होली 2026 पर बड़ा भ्रम! 1 दिन या 2 दिन का त्योहार, जानें कब है असली रंगवाली होली

Published by : Shaurya Punj Updated At : 01 Mar 2026 12:56 PM

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होली 2026 किस दिन

Holi 2026 Date: होली 2026 की तारीख को लेकर बना है भ्रम. जानें होलिका दहन कब होगा, रंगवाली होली किस दिन मनाएं और पंचांग व अंग्रेजी कैलेंडर के अंतर की पूरी जानकारी.

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Holi 2026 date: हर साल की तरह इस बार भी होली की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कोई 3 मार्च 2026 को होली मनाने की बात कर रहा है तो कोई 4 मार्च को रंग खेलने की तैयारी में है. केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि अलग-अलग पंचांगों और ज्योतिषाचार्यों के मत भी भिन्न दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में स्वाभाविक है कि सवाल उठे—आखिर होली कब है? होलिका दहन किस दिन होगा? और रंगों की होली किस तारीख को खेली जाएगी?

ज्योतिषाचार्य एन के बेरा के अनुसार इस बार फाल्गुन पूर्णिमा दो दिनों में पड़ रही है, जिसकी वजह से भ्रम की स्थिति बनी है. हिंदू पंचांग के अनुसार तिथियों का निर्धारण सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से होता है, जबकि अंग्रेजी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर में तिथियां आधी रात से बदलती हैं. यही अंतर कन्फ्यूजन की मुख्य वजह है.

होली कब है? जानें तारीख और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगी. पूर्णिमा तिथि 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी. धार्मिक नियमों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में, विशेष रूप से प्रदोष काल में किया जाता है. चूंकि 3 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए होलिका दहन 3 मार्च 2026 को किया जाएगा. इसके अगले दिन, यानी 4 मार्च 2026 को रंगवाली होली मनाई जाएगी. परंपरा के अनुसार पहले होलिका दहन की अग्नि जलाई जाती है और अगले दिन रंगों से उत्सव मनाया जाता है.

होली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, सत्य और भक्ति की विजय का प्रतीक है. इसकी मूल कथा प्रह्लाद और होलिका से जुड़ी है. हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति भक्ति से क्रोधित था. उसने प्रह्लाद को अनेक बार मारने का प्रयास किया, परंतु हर बार वे बच गए. अंततः होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई. लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई. होलिका दहन उसी घटना की स्मृति में किया जाता है. यह संदेश देता है कि अधर्म और अहंकार का अंत निश्चित है तथा सच्ची श्रद्धा और विश्वास की विजय होती है.

रंगवाली होली और धुलंडी का फर्क

अक्सर लोग रंगवाली होली और धुलंडी को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में सूक्ष्म अंतर है. रंगवाली होली, जिसे धुलेंडी या धुलंडी भी कहा जाता है, होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है. इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल और रंग लगाकर बधाई देते हैं. कई स्थानों पर इसे धुलंडी इसलिए कहा जाता है क्योंकि पुराने समय में लोग राख या धूल से भी एक-दूसरे को अभिषेक करते थे, जो बुराइयों के नाश का प्रतीक था. ब्रज क्षेत्र में होली कई दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों में खेली जाती है—लठमार होली, फूलों की होली, रंग पंचमी आदि. वहीं उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में होलिका दहन के अगले दिन ही मुख्य रंगोत्सव मनाया जाता है.

होली की तारीख को लेकर पंचांग बनाम ग्रेगोरियन कैलेंडर

होली की तारीख को लेकर जो भ्रम हर साल पैदा होता है, उसका बड़ा कारण पंचांग और ग्रेगोरियन कैलेंडर की गणना पद्धति में अंतर है. ग्रेगोरियन कैलेंडर में तारीख रात 12 बजे बदल जाती है, जबकि हिंदू पंचांग में तिथि का निर्धारण चंद्रमा की गति के अनुसार होता है. एक तिथि 24 घंटे की निश्चित नहीं होती; वह कभी कम तो कभी अधिक समय तक चल सकती है. जब पूर्णिमा तिथि दो अलग-अलग दिनों में पड़ती है, तब यह तय करना आवश्यक हो जाता है कि प्रदोष काल या शुभ मुहूर्त किस दिन पड़ रहा है. शास्त्रों के अनुसार जिस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा विद्यमान हो, उसी दिन होलिका दहन किया जाना चाहिए. यही कारण है कि इस बार 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगवाली होली मनाने का निर्णय अधिक मान्य माना जा रहा है.

होलिका दहन के दिन क्या करें, क्या न करें?

होलिका दहन के दिन लोग नई फसल की बालियां, गेहूं या जौ की बालियां अग्नि में अर्पित करते हैं. यह समृद्धि और शुभ फल की कामना का प्रतीक है. रंगों की होली के दिन सुबह से दोपहर तक रंग खेलना शुभ माना जाता है. बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना परंपरागत रूप से श्रेष्ठ समझा जाता है.

ये भी पढ़ें: होली 2026 पर चंद्र ग्रहण का असर, रंग खेलने का सही समय क्या है?

इस वर्ष होली की तिथि को लेकर भ्रम का मुख्य कारण फाल्गुन पूर्णिमा का दो दिनों में पड़ना है. पंचांग के अनुसार 3 मार्च 2026 को होलिका दहन और 4 मार्च 2026 को रंगवाली होली मनाई जाएगी. धार्मिक दृष्टि से होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों का पर्व है—सत्य की विजय, भक्ति की शक्ति और समाज में प्रेम व एकता का संदेश. सही तिथि और परंपराओं का पालन करते हुए यदि यह पर्व मनाया जाए, तो यह न केवल आनंद देता है बल्कि आध्यात्मिक संतुलन भी प्रदान करता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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