputrika Vrat 2021: किस दिन रखा जाएगा जिउतिया व्रत 28 या 29, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत नियम

Jivitputrika Vrat 2021: हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत का बेहद खास महत्व होता है. जीवित्पुत्रिका व्रत को जिउतिया या जितिया व्रत के नाम से भी जाना जाता हैं. इस दिन माताएं अपनी संतान की सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और पुत्र के कल्याण की कामना करती हैं.

विज्ञापन

Jivitputrika Vrat 2021: हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत का बेहद खास महत्व होता है. जीवित्पुत्रिका व्रत को जिउतिया या जितिया व्रत के नाम से भी जाना जाता हैं. इस दिन माताएं अपनी संतान की सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और पुत्र के कल्याण की कामना करती हैं.

इस साल जितिया व्रत का त्योहार 29 सितंबर दिन बुधवार को पड़ रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत रखा जाता है. जितिया व्रत बहुत ही कठिन होता है. इस व्रत में पानी और अन्न का त्याग किया जाता है, इसलिए यह निर्जला व्रत कहलाता है.

कब है जितिया व्रत

इस साल जितिया व्रत 28 से 30 सितंबर तक मनाया जाएगा. यह पर्व तीन दिनों का होता है. 28 सितंबर को नहाए-खाए के साथ जितिया का पर्व शुरू हो जाएगा. 29 सितंबर को मताएं निर्जला व्रत रखेंगी. वहीं, 30 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा.

जितिया व्रत शुभ मुहूर्त 2021

  • जीवित्पुत्रिका व्रत 29 सितंबर 2021 दिन बुधवार

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ 28 सितंबर की शाम 06 बजकर 16 मिनट पर

  • अष्टमी तिथि समाप्त 29 सितंबर की रात 8 बजकर 29 मिनट पर

Also Read: Pitru Paksha 2021 : 21 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, जानें प्रमुख तिथियां और श्राद्ध से जुड़ी खास बातें
जीवित्पुत्रिका व्रत 2021 पारण

29 सितंबर को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली माताओं को 30 सितंबर दिन गुरुवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद पूजा करके पारण करना होगा. दोपहर से पूर्व पारण कर लेना शुभ रहेगा. सूर्योदय के बाद का पारण बेहद शुभ रहेगा. पारण किए बिना व्रत पूरा नहीं होता है.

कठिन व्रतों में से एक माना जाता है जितिया व्रत

ज्योतिष के अनुसार, जितिया व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखकर कामना करती हैं. सप्तमी तिथि को नहाए खाए, अष्टमी तिथि को जितिया व्रत और नवमी के दिन व्रत का पारण किया जाता है. नहाए खाए वाले दिन व्रती महिलाएं सूर्यास्त के बाद कुछ नहीं खाती हैं.

जीवित्पुत्रिका व्रत पूजन विधि

इस दिन स्नान करने के बाद सूर्य नारायण की प्रतिमा को स्नान कराएं. फिर धूप, दीप से आरती करें और इसके बाद भोग लगाएं.

जितिया व्रत का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत का महत्व महाभारत काल से जुड़ा है. कहा जाता है कि उत्तरा के गर्भ में पल रहे पांडव पुत्र की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने उसे पुनर्जीवित कर दिया था. तभी से स्त्रियां आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को निर्जला व्रत रखती हैं. इस व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीकृष्ण व्रती महिलाओं के संतान की रक्षा करते हैं.

Also Read: Kundli yog: राहु शनि और सूर्य की अशुभ दृष्टि के कारण दांपत्य जीवन होता है बेहद कष्टकारी, जाने इसका निवारण

संजीत कुमार मिश्रा

ज्योतिष एवं रत्न विशेषज्ञ

मोबाइल नंबर- 8080426594-9545290847

Posted by: Radheshyam Kushwaha

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola