Jitiya Vrat 2022: मिथिला में जितिया व्रत 17 सितंबर को, नहाय खाय कल, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त,पारण समय जानें
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Sep 2022 2:05 PM
Jitiya Vrat 2022: जीवित्पुत्रिका व्रत महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए रखती हैं. तीन दिन तक चलने वाले इस व्रत में महिलाएं जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करतीं. इस बार मिथिला में जितिया व्रत की शुरुआत 16 सितंबर से हो रही है. कल नहाय खाय है. कारण समेत पूरी डिटेल जानें...
Jitiya Vrat 2022: मिथिला की महिलाओं के लिए इस बार जितिया का व्रत बेहद कठिन रहने वाला है. जीवित्पुत्रिका या जितिया का व्रत नहाय खाय के साथ शुरू होता है. यह व्रत संतान की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए रखा जाता है. माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और उसकी रक्षा के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. तीन दिन तक चलने वाले इस व्रत में महिलाएं जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करतीं. मिथिला की महिलाएं 16 सितंबर को नहाय खाय की विधि करेंगीं जिसमें दिन में मछली और मड़ुआ की रोटी खाएंगी. 17 सितंबर के दिन शनिवार की सुबह पांच बजे ओठगन के साथ निर्जला जितिया व्रत की शुरुआत होगी जो 18 सितंबर को शाम साढ़े चार बजे संपन्न हो रही है. इस साल मिथिला की महिलाओं का व्रत करीब 34 घंटा 53 मिनट का होगा.
शास्त्रों के अनुसार यदि सूर्योदय के समय सप्तमी हो और अगले दिन अष्टमी हो तो सप्तमी के दिन ही व्रत रखना शुभ होता है. अष्टमी में सह व्रत नहीं रखना चाहिए. प्रदोष काल में अष्टमी तिथि हो तो उसी दिन व्रत रखा जाता है और यदि प्रदोष काल में दोनों ही दिन अष्टमी तिथि हो तो सप्तमी युक्त अष्टमी में जितिया व्रत रखा जाता है.
जितिया नहाय खाय- 16 सितंबर, शुक्रवार
जितिया व्रत जिवितपुत्रिका महाअष्टमी व्रत- 17 सितंबर, शनिवार
18 सितंबर की शाम को 4 बजकर 39 मिनट के बाद पारण
(17 सितंबर को अष्टमी युक्त सप्तमी तिथि है.)
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स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
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इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें.
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इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें.
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इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है.
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इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है.
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पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनें.
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पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें.
जितिया व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 को सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद किया जा सकेगा.
जितिया व्रत संतान की लंबी आयु, निरोगी जीवन और खुशहाली के लिए रखा जाता है. यह व्रत नहाए खाए के साथ शुरू होता है. दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है.
इस व्रत की कहानी जीमूतवाहन से जुड़ी है. गन्धर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे. इसलिए उन्होंने अपना राज्य आदि छोड़ दिया और वो अपने पिता की सेवा करने के लिए वन में चले गए थे. वन में एक बार उन्हें घूमते हुए नागमाता मिली. नागमाता विवाप कर रही थी, जब जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है, वंश की रक्षा करने के लिए वंश ने गरुड़ से समझौता किया है. समझौते के अनुसार वे प्रतिदिन उसे एक नाग खाने के लिए देंगे और बदले में वो हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा.
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